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Reading: उत्तराखंड के लाखों श्रमिकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब हर महीने 7 तारीख तक खाते में आएगी मजदूरी, ओवरटाइम का मिलेगा दोगुना पैसा; महिलाओं को समान काम का समान वेतन
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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड के लाखों श्रमिकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब हर महीने 7 तारीख तक खाते में आएगी मजदूरी, ओवरटाइम का मिलेगा दोगुना पैसा; महिलाओं को समान काम का समान वेतन
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड के लाखों श्रमिकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब हर महीने 7 तारीख तक खाते में आएगी मजदूरी, ओवरटाइम का मिलेगा दोगुना पैसा; महिलाओं को समान काम का समान वेतन

The Hill India News
Last updated: August 8, 2026 4:48 am
The Hill India News
Published: August 8, 2026
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धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ और ‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ को मंजूरी, डिजिटल भुगतान से लेकर शिकायत निवारण और री-स्किलिंग फंड तक कई अहम प्रावधान

देहरादून: उत्तराखंड में संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। 7 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में ‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ और ‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ को मंजूरी दे दी गई है। सरकार के इस फैसले को श्रमिकों के अधिकारों, समय पर मजदूरी, समान वेतन और औद्योगिक विवादों के त्वरित समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Contents
धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: ‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ और ‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ को मंजूरी, डिजिटल भुगतान से लेकर शिकायत निवारण और री-स्किलिंग फंड तक कई अहम प्रावधानहर महीने 7 तारीख तक मजदूरी देना होगा अनिवार्यडिजिटल भुगतान से कम होगी हेराफेरी की गुंजाइशओवरटाइम किया तो सामान्य मजदूरी से दोगुना भुगतान‘समान काम, समान वेतन’ पर सरकार का जोरशिकायत करने पर नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्करऔद्योगिक संबंध नियमावली से मालिक और श्रमिक के विवाद होंगे कम20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिकायत निवारण समितिहड़ताल और तालाबंदी को लेकर भी तय होगी प्रक्रियाट्रेड यूनियनों को भी मिलेगी स्पष्ट कानूनी व्यवस्थाछंटनी होने पर भी श्रमिक के लिए रास्ता बंद नहीं होगाउत्तराखंड के निर्माण और पर्यटन क्षेत्र के श्रमिकों को खास फायदासरकार का दावा—श्रमिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदमश्रमिकों के लिए बदलेगा कामकाज का तरीका

नई नियमावलियों में मजदूरी भुगतान की समयसीमा से लेकर ओवरटाइम, डिजिटल भुगतान, समान काम के लिए समान वेतन, शिकायतों के निस्तारण, ट्रेड यूनियन, हड़ताल-तालाबंदी और छंटनी के बाद दोबारा रोजगार तथा कौशल विकास जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसका सीधा असर प्रदेश में काम करने वाले निर्माण श्रमिकों, फैक्ट्री कर्मचारियों, होटल-पर्यटन क्षेत्र के कामगारों, ठेका श्रमिकों और अन्य कामगारों पर पड़ने की उम्मीद है।

सबसे बड़ी बात यह है कि अब हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। लंबे समय से समय पर मजदूरी नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे कामगारों के लिए यह प्रावधान बड़ी राहत माना जा रहा है।

हर महीने 7 तारीख तक मजदूरी देना होगा अनिवार्य

‘उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026’ का सबसे अहम प्रावधान मजदूरी भुगतान की समयसीमा से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत हर महीने की 7 तारीख तक मजदूरी का भुगतान करना अनिवार्य होगा।

निर्माण क्षेत्र, छोटी फैक्ट्रियों, ठेका व्यवस्था और अन्य संस्थानों में काम करने वाले श्रमिकों के सामने अक्सर समय पर मजदूरी नहीं मिलने की समस्या आती है। कई बार मजदूरी कुछ दिनों या हफ्तों तक अटक जाती है, जिससे कामगारों के सामने घर का राशन, बच्चों की पढ़ाई, किराया और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में परेशानी खड़ी हो जाती है।

