UN की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, NIA की जांच से भी सामने आया था AQIS और AGuH कनेक्शन; मेडिकल प्रोफेशनल्स समेत कई लोगों के कथित तौर पर आतंकी मॉड्यूल से जुड़ने का दावा
नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले के पास नवंबर 2025 में हुए आतंकी हमले की जांच को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC की मॉनिटरिंग टीम की 10 अगस्त 2026 की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास हुआ आतंकी हमला अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट यानी AQIS से जुड़ा था। रिपोर्ट में AQIS की गतिविधियों को लेकर भारत और पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर सुरक्षा चिंता भी जाहिर की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, AQIS ने पिछले कुछ समय में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। बड़े और आसानी से पहचाने जाने वाले आतंकी दस्तों के बजाय संगठन कथित तौर पर छोटे-छोटे और अलग-अलग सेल बनाकर नेटवर्क को फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए लॉजिस्टिक और वित्तीय नेटवर्क विकसित किए जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।
यह खुलासा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लाल किला ब्लास्ट की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA अपनी जांच में पहले ही आरोपियों के कथित संबंध AQIS और उसके सहयोगी संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद यानी AGuH की विचारधारा से जोड़ चुकी है। अब UNSC की रिपोर्ट में AQIS का नाम सामने आने से इस मामले को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के व्यापक नेटवर्क के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और जांच एजेंसियों के दावों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।
नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुआ था धमाका
नवंबर 2025 में दिल्ली के लाल किले के पास एक कार में हुए धमाके ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया था। इस हमले में 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे।
शुरुआत में मामले की जांच दिल्ली पुलिस ने की, लेकिन बाद में गंभीर आतंकी साजिश की आशंका को देखते हुए जांच NIA को सौंप दी गई।
जांच के दौरान NIA ने मृत आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान DNA और फिंगरप्रिंटिंग के जरिए की। जांच एजेंसी के मुताबिक उमर उन नबी पुलवामा का रहने वाला था और उसने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ मेडिसिन के तौर पर काम किया था।
NIA ने अपनी जांच में इस पूरे मामले को एक बड़े कथित जिहादी मॉड्यूल से जोड़ते हुए कहा था कि इसमें शामिल कुछ आरोपी मेडिकल क्षेत्र से जुड़े हुए थे।
AQIS और AGuH की विचारधारा से प्रभावित होने का दावा
NIA की जांच के मुताबिक, इस मॉड्यूल में शामिल लोगों को कथित तौर पर AQIS और AGuH की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया गया था।
जांच में वर्ष 2022 में श्रीनगर में हुई एक कथित गुप्त बैठक का भी जिक्र किया गया। NIA के अनुसार, इस बैठक के दौरान AGuH को दोबारा संगठित करने की कोशिश की गई और इसे AGuH Interim के रूप में आगे बढ़ाने का दावा किया गया।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क का मकसद नए लोगों को जोड़ना, कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार करना और हिंसक गतिविधियों के लिए संसाधन जुटाना था।
इसी कथित नेटवर्क के तहत ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ नाम की योजना का भी उल्लेख किया गया है। NIA का आरोप है कि इस योजना का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देकर भारत में शरिया आधारित शासन स्थापित करना था।
इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए NIA ने मामले में व्यापक स्तर पर जांच की और कई राज्यों में छापेमारी तथा तलाशी अभियान चलाए।
