Dehradun Road News: देहरादून में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड टूटने के बाद अब मालदेवता-सोंग बांध रोड में सामने आई खामियों ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है। नंदा की चौकी मामले में जांच के बाद तीन इंजीनियरों को निलंबित किया जा चुका है और संबंधित ठेकेदार के लाइसेंस पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं मालदेवता-सोंग बांध रोड मामले में सिंचाई विभाग ने जांच शुरू कर दी है और अब विभाग की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस पूरे मामले को इसलिए भी राजनीतिक रंग मिल रहा है क्योंकि दोनों निर्माण कार्यों से जुड़ी कंपनियों में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट और उनके परिवार की हिस्सेदारी होने की बात सामने आई है। हालांकि, किसी व्यक्ति या कंपनी की राजनीतिक संबद्धता अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है; वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
देहरादून में बारिश के मौसम के दौरान सड़कों और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। राजधानी में एक तरफ करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किए गए प्रोजेक्ट लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से बनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ निर्माण के कुछ समय बाद ही उनमें खामियां सामने आने से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ताजा मामला मालदेवता-सोंग बांध रोड से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि बारिश के बाद इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और क्षति दिखाई दी। सड़क को बने अभी लंबा समय भी नहीं हुआ था, इसलिए इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे। मामला सामने आने के बाद सिंचाई विभाग ने जांच शुरू कर दी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच में आखिर सड़क की खराब स्थिति की वजह क्या सामने आती है और इसके लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड ने पहले ही बढ़ाई थी चिंता
मालदेवता-सोंग बांध रोड का मामला सामने आने से कुछ समय पहले ही देहरादून में नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड टूटने का मामला काफी चर्चा में रहा था।
28 जुलाई को देहरादून-पांवटा साहिब हाईवे पर नंदा की चौकी के पास पुल की एप्रोच रोड तेज बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। खास बात यह थी कि इस पुल और उससे जुड़े निर्माण कार्य की लागत करीब 16 करोड़ रुपये बताई गई थी और उद्घाटन के महज 16 दिन बाद एप्रोच रोड के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे थे।
लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक था कि अगर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार सड़क और पुल की एप्रोच इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई थी?
मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच कराई और जांच के बाद तीन इंजीनियरों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। संबंधित ठेकेदार के लाइसेंस पर भी प्रतिबंध लगाया गया।
इस कार्रवाई के बाद सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकारी निर्माण कार्यों में लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब मालदेवता-सोंग बांध रोड ने खड़े किए नए सवाल
नंदा की चौकी का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि 29 जुलाई को मालदेवता से सोंग बांध के बीच बनी सड़क की स्थिति ने भी लोगों का ध्यान खींचा।
बताया गया कि बारिश के बाद इस सड़क पर कई जगह बड़े गड्ढे दिखाई देने लगे। सड़क को बने अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ था। ऐसे में सवाल उठने लगा कि आखिर इतनी कम अवधि में सड़क की हालत खराब होने के पीछे क्या कारण है?
क्या सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप थी?
क्या निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन किया गया?
क्या सड़क की डिजाइन और ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त थी?
या फिर लगातार हुई बारिश के कारण सड़क को नुकसान पहुंचा?
इन तमाम सवालों का जवाब फिलहाल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेगा।
दोनों मामलों में सामने आया राजनीतिक कनेक्शन
मालदेवता-सोंग बांध रोड और नंदा की चौकी पुल से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर राजनीतिक चर्चा इसलिए भी तेज हुई क्योंकि संबंधित निर्माण कंपनियों में रुचि भट्ट और उनके परिवार की हिस्सेदारी होने की बात सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक, नंदा की चौकी पुल का निर्माण Himalaya Construction कंपनी से जुड़ा था और इसमें रुचि भट्ट की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है।
वहीं मालदेवता-सोंग बांध रोड के निर्माण से जुड़ी Doon Associate कंपनी में रुचि भट्ट के पति अरविंद कुमार भट्ट की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है।
रुचि भट्ट उत्तराखंड भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष हैं। इसी वजह से निर्माण कार्यों में खामियां सामने आने के बाद विपक्ष ने राजनीतिक सवाल भी उठाए हैं।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि किसी कंपनी में किसी राजनीतिक व्यक्ति या उसके परिवार की हिस्सेदारी होना अपने आप में निर्माण में गड़बड़ी साबित नहीं करता। अनियमितता हुई या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकती है।
इसीलिए मालदेवता-सोंग बांध रोड मामले में आने वाली जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो जाती है।
सिंचाई विभाग ने शुरू की जांच
मालदेवता-सोंग बांध रोड की निर्माण एजेंसी सिंचाई विभाग से जुड़ी है। सड़क में खामियां सामने आने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।
सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी थी। सड़क की स्थिति को देखते हुए निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठना स्वाभाविक है और इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
उन्होंने बताया कि मामले की जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है और एक-दो दिन में जांच पूरी होने की उम्मीद है।
इस जांच में कई बिंदुओं पर गौर किया जा सकता है। इनमें निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की गुणवत्ता, सड़क की मोटाई, निर्माण प्रक्रिया, तकनीकी मानकों का पालन, बारिश के पानी की निकासी और विभागीय निगरानी जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।
अगर जांच में निर्माण से जुड़ी कोई तकनीकी खामी या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
सरकार ने कहा- राजनीतिक पहचान कार्रवाई में आड़े नहीं आएगी
मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि ठेकेदार किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, अगर निर्माण कार्य में अनियमितता पाई जाती है तो सरकार कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगी।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि नंदा की चौकी मामले में जांच के बाद जिस तरह अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की गई, उसी तरह किसी दूसरे निर्माण कार्य में भी जांच के दौरान गड़बड़ी साबित होने पर कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मालदेवता-सोंग बांध रोड के मामले में राजनीतिक कनेक्शन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए।
नंदा की चौकी और मालदेवता रोड में क्या अंतर है?