सरकार की नई व्यवस्था का उद्देश्य इसी समस्या पर रोक लगाना है। तय समयसीमा में मजदूरी का भुगतान होने से श्रमिकों को अपनी आय को लेकर अधिक निश्चितता मिलेगी और नियोक्ताओं की जवाबदेही भी तय होगी।

डिजिटल भुगतान से कम होगी हेराफेरी की गुंजाइश

नई मजदूरी संहिता नियमावली में मजदूरी के डिजिटल भुगतान पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य मजदूरी के भुगतान में होने वाली गड़बड़ी, कटौती और विवादों को कम करना है।

कैश में भुगतान होने की स्थिति में कई बार श्रमिक और नियोक्ता के बीच यह विवाद खड़ा हो जाता है कि कितनी मजदूरी तय हुई थी और वास्तव में कितनी रकम दी गई। डिजिटल भुगतान की व्यवस्था होने से भुगतान का रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे श्रमिक के पास भी अपनी मजदूरी का प्रमाण रहेगा और नियोक्ता के लिए भी भुगतान का स्पष्ट रिकॉर्ड मौजूद होगा।

यह व्यवस्था खासतौर पर उन श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो ठेका या अस्थायी व्यवस्था के तहत काम करते हैं और जिनके भुगतान को लेकर अक्सर विवाद सामने आते हैं।

ओवरटाइम किया तो सामान्य मजदूरी से दोगुना भुगतान

नई नियमावली का एक और महत्वपूर्ण प्रावधान ओवरटाइम भुगतान से जुड़ा है। निर्धारित कार्य घंटों से अधिक काम करने पर श्रमिक को सामान्य दर से दोगुनी मजदूरी देने का प्रावधान किया गया है।

इसका मतलब यह है कि यदि किसी कर्मचारी से तय काम के घंटों के अतिरिक्त काम कराया जाता है तो उस अतिरिक्त काम का भुगतान सामान्य मजदूरी दर से दोगुना किया जाएगा।

यह प्रावधान उन क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां काम के घंटे अक्सर बढ़ जाते हैं। फैक्ट्री, निर्माण, होटल, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में अतिरिक्त काम करने वाले कर्मचारियों को अब अपने ओवरटाइम का उचित भुगतान मिलने की उम्मीद है।

‘समान काम, समान वेतन’ पर सरकार का जोर

नई मजदूरी संहिता में समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत को भी प्रमुखता दी गई है। लैंगिक आधार पर मजदूरी में भेदभाव को समाप्त करने का प्रावधान किया गया है।

यानी यदि कोई महिला और पुरुष समान प्रकृति का काम करते हैं तो उनके वेतन में केवल लिंग के आधार पर अंतर नहीं किया जा सकेगा। निर्माण स्थल, छोटी इकाइयों, खेतों और अन्य कार्यस्थलों पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम मजदूरी दिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था ऐसे भेदभाव पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इससे महिला श्रमिकों के आर्थिक अधिकारों को मजबूती मिलने की उम्मीद है और समान काम के लिए समान भुगतान की व्यवस्था को व्यवहार में लागू करने में मदद मिलेगी।

शिकायत करने पर नहीं काटने पड़ेंगे दफ्तरों के चक्कर

श्रमिकों की शिकायतों के निस्तारण को भी नई नियमावली में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। मजदूरी, भुगतान, कार्यस्थल या अन्य श्रम संबंधी विवादों को लेकर शिकायत करने वाले कामगारों के लिए प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने का प्रयास किया गया है।

सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें श्रमिक को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया में न उलझना पड़े। शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान होने पर श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच अनावश्यक विवाद कम हो सकते हैं।

औद्योगिक संबंध नियमावली से मालिक और श्रमिक के विवाद होंगे कम

कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026’ को भी मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य उद्योगों में नियोक्ता और कर्मकार के बीच बेहतर संबंध स्थापित करना और विवादों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट एवं समयबद्ध बनाना है।