अफगानिस्तान जाने की कथित कोशिश भी सामने आई
NIA के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर अफगानिस्तान जाने के लिए तुर्की के रास्ते हिजरत करने की कोशिश की थी। हालांकि, एजेंसी के मुताबिक यह प्रयास सफल नहीं हुआ।
इसके बाद भारत में ही नेटवर्क को मजबूत करने की योजना बनाए जाने का आरोप है।
जांच के अनुसार, इसी दौरान कथित मॉड्यूल ने नए लोगों को अपने साथ जोड़ने, संसाधन जुटाने और हिंसक गतिविधियों के लिए तैयारी शुरू की।
यह पहलू इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि UNSC की रिपोर्ट भी AQIS की बदलती रणनीति का उल्लेख करती है। रिपोर्ट के मुताबिक संगठन अब बड़े समूहों के बजाय छोटे-छोटे सेल के माध्यम से अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
बांग्लादेश को लेकर UNSC ने जताई चिंता
UNSC मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में बांग्लादेश को लेकर भी विशेष चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में आशंका जाहिर की गई है कि AQIS बांग्लादेश का इस्तेमाल अपने नए आतंकी सेल तैयार करने और क्षेत्र में नेटवर्क मजबूत करने के लिए कर सकता है।
भारत के लिए यह इनपुट इसलिए अहम है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से दक्षिण एशिया में सक्रिय कट्टरपंथी और आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं।
बांग्लादेश में किसी भी आतंकी संगठन के नेटवर्क विस्तार की आशंका का सीधा असर भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है, खासकर सीमावर्ती इलाकों और पूर्वोत्तर राज्यों के संदर्भ में।
यही वजह है कि UNSC रिपोर्ट में AQIS की क्षेत्रीय गतिविधियों और उसके संभावित लॉजिस्टिक एवं वित्तीय नेटवर्क का उल्लेख सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट माना जा रहा है।
छोटे सेल के जरिए नेटवर्क फैलाने की रणनीति
UN की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा AQIS की कथित बदली हुई रणनीति से जुड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, संगठन अब बड़े आतंकी समूहों के बजाय छोटे, अलग-अलग और कम दिखाई देने वाले सेल के जरिए नेटवर्क को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसी रणनीति सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ा सकती है, क्योंकि छोटे और अलग-अलग सेल के बीच प्रत्यक्ष संपर्क सीमित होने पर पूरे नेटवर्क की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि AQIS ने अपने अभियानों के लिए कथित तौर पर लॉजिस्टिक और वित्तीय नेटवर्क तैयार किए हैं।
यानी संगठन की गतिविधियां केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं रहने की आशंका जताई गई है, बल्कि इसके लिए संसाधन, फंडिंग, संपर्क और अन्य सहायता नेटवर्क विकसित किए जाने की बात सामने आई है।
NIA की चार्जशीट में 7,500 पन्नों का विवरण
लाल किला ब्लास्ट की जांच में NIA ने मई 2026 में पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष अदालत में करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
चार्जशीट में मुख्य आरोपी डॉ. उमर उन नबी सहित 10 आरोपियों का कथित संबंध AGuH से बताया गया था। NIA के अनुसार AGuH, AQIS का एक ऑफशूट है।
जांच एजेंसी ने मामले में बड़ी संख्या में गवाहों के बयान, दस्तावेज और जब्त सामान को साक्ष्य के तौर पर शामिल करने की बात कही थी।
रिपोर्ट के मुताबिक चार्जशीट में 588 गवाहों के बयान, 395 से अधिक दस्तावेज और 200 से ज्यादा जब्त सामान को जांच का हिस्सा बनाया गया।
जांच केवल घटनास्थल तक सीमित नहीं रही। NIA ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी और जम्मू-कश्मीर में आरोपियों से जुड़े विभिन्न स्थानों की फोरेंसिक जांच भी की।
कई राज्यों तक पहुंची जांच
लाल किला ब्लास्ट की जांच का दायरा काफी व्यापक रहा। NIA की जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-NCR तक पहुंची।
