25 वर्षीय सरकारी शिक्षिका की मौत के मामले में आरोपी सास प्रवीणा खत्री को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने कहा- असामान्य परिस्थितियों में हुई मौत, विवेचना अभी जारी; सृष्टि के मायके पक्ष ने लगाए थे प्रताड़ना और दहेज मांग के गंभीर आरोप
देहरादून: डोईवाला थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय सरकारी शिक्षिका सृष्टि कंडारी की आत्महत्या के मामले में आरोपी सास प्रवीणा खत्री को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। प्रभारी सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले की गंभीरता, सामने आए आरोपों और जारी विवेचना को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।
सृष्टि कंडारी की मौत के बाद से यह मामला लगातार चर्चा में है। मामले में सृष्टि के ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। वहीं आरोपी पक्ष ने इन आरोपों को गलत बताते हुए सृष्टि को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने से इनकार किया है। ऐसे में अदालत के सामने दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें रखी गईं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिलहाल आरोपी सास को राहत देने से इनकार कर दिया।
नवंबर 2025 में हुई थी सृष्टि की शादी
मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक, 25 वर्षीय सृष्टि कंडारी एक सरकारी शिक्षिका थीं। उनका विवाह नवंबर 2025 में सौरभ खत्री के साथ हुआ था। शादी के कुछ ही महीनों बाद जुलाई 2026 में उनकी मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए।
अभियोजन पक्ष का आरोप है कि शादी के बाद से ही सृष्टि को दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोपों के मुताबिक, सृष्टि को उसके पति, सास, ननद और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों की ओर से मानसिक रूप से परेशान किया जाता था।
हालांकि, बचाव पक्ष ने अदालत के सामने इन आरोपों को गलत बताया और कहा कि आरोपी सास तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने सृष्टि को कभी दहेज के लिए प्रताड़ित नहीं किया।
आत्महत्या से पहले मां को भेजा था करीब छह मिनट का वीडियो
इस मामले में अभियोजन की ओर से अदालत के समक्ष सबसे महत्वपूर्ण तथ्यों में से एक सृष्टि की ओर से अपनी मां को भेजा गया कथित वीडियो बताया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सृष्टि ने आत्महत्या से पहले अपनी मां को व्हाट्सऐप के जरिए करीब छह मिनट का वीडियो भेजा था।
अभियोजन के मुताबिक, इस वीडियो में सृष्टि ने अपने पति, ननद और सास पर पिछले करीब छह महीने से प्रताड़ित किए जाने के आरोप लगाए थे। इसमें उसे कथित तौर पर ‘मनहूस’ कहकर ताने दिए जाने की बात भी सामने आई।
अदालत के आदेश में विवेचना के दौरान दर्ज किए गए कुछ पारिवारिक सदस्यों के बयानों का भी उल्लेख किया गया है। सृष्टि की बहन रुचि, जीजा पंकज सिंह राणा और भाई देवांशु उर्फ गुंजन खंडूरी के बयान भी जांच का हिस्सा हैं। इन बयानों में कथित तौर पर दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना से संबंधित आरोपों का उल्लेख किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही होगी।
बचाव पक्ष ने रखी अलग कहानी, पति की गंभीर बीमारी और मौत का दिया हवाला
वहीं आरोपी सास प्रवीणा खत्री की ओर से अदालत में अलग पक्ष रखा गया। बचाव पक्ष ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर गलत तथ्यों पर आधारित है और उन्होंने सृष्टि को दहेज के लिए कभी प्रताड़ित नहीं किया।
बचाव पक्ष ने आरोपी की उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। अदालत को बताया गया कि प्रवीणा खत्री 66 वर्ष से अधिक उम्र की वरिष्ठ नागरिक हैं और शिक्षा विभाग में लेक्चरर पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
याचिका में उनके पति मनोहर खत्री की गंभीर बीमारी का भी जिक्र किया गया। बचाव पक्ष के अनुसार, मनोहर खत्री ब्रेन कैंसर की चौथी स्टेज में थे। जनवरी 2026 में उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल में रेफर किया गया, जहां फरवरी से मार्च 2026 तक उनका इलाज चला।
बचाव पक्ष के मुताबिक, 26 जुलाई 2026 को मनोहर खत्री का निधन हो गया। इसके कुछ दिन बाद, 29 जुलाई को सृष्टि ने कथित तौर पर अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
आरोपी पक्ष ने इन परिस्थितियों का हवाला देते हुए कहा कि परिवार पहले से ही गंभीर संकट से गुजर रहा था और सृष्टि को दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के आरोप सही नहीं हैं।
कोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?
अदालत ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी सास को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
कोर्ट ने अपने आदेश में मामले की गंभीरता पर विशेष ध्यान दिया। अदालत के सामने यह तथ्य भी था कि सृष्टि की शादी को अभी सात वर्ष पूरे नहीं हुए थे और उनकी मौत ससुराल पक्ष के घर पर असामान्य परिस्थितियों में हुई।
दहेज मृत्यु से जुड़े आरोपों की गंभीरता और मामले में जारी विवेचना को देखते हुए अदालत ने कहा कि फिलहाल आरोपी को अग्रिम जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं हैं।
अदालत के इस रुख से साफ है कि जांच पूरी होने से पहले मामले में सामने आए आरोपों को गंभीरता से देखा जा रहा है। हालांकि, अदालत का जमानत याचिका खारिज करना आरोपों को अंतिम रूप से साबित करना नहीं है। मामले में आगे जांच और न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
पहले भी मिल चुकी है जमानत पर राहत नहीं
प्रवीणा खत्री की ओर से इससे पहले भी गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का रुख किया गया था। जानकारी के अनुसार, 1 अगस्त को उनकी अंतरिम अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। उस समय भी अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।
इसके बाद 10 अगस्त को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन इस बार भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी। यानी लगातार दूसरी बार अदालत से राहत न मिलने के बाद मामले में आरोपी सास की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।
जांच में सामने आने वाले साक्ष्य होंगे अहम
अब इस मामले में जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयान, कथित वीडियो, एफआईआर में लगाए गए आरोप और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के बीच कथित संबंध को लेकर क्या तथ्य सामने रखती है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष अपने दावों के समर्थन में कौन से साक्ष्य पेश करता है, यह भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सृष्टि की मौत ने खड़े किए कई सवाल
एक युवा सरकारी शिक्षिका की शादी के कुछ ही महीनों बाद हुई मौत ने परिवार और समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सास को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
अब सबकी नजर जांच की अगली कार्रवाई और मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों पर है। इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल अदालत के आदेश ने यह संकेत जरूर दिया है कि सृष्टि कंडारी की मौत से जुड़े आरोपों को जांच एजेंसी और न्यायालय ने गंभीरता से लिया है।
