छोटे तालाब में मिली अज्ञात लाश की गुत्थी सुलझी; टैटू से हुई मृतक की पहचान, पुलिस के मुताबिक कथित तौर पर फर्जी डॉक्टर बने युवक ने नाबालिगों को करोड़ों रुपये मिलने का लालच देकर हत्या की साजिश में शामिल किया
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में छोटे तालाब के धोबीघाट इलाके में मिली एक अज्ञात लाश की गुत्थी सुलझाने का दावा पुलिस ने किया है। पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, उसने न सिर्फ जांच अधिकारियों को हैरान किया, बल्कि सोशल मीडिया पर फैलने वाले अंधविश्वास और झूठे दावों के खतरनाक असर को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के मुताबिक, इस हत्याकांड के पीछे कथित तौर पर 1 करोड़ 20 लाख रुपये कमाने का लालच था। आरोप है कि एक युवक ने YouTube पर देखे गए एक वीडियो के दावे पर विश्वास करते हुए दो नाबालिगों को प्रभावित किया और एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर एक किशोर को निशाना बनाने की साजिश रची। पुलिस का दावा है कि हत्या के बाद मृतक के शरीर के एक हिस्से को अलग कर उसे बेचने की कोशिश भी की गई। कथित आरोपी कई दिनों तक खरीदार तलाशते रहे, लेकिन जब कोई खरीदार नहीं मिला तो उसे वापस घटनास्थल के पास फेंक दिया।
इस मामले में पुलिस ने दो वयस्क आरोपियों को गिरफ्तार करने और तीन नाबालिगों को हिरासत में लेने की जानकारी दी है। हालांकि, पुलिस जांच अभी जारी है और कथित तौर पर YouTube वीडियो की वास्तविकता तथा इसके पीछे किसी बड़े गिरोह की भूमिका समेत कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
10 अगस्त को तालाब से मिला था शव
पूरी कहानी की शुरुआत 10 अगस्त को हुई, जब भोपाल के श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र में छोटे तालाब के धोबीघाट इलाके से गोताखोरों ने एक शव बरामद किया। शव कई दिन पुराना बताया गया। शरीर पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस को शुरुआती तौर पर ही मामला संदिग्ध लगा।
पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने हत्या की पुष्टि होने की बात कही और अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। उस समय सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान करना थी, क्योंकि शव के पास ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली थी जिससे पुलिस तुरंत उसके परिवार तक पहुंच सके।
इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में पूछताछ की और सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से मृतक की तस्वीरों के जरिए पहचान की कोशिश शुरू की।
टैटू ने खोली मृतक की पहचान की पहली बड़ी कड़ी
लाश मिलने के करीब पांच दिन बाद 15 अगस्त को जहांगीराबाद निवासी रानी शाह पुलिस के पास पहुंचीं। उन्होंने शव की पहचान अपने बेटे के रूप में की।
पुलिस के अनुसार, पहचान का सबसे अहम आधार मृतक के बाएं हाथ पर बना टैटू था। परिवार ने बताया कि मृतक का नाम रेहान था और उसके हाथ पर एक खास टैटू बना हुआ था।
रेहान कथित तौर पर मोती मस्जिद के आसपास पेन और चाबी के छल्ले बेचकर अपने परिवार की मदद करता था। उसकी पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने उसके परिचितों, दोस्तों और आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू की। यहीं से जांच को आगे बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण कड़ियां मिलनी शुरू हुईं।
जांच में सामने आया कथित मास्टरमाइंड
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक एक युवक जोहेब खान तक पहुंचा। पुलिस के मुताबिक, जोहेब खुद को डॉक्टर बताता था, जबकि जांच में उसके BBA छात्र होने की जानकारी सामने आई।
पुलिस का दावा है कि जोहेब ने इंटरनेट पर एक ऐसा वीडियो देखा था जिसमें एक नाबालिग के शरीर के अंग को बेचकर भारी रकम हासिल करने का दावा किया गया था। इसी कथित दावे ने उसे प्रभावित किया और उसने इसे पैसे कमाने का आसान तरीका समझ लिया।
इसके बाद उसने दो नाबालिगों को अपने संपर्क में लिया और उन्हें कथित तौर पर वही वीडियो दिखाया। पुलिस के अनुसार, उन्हें बताया गया कि इस तरह से उन्हें 1.20 करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, इसी लालच में आरोपियों ने एक ऐसे किशोर को निशाना बनाने की योजना बनाई जिसके बारे में उन्हें लगा कि उसके लापता होने पर तुरंत कोई बड़ा विवाद नहीं होगा।
100 रुपये का लालच देकर बुलाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, घटना से कुछ दिन पहले आरोपियों ने रेहान को अपने साथ चलने के लिए कथित तौर पर 100 रुपये देने का लालच दिया। उसे यह कहकर बुलाया गया कि एक लड़ाई में मदद करनी है और उसे खटलापुरा की तरफ चलना होगा।
रेहान उनके साथ चला गया। पुलिस के अनुसार, रास्ते में कथित तौर पर जोहेब और आमिर कुरैशी भी उनके साथ शामिल हो गए। इसके बाद सभी लोग उसे छोटे तालाब के धोबीघाट के एक अपेक्षाकृत सुनसान हिस्से की ओर ले गए।
पुलिस का आरोप है कि वहां पहले से बनाई गई साजिश के तहत रेहान पर धारदार हथियार से हमला किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।
इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर शव के साथ बेहद गंभीर और अमानवीय व्यवहार किया। पुलिस के अनुसार, उन्होंने शरीर के एक हिस्से को अलग करके उसे बेचने की योजना बनाई और उसे पॉलिथीन में रख लिया।