इससे संकेत मिलता है कि एजेंसी मामले को केवल दिल्ली में हुए एक हमले के रूप में नहीं, बल्कि संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क के रूप में देख रही थी।
जांच के दौरान आरोपियों के संपर्क, यात्रा, वित्तीय गतिविधियों और कथित आतंकी नेटवर्क से संबंधों की पड़ताल की गई।
मामले में डॉ. उमर उन नबी के अलावा आमिर राशिद मीर, जासिर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार को आरोपी बनाया गया था।
चूंकि डॉ. उमर उन नबी की मौत हो चुकी है, इसलिए उसके खिलाफ आरोपों को समाप्त करने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई थी। बाद में NIA ने तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की।
हथियारों और विस्फोटक तैयारियों के आरोप
NIA की जांच में कथित आतंकी मॉड्यूल द्वारा हथियार और विस्फोटक जुटाने के आरोप भी सामने आए।
एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर प्रतिबंधित हथियारों और जिंदा कारतूसों की व्यवस्था की थी। जांच में AK-47, Krinkov राइफल और देशी पिस्तौल जैसे हथियारों का उल्लेख किया गया।
इसके अलावा, आरोपियों द्वारा ड्रोन और रॉकेट से जुड़े IED की तकनीक पर प्रयोग किए जाने का भी दावा किया गया।
NIA के अनुसार, कथित मॉड्यूल का लक्ष्य केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था। जांच में जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की संभावित योजना का भी उल्लेख किया गया।
यह दावा जांच के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि किसी मॉड्यूल की गतिविधियां एक शहर से आगे कई राज्यों तक फैली हों, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसका नेटवर्क और संसाधन तंत्र समझना अधिक जरूरी हो जाता है।
फॉरेंसिक जांच से जोड़ने की कोशिश
NIA ने अपनी जांच में वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों का भी इस्तेमाल किया। घटनास्थल से मिले सबूतों और आरोपियों से जुड़े स्थानों पर की गई जांच के जरिए कथित नेटवर्क की गतिविधियों को जोड़ने की कोशिश की गई।
जांच एजेंसी ने विस्फोट से जुड़े पदार्थों, उपकरणों और अन्य सामग्री की जांच का भी उल्लेख किया है।
हालांकि, ऐसे मामलों में बरामद सामग्री का अंतिम कानूनी महत्व अदालत में उसकी स्वीकार्यता और जांच के दौरान स्थापित किए गए संबंधों पर निर्भर करता है।
मेडिकल प्रोफेशनल्स का कथित कनेक्शन क्यों अहम?
इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जांच एजेंसी के मुताबिक कथित मॉड्यूल में कुछ लोग मेडिकल प्रोफेशन से जुड़े थे।
यदि किसी आतंकी नेटवर्क में शिक्षित और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले लोगों की भर्ती की जाती है, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक अलग तरह की चुनौती पैदा करता है। ऐसे लोगों के पास तकनीकी ज्ञान, सामाजिक संपर्क और सामान्य जीवन की आड़ में गतिविधियां संचालित करने की क्षमता हो सकती है।
NIA ने इसी संदर्भ में आरोपियों की पेशेवर पृष्ठभूमि और कथित आतंकी गतिविधियों के बीच संबंधों की जांच की।
RAW प्रमुख के बांग्लादेश दौरे के बीच रिपोर्ट ने बढ़ाई अहमियत
UNSC रिपोर्ट में बांग्लादेश के जरिए AQIS के नेटवर्क विस्तार की आशंका ऐसे समय सामने आई है, जब भारत की सुरक्षा एजेंसियां पड़ोसी देशों में आतंकी नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं।
रिपोर्ट में बांग्लादेश को लेकर जताई गई चिंता और भारत की सुरक्षा चिंताओं के बीच क्षेत्रीय आतंकवाद का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
पिछले सप्ताह R&AW सचिव पराग जैन के बांग्लादेश दौरे का भी उल्लेख सामने आया है। ऐसे में सुरक्षा और खुफिया स्तर पर दोनों देशों के बीच सहयोग तथा आतंकवाद से जुड़े इनपुट का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण हो सकता है।
AQIS पर भारत पहले ही लगा चुका है प्रतिबंध
NIA के अनुसार, AQIS और उसके विभिन्न स्वरूपों को भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने जून 2018 में आतंकवादी संगठन के रूप में अधिसूचित किया था।
