संसदीय समिति ने जताई चिंता, स्थायी कर्मचारियों की कमी से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं पर पड़ सकता है असर; खाली पदों को जल्द भरने की सिफारिश
नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं NCERT और CBSE में बड़ी संख्या में पद खाली पड़े होने का मामला सामने आया है। संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, NCERT में कुल 2,844 स्वीकृत पदों में से 1,596 पद खाली हैं, जबकि CBSE में 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 पद यानी करीब 44 फीसदी पद रिक्त हैं। इन आंकड़ों ने देश की शिक्षा व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोकसभा में पेश की गई संसदीय समिति की रिपोर्ट में इन रिक्तियों पर चिंता जताते हुए सरकार से जल्द से जल्द भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की सिफारिश की गई है। समिति का मानना है कि देश की स्कूली शिक्षा, पाठ्यक्रम निर्माण, किताबों की तैयारी और बोर्ड परीक्षाओं जैसे महत्वपूर्ण कामों से जुड़ी संस्थाओं में लंबे समय तक बड़ी संख्या में पद खाली रहना उचित नहीं है।
खास बात यह है कि NCERT और CBSE दोनों ही देश की शिक्षा व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कर्मचारियों की भारी कमी का असर संस्थानों के कामकाज की गति और गुणवत्ता पर पड़ सकता है। संसदीय समिति ने स्थायी कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया है।
NCERT में 1,596 पद खाली, दफ्तरों में सबसे ज्यादा कमी
रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक NCERT में कुल 2,844 पद स्वीकृत थे, लेकिन इनमें से सिर्फ 1,248 पदों पर ही कर्मचारी तैनात थे। यानी 1,596 पद खाली पड़े थे।
NCERT की जिम्मेदारी को देखते हुए इन रिक्तियों को काफी अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने, किताबों के विकास और शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण अकादमिक कार्यों में NCERT की केंद्रीय भूमिका है।
NCERT में खाली पदों का ब्योरा देखें तो सबसे ज्यादा रिक्तियां मंत्रालयिक और दफ्तरी श्रेणी में हैं। आंकड़ों के अनुसार—
- अकादमिक पद: 145 खाली
- स्कूल शिक्षण से जुड़े पद: 131 खाली
- मंत्रालयिक/दफ्तरी पद: 916 खाली
- सहायक/अन्य पद: 404 खाली
यानी अकेले मंत्रालयिक और दफ्तरी श्रेणी में ही 916 पद रिक्त हैं। इसके अलावा अकादमिक और स्कूल शिक्षण से जुड़े पदों पर भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां लंबित हैं।
CBSE में भी 44 फीसदी पद खाली
देश में बोर्ड परीक्षाओं का संचालन करने वाली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी CBSE में भी स्थिति चिंताजनक बताई गई है। CBSE में कुल 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 पद खाली हैं। यानी बोर्ड के करीब 44 फीसदी पदों पर कर्मचारी नियुक्त नहीं हैं।
सबसे ज्यादा कमी ग्रुप ‘C’ के पदों में बताई गई है। इस श्रेणी में 595 पद खाली हैं। संसदीय समिति ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द नियमित नियुक्तियां करने की सिफारिश की है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि CBSE अपने कामकाज को चलाने के लिए काफी हद तक कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर निर्भर है। समिति का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली महत्वपूर्ण परीक्षाओं और बोर्ड की प्रशासनिक गतिविधियों के लिए स्थायी कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या जरूरी है।
परीक्षाओं की सुरक्षा और गुणवत्ता पर भी चिंता
CBSE देशभर में लाखों विद्यार्थियों की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करता है। ऐसे में कर्मचारियों की कमी केवल प्रशासनिक समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर परीक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
संसदीय समिति ने आशंका जताई है कि स्थायी कर्मचारियों की कमी से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की सुरक्षा, निगरानी और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। बोर्ड परीक्षाओं का संचालन एक बेहद संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें प्रश्नपत्रों की गोपनीयता से लेकर परीक्षा केंद्रों की निगरानी, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने तक कई स्तरों पर कर्मचारियों की जरूरत होती है।
ऐसे में बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव भी बढ़ सकता है।
31 हजार से ज्यादा स्कूल CBSE से जुड़े
CBSE का दायरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ दशकों में इससे जुड़े स्कूलों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 1992-93 में CBSE से जुड़े स्कूलों की संख्या 3,787 थी, जो अब बढ़कर 31,234 हो चुकी है। यानी CBSE से संबद्ध स्कूलों का नेटवर्क लगातार तेजी से बढ़ा है।
वर्तमान में बोर्ड का कामकाज 25 क्षेत्रीय कार्यालयों और 5 उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से संचालित किया जा रहा है। इतने बड़े नेटवर्क को संभालने के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और स्थायी कर्मचारियों की जरूरत है।
हर साल लाखों छात्र देते हैं बोर्ड परीक्षा
CBSE की जिम्मेदारी इसलिए भी बड़ी है क्योंकि हर वर्ष लाखों विद्यार्थी इसकी बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होते हैं। 2025 में 10वीं कक्षा में 23.8 लाख से ज्यादा और 12वीं कक्षा में 17 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी।
ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या जरूरी है। बोर्ड के सामने एक तरफ विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और स्कूलों का विस्तार है, वहीं दूसरी तरफ स्वीकृत पदों का बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ है।
क्या जल्द आएगी बंपर भर्ती?
संसदीय समिति की ओर से रिक्त पदों को जल्द भरने की सिफारिश के बाद अब उन उम्मीदवारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं जो CBSE और NCERT में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं।
हालांकि, समिति की सिफारिश को सीधे भर्ती नोटिफिकेशन जारी होने के बराबर नहीं माना जा सकता। भर्ती कब और किस प्रक्रिया के तहत होगी, यह संबंधित संस्थानों और सरकार की ओर से तय किया जाएगा। लेकिन बड़ी संख्या में पद खाली होने और संसदीय समिति की ओर से इन्हें भरने पर जोर दिए जाने के बाद आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया तेज होने की संभावना जरूर बढ़ी है।
युवाओं के लिए बन सकता है बड़ा मौका
अगर सरकार और संबंधित संस्थान समिति की सिफारिश के अनुसार खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज करते हैं, तो यह नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ा अवसर हो सकता है। खासकर अकादमिक, प्रशासनिक, मंत्रालयिक, सहायक और ग्रुप ‘C’ जैसे विभिन्न पदों पर भर्ती के रास्ते खुल सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि NCERT के 1,596 और CBSE के 933 खाली पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कब शुरू होगी?
संसदीय समिति की रिपोर्ट ने इस मुद्दे को सामने जरूर ला दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और दोनों संस्थान इन सिफारिशों पर कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं। अगर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होती है, तो इससे न केवल संस्थानों में कर्मचारियों की कमी दूर होगी, बल्कि लाखों विद्यार्थियों से जुड़ी देश की स्कूली शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