तीन दिन तक खरीदार की तलाश का दावा
पुलिस पूछताछ में कथित तौर पर यह सामने आया कि आरोपी उस चीज को लेकर करीब तीन दिनों तक भोपाल में खरीदार तलाशते रहे। उनका मकसद कथित तौर पर उसे बेचकर बड़ी रकम हासिल करना था।
लेकिन तीन दिन तक उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक, जिस व्यक्ति से उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद थी, उसने भी कथित तौर पर इसे लेने से इनकार कर दिया।
समय बीतने के साथ उसमें से दुर्गंध आने लगी। इसके बाद आरोपी कथित तौर पर उसे वापस लेकर उसी इलाके में पहुंचे और उसे शव के पास फेंक दिया।
आरोपियों को उम्मीद थी कि शव की पहचान नहीं हो पाएगी और मामला अज्ञात शव के रूप में बंद हो जाएगा। लेकिन पुलिस की जांच और मृतक की पहचान होने के बाद पूरी कहानी की कड़ियां जुड़ती चली गईं।
सर्विलांस से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
रेहान की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों और संपर्कों की जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों, पूछताछ और सर्विलांस की मदद से पुलिस कथित तौर पर उन लोगों तक पहुंची जिन पर हत्या में शामिल होने का शक था।
पूछताछ के दौरान पुलिस को कथित तौर पर हत्या की साजिश और 1.20 करोड़ रुपये के लालच से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले।
पुलिस ने जोहेब खान और आमिर कुरैशी को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जोहेब के पास से ऐसी सामग्री भी मिली है जिससे उसके खुद को डॉक्टर बताने के दावे की जांच की जा रही है।
हालांकि, इन सभी आरोपों और बरामदगी की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
YouTube वीडियो बना जांच का सबसे बड़ा सवाल
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित YouTube वीडियो है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर वह वीडियो क्या था, उसमें किस तरह के दावे किए गए थे और उसे आरोपियों ने किस तरह समझा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आरोपियों ने किसी फर्जी या अंधविश्वास फैलाने वाले वीडियो को सच मान लिया था, या इसके पीछे वास्तव में कोई संगठित नेटवर्क मौजूद है?
पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या आरोपियों को किसी व्यक्ति ने इस तरह की जानकारी दी थी या उन्होंने इंटरनेट पर सामग्री देखने के बाद खुद पूरी साजिश तैयार की।
अगर जांच में कोई संगठित नेटवर्क सामने आता है तो यह मामला सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए फैलाए जा रहे आपराधिक भ्रम और युवाओं को प्रभावित करने वाली ऑनलाइन सामग्री का गंभीर मामला बन सकता है।
क्या सच में 1.20 करोड़ रुपये मिलने थे?
जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि आरोपियों को 1 करोड़ 20 लाख रुपये मिलने की जानकारी कहां से मिली थी। क्या उन्होंने किसी व्यक्ति से यह रकम मिलने का भरोसा लिया था? क्या उन्हें किसी कथित खरीदार के बारे में जानकारी थी? या फिर पूरा दावा केवल इंटरनेट पर देखी गई झूठी जानकारी पर आधारित था?
पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
अगर यह साबित होता है कि आरोपियों ने सिर्फ एक इंटरनेट वीडियो के दावे को सच मानकर इतना गंभीर अपराध किया, तो यह सोशल मीडिया पर मौजूद भ्रामक और अंधविश्वास फैलाने वाली सामग्री के खतरनाक प्रभाव का बेहद गंभीर उदाहरण होगा।
मां ने बेटे को खोया, अब जांच से इंसाफ की उम्मीद
इस घटना ने मृतक रेहान के परिवार को गहरा सदमा दिया है। कई दिनों तक अपने बेटे की पहचान के लिए परेशान परिवार को जब पता चला कि उसके साथ क्या हुआ, तो उनके लिए यह किसी भयावह सदमे से कम नहीं था।
मां द्वारा हाथ के टैटू से बेटे की पहचान किए जाने के बाद पुलिस ने मामले को तेजी से आगे बढ़ाया। अब परिवार को उम्मीद है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या की साजिश में कौन-कौन शामिल था, कथित वीडियो कहां से आया, आरोपियों का आपस में संपर्क कैसे हुआ और क्या इस अपराध के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या नेटवर्क की भूमिका थी।
अंधविश्वास और इंटरनेट के खतरनाक मेल ने खड़े किए बड़े सवाल
भोपाल का यह मामला सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं है। यह इस बात की चेतावनी भी है कि इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी सच नहीं होती। किसी वीडियो में किया गया दावा, किसी पोस्ट में लिखी बात या किसी व्यक्ति द्वारा बताई गई सनसनीखेज जानकारी को बिना जांचे सच मान लेना बेहद खतरनाक हो सकता है।
इस मामले में पुलिस का दावा है कि कथित आरोपियों ने करोड़ों रुपये मिलने के लालच में एक नाबालिग को निशाना बनाया। अब जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि इस खौफनाक साजिश की असली शुरुआत कहां से हुई और इसके पीछे सिर्फ ऑनलाइन अंधविश्वास था या कोई बड़ा नेटवर्क भी मौजूद है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया है, लेकिन इस केस की पूरी तस्वीर सामने आने में अभी समय लग सकता है। जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह सिर्फ इंटरनेट पर देखे गए एक झूठे दावे से उपजी भयावह साजिश थी, या इसके पीछे कोई ऐसा नेटवर्क है जो भोले-भाले युवाओं को करोड़ों रुपये के लालच में अपराध की ओर धकेल रहा है?