इस पृष्ठभूमि में लाल किला ब्लास्ट की जांच में AQIS का कथित कनेक्शन सामने आना और फिर UNSC मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट में भी AQIS का उल्लेख होना जांच के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
हालांकि, UNSC रिपोर्ट में किसी नेटवर्क या संगठन का उल्लेख होना किसी आरोपी के खिलाफ व्यक्तिगत अपराध का स्वतः अंतिम प्रमाण नहीं होता। संबंधित आरोपों को अदालत में स्थापित करने के लिए जांच एजेंसियों को ठोस और स्वीकार्य साक्ष्य पेश करने होंगे।
अब जांच का फोकस नेटवर्क की जड़ों पर
लाल किला ब्लास्ट मामले में अब जांच का एक बड़ा सवाल यह है कि कथित मॉड्यूल को वैचारिक, वित्तीय और लॉजिस्टिक मदद कहां से मिली।
NIA पहले ही कई राज्यों में जांच कर चुकी है। अब UNSC की रिपोर्ट में AQIS के क्षेत्रीय नेटवर्क और छोटे सेल की रणनीति का उल्लेख सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस नेटवर्क की अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को समझना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि कथित मॉड्यूल के संपर्क देश के बाहर सक्रिय किसी नेटवर्क से थे या नहीं, फंडिंग के स्रोत क्या थे और नए सदस्यों की भर्ती किस तरीके से की जा रही थी।
लाल किला ब्लास्ट की जांच अब अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में
लाल किले के पास हुआ हमला पहले ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर मामला था। लेकिन अब UNSC की रिपोर्ट में AQIS का कथित संबंध सामने आने के बाद मामला केवल भारत की आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गया है।
एक तरफ NIA की चार्जशीट में AQIS और AGuH की कथित विचारधारा से प्रभावित नेटवर्क का उल्लेख है, वहीं दूसरी ओर UNSC मॉनिटरिंग टीम AQIS के दक्षिण एशिया में छोटे-छोटे सेल और लॉजिस्टिक नेटवर्क के विस्तार को लेकर चिंता जता रही है।
इन दोनों घटनाक्रमों को साथ रखकर देखें तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती केवल लाल किला ब्लास्ट के आरोपियों की पहचान और मुकदमे तक सीमित नहीं है। उन्हें यह भी समझना होगा कि क्या इस कथित नेटवर्क की जड़ें दूसरे राज्यों और पड़ोसी देशों तक फैली हैं।
सबसे बड़ा सवाल—कितना बड़ा था नेटवर्क?
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि लाल किला ब्लास्ट के पीछे कथित नेटवर्क की वास्तविक पहुंच कितनी थी?
क्या यह केवल कुछ लोगों तक सीमित मॉड्यूल था या इसके पीछे देश के अलग-अलग हिस्सों में छोटे-छोटे सेल सक्रिय थे? क्या कथित तौर पर तैयार किया गया नेटवर्क आगे भी हमलों की योजना बना रहा था? क्या इसके संपर्क भारत के बाहर मौजूद संगठनों से थे? और क्या बांग्लादेश या दूसरे पड़ोसी देशों के रास्ते क्षेत्रीय नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी?
इन सभी सवालों के जवाब आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से सामने आएंगे।
फिलहाल, UNSC मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट की जांच को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम जरूर दे दिया है। NIA की जांच में पहले से सामने आए AQIS और AGuH के कथित कनेक्शन के बीच अब UNSC रिपोर्ट में AQIS का उल्लेख सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण इनपुट माना जा रहा है।
लाल किला ब्लास्ट में 11 लोगों की जान गई थी। इसलिए इस मामले की जांच का उद्देश्य केवल दोषियों तक पहुंचना ही नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को समझना भी है जो कथित तौर पर कट्टरपंथ, भर्ती, फंडिंग और आतंकी संसाधनों के जरिए देश में हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा था।
अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे अहम चुनौती यही है कि लाल किले के पास हुए इस हमले के पीछे कथित आतंकी नेटवर्क की हर कड़ी को साक्ष्यों के आधार पर सामने लाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी किसी साजिश का नेटवर्क देश में दोबारा सिर न उठा सके।