दोनों मामलों को लेकर सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि नंदा की चौकी पुल मामले में जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई हो चुकी है, जबकि मालदेवता-सोंग बांध रोड का मामला अभी जांच के स्तर पर है।
नंदा की चौकी मामले में तीन इंजीनियरों को निलंबित किया गया और ठेकेदार के लाइसेंस पर प्रतिबंध लगाया गया। वहीं मालदेवता-सोंग बांध रोड में अभी यह तय होना बाकी है कि सड़क की खराब स्थिति के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
यानी फिलहाल मालदेवता मामले में किसी अधिकारी, इंजीनियर या ठेकेदार को दोषी ठहराना जल्दबाजी होगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
बारिश बनी वजह या निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल?
देहरादून में मानसून के दौरान भारी बारिश होती है और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के लिए जल निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में सड़क के क्षतिग्रस्त होने के पीछे सिर्फ निर्माण गुणवत्ता को जिम्मेदार मानना तकनीकी जांच से पहले उचित नहीं होगा।
अगर सड़क के किनारे पर्याप्त ड्रेनेज नहीं है, पानी लंबे समय तक सड़क की सतह के नीचे जमा रहता है या बारिश का पानी उचित तरीके से नहीं निकलता, तो सड़क को नुकसान पहुंच सकता है।
दूसरी तरफ अगर निर्माण में निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई हो, सामग्री की गुणवत्ता खराब रही हो या सड़क की मोटाई और बेस तैयार करने में कमी रही हो तो यह गंभीर तकनीकी लापरवाही का मामला बन सकता है।
इसीलिए जांच में इन सभी पहलुओं को देखना बेहद जरूरी होगा।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
मालदेवता-सोंग बांध रोड मामले में अब सबसे ज्यादा इंतजार जांच रिपोर्ट का है। रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि सड़क में आई खामियां प्राकृतिक परिस्थितियों की वजह से हैं या निर्माण कार्य में किसी स्तर पर कमी रही।
अगर जांच में किसी अधिकारी, इंजीनियर, ठेकेदार या निर्माण एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई हो सकती है।
वहीं अगर जांच में यह पाया जाता है कि सड़क को नुकसान असाधारण बारिश या अन्य प्राकृतिक कारणों से हुआ और निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप था, तो स्थिति अलग होगी।
करोड़ों की सड़कें और जनता का भरोसा
सरकारी सड़कों और पुलों पर खर्च होने वाला पैसा आखिरकार जनता के टैक्स से आता है। इसलिए किसी भी बड़े निर्माण कार्य की गुणवत्ता सिर्फ तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ा विषय है।
जब कोई सड़क या पुल निर्माण के कुछ ही समय बाद खराब हो जाता है, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि निर्माण से पहले और निर्माण के दौरान गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से की गई थी।
देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में बेहतर सड़क और पुल कनेक्टिविटी बेहद जरूरी है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि जो निर्माण किया जाए, वह लंबे समय तक टिकाऊ हो और मौसम की सामान्य परिस्थितियों का सामना कर सके।
अब जांच बताएगी- गलती कहां हुई?
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड पर कार्रवाई के बाद अब मालदेवता-सोंग बांध रोड का मामला सरकार और विभाग के लिए अगली बड़ी परीक्षा बन गया है।
एक तरफ सड़क की खराब स्थिति को लेकर जनता के सवाल हैं, दूसरी तरफ निर्माण से जुड़ी कंपनियों में राजनीतिक परिवार की हिस्सेदारी को लेकर उठ रहे सवाल हैं। लेकिन इन दोनों के बीच सबसे महत्वपूर्ण चीज तथ्य और जांच रिपोर्ट है।
सरकार पहले ही कह चुकी है कि किसी ठेकेदार की राजनीतिक पहचान कार्रवाई के रास्ते में नहीं आएगी। ऐसे में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि सिंचाई विभाग की जांच कितनी निष्पक्ष और तकनीकी रूप से मजबूत होती है और रिपोर्ट में किसकी जिम्मेदारी तय की जाती है।
फिलहाल मालदेवता-सोंग बांध रोड मामले में फैसला जांच रिपोर्ट के बाद ही होगा। अगर निर्माण में खामी साबित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई सरकार के उस दावे की भी परीक्षा होगी कि सरकारी निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
