पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री की बिगड़ती सेहत पर बढ़ी चिंता, मेडिकल बोर्ड करेगा जांच; कोर्ट ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने और मामले का राजनीतिकरण करने से भी रोका
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से जेल में बंद इमरान खान की सेहत को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जेल से निकालकर निजी अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। अदालत के इस फैसले को इमरान खान और उनके परिवार के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
बताया गया है कि अदालत ने इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच और इलाज की निगरानी की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने परिवार के सदस्यों को हर सप्ताह इमरान खान से मुलाकात करने की अनुमति देने का भी आदेश दिया है।
इमरान खान की पार्टी और परिवार लंबे समय से उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं। उनकी ओर से जेल में उचित चिकित्सा सुविधा और नियमित मेडिकल जांच की मांग की जाती रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान खान को जेल के बजाय अस्पताल में रखकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा।
48 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाने का आदेश
PTI के प्रवक्ता नईम हैदर पंजुथा के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। बताया गया है कि वह 16 सितंबर तक अस्पताल में रहेंगे।
अदालत का यह आदेश ऐसे समय आया है जब इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट को लेकर उनके परिवार और पार्टी नेताओं ने गंभीर चिंता जताई थी। जेल में रहने के दौरान उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि इमरान खान की स्थिति की निगरानी और जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड बनाया जाए। इस बोर्ड में PTI नेता के निजी डॉक्टर के साथ उनकी बहन डॉ. उजमा खान को भी शामिल किए जाने की बात कही गई है। इससे इमरान खान के परिवार को उनकी चिकित्सा जांच की प्रक्रिया में अधिक भरोसा मिलने की उम्मीद है।
परिवार से हर सप्ताह मुलाकात की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ अस्पताल में इलाज का रास्ता ही साफ नहीं किया, बल्कि इमरान खान के परिवार के लिए भी महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने उनके परिवार के सदस्यों को हर सप्ताह उनसे मुलाकात करने की अनुमति देने का निर्देश दिया है।
लंबे समय से जेल में रहने के कारण इमरान खान की परिवार से मुलाकात और उनके संपर्क को लेकर भी PTI की ओर से सवाल उठाए जाते रहे हैं। ऐसे में साप्ताहिक मुलाकात की अनुमति को परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
हालांकि, अदालत ने इस मामले में कुछ सीमाएं भी तय की हैं। इमरान खान के वकीलों और परिवार को उनकी मेडिकल रिपोर्ट मीडिया के साथ साझा नहीं करने और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने का निर्देश दिया गया है।
तीन साल से जेल में हैं इमरान खान
73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं। पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और प्रधानमंत्री रहे इमरान खान को अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया है। हालांकि, इमरान खान और उनकी पार्टी लगातार इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं।
इमरान खान का आरोप रहा है कि 2022 में सत्ता से हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से मामले दर्ज किए गए। PTI भी कई मौकों पर उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताती रही है।
अब उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पाकिस्तान की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इमरान खान अभी भी देश के प्रमुख राजनीतिक चेहरों में शामिल हैं।
दाहिनी आंख की रोशनी को लेकर भी जताई गई चिंता
इमरान खान की सेहत को लेकर पिछले कुछ समय से उनके परिवार और समर्थकों की ओर से लगातार चिंता जताई जा रही है। उनके वकीलों का दावा है कि जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी कम हो गई है।
इमरान खान के बेटों की ओर से भी कई बार उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की गई है। परिवार का कहना रहा है कि जेल में रहने के दौरान उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलनी चाहिए और उनकी नियमित जांच होनी चाहिए।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने भी इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर चिंता जताई थी। उनके अनुसार, उन्होंने इमरान खान की मेडिकल रिपोर्ट देखी थीं और उनमें कुछ बातें चिंताजनक लगीं।
हाई ब्लड प्रेशर और तेज धड़कन का भी जिक्र
आरिफ अल्वी के मुताबिक, मेडिकल रिपोर्ट में इमरान खान की बेचैनी, तनाव, दिल की धड़कन तेज होने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थितियों को लेकर चिंता जताई गई थी।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्होंने कई विशेषज्ञों के साथ इन रिपोर्टों को देखा है। उनका कहना था कि इमरान खान की मौजूदा स्थिति को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
अल्वी ने इमरान खान के लंबे जेल जीवन और मानसिक दबाव का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, वह इमरान खान को तीन दशक से अधिक समय से जानते हैं और तनाव को पहले उनकी कमजोरी नहीं माना जाता था। ऐसे में लंबे समय तक जेल में रहने और कथित तौर पर अकेले रखे जाने के प्रभाव को लेकर उन्होंने चिंता व्यक्त की।
अब मेडिकल बोर्ड करेगा स्थिति की जांच
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम मेडिकल बोर्ड का गठन होगा। इस बोर्ड के जरिए इमरान खान की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसमें उनके निजी डॉक्टर और उनकी बहन डॉ. उजमा खान की मौजूदगी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मेडिकल बोर्ड की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इमरान खान को किन स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें किस तरह के इलाज की आवश्यकता है।
अस्पताल में रहने के दौरान डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी करेंगे। इससे उनके परिवार और पार्टी की ओर से उठाए जा रहे स्वास्थ्य संबंधी सवालों का चिकित्सकीय आधार पर जवाब मिलने की संभावना है।
अदालत ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने से क्यों रोका?
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान के परिवार और वकीलों को उनकी मेडिकल रिपोर्ट मीडिया के साथ साझा नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही इस पूरे मामले का राजनीतिकरण करने से भी बचने को कहा गया है।
इसका उद्देश्य संभवतः इमरान खान की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को सार्वजनिक बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बनने से रोकना है। अब उनकी मेडिकल स्थिति से जुड़ी जानकारी और रिपोर्ट अदालत के निर्देशों के अनुसार ही सामने आने की उम्मीद है।
इमरान खान के लिए बड़ी राहत, लेकिन आगे भी कई सवाल
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इमरान खान के लिए निश्चित तौर पर एक महत्वपूर्ण राहत है। लंबे समय से जेल में रहने के बाद अब उन्हें निजी अस्पताल में चिकित्सा सुविधा मिलने का रास्ता साफ हुआ है। परिवार से नियमित मुलाकात की अनुमति भी उनके लिए भावनात्मक और पारिवारिक रूप से अहम हो सकती है।
हालांकि, यह मामला सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इमरान खान की जेल, उनके खिलाफ चल रहे मामले और पाकिस्तान की राजनीति में उनकी भूमिका पहले से ही बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं। ऐसे में उनकी अस्पताल शिफ्टिंग पर राजनीतिक और सार्वजनिक नजरें भी बनी रहेंगी।
फिलहाल सबसे बड़ा फोकस उनकी मेडिकल जांच और स्वास्थ्य स्थिति पर है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि इमरान खान की वास्तविक स्वास्थ्य स्थिति क्या है और आगे उन्हें किस तरह की चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।