नई व्यवस्था में मध्यस्थता और सुलह प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया है। सुलह अधिकारियों की नियुक्ति, जांच और विवादों के निस्तारण को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं।

इसका उद्देश्य ऐसे औद्योगिक विवादों को लंबे समय तक लटकने से रोकना है, जिनका असर श्रमिकों के साथ-साथ उद्योगों के कामकाज पर भी पड़ता है। विवाद का समय पर समाधान होने से उत्पादन प्रभावित होने और श्रमिकों की आय पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकेगा।

20 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में शिकायत निवारण समिति

नई नियमावली में उन प्रतिष्ठानों के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है, जहां 20 या उससे अधिक कर्मकार काम करते हैं।

ऐसे प्रतिष्ठानों में शिकायतों के तत्काल समाधान के लिए बनने वाली शिकायत निवारण समिति में सदस्यों के चयन की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। इसका उद्देश्य यह है कि छोटी-छोटी समस्याएं संस्थान के भीतर ही बातचीत और निर्धारित प्रक्रिया के जरिए हल हो जाएं।

अगर किसी कर्मचारी को मजदूरी, काम के माहौल, सेवा संबंधी समस्या या अन्य शिकायत है तो उसे सीधे लंबी प्रक्रिया में जाने के बजाय निर्धारित शिकायत निवारण व्यवस्था का सहारा मिल सकेगा।

हड़ताल और तालाबंदी को लेकर भी तय होगी प्रक्रिया

औद्योगिक संबंध नियमावली में हड़ताल और तालाबंदी से संबंधित प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। बिना पूर्व सूचना के अचानक हड़ताल या तालाबंदी से उद्योग का कामकाज प्रभावित होता है और इसका सीधा असर श्रमिकों की आय पर भी पड़ सकता है।

नई व्यवस्था में नोटिस देने के समय और तरीके को स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य अचानक उत्पन्न होने वाली ऐसी परिस्थितियों को रोकना है, जिनसे उत्पादन ठप हो जाए और बड़ी संख्या में श्रमिकों की दिहाड़ी या रोजगार प्रभावित हो।

सरकार का मानना है कि स्पष्ट नियम होने से नियोक्ता और श्रमिक दोनों को अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी रहेगी।

ट्रेड यूनियनों को भी मिलेगी स्पष्ट कानूनी व्यवस्था

नई औद्योगिक संबंध नियमावली में ट्रेड यूनियनों के पंजीकरण, मान्यता और उनके साथ वार्ता से जुड़े नियम भी तय किए गए हैं। इससे श्रमिक संगठनों को अधिक स्पष्ट कानूनी ढांचा मिलेगा।

ट्रेड यूनियन श्रमिकों की समस्याओं को सामूहिक रूप से सामने रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में उनके पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया स्पष्ट होने से श्रमिकों और प्रबंधन के बीच बातचीत को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

छंटनी होने पर भी श्रमिक के लिए रास्ता बंद नहीं होगा

नई नियमावली का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा छंटनी से जुड़ा है। यदि किसी परिस्थिति में श्रमिक की नौकरी चली जाती है तो उसके लिए आगे रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।

इसके साथ ही श्रमिक री-स्किलिंग फंड की स्थापना और उसके उपयोग की प्रक्रिया भी तय की गई है। इसका उद्देश्य नौकरी गंवाने वाले श्रमिकों को नए कौशल का प्रशिक्षण देकर उन्हें दोबारा रोजगार के लिए तैयार करना है।

यानी सरकार की सोच यह है कि किसी कर्मचारी की नौकरी जाने के बाद उसकी आय का रास्ता पूरी तरह बंद न हो, बल्कि उसे नए कौशल के जरिए रोजगार के नए अवसर तलाशने में मदद मिले।

उत्तराखंड के निर्माण और पर्यटन क्षेत्र के श्रमिकों को खास फायदा

उत्तराखंड में निर्माण, होटल, पर्यटन, फैक्ट्री और सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिक काम करते हैं। प्रदेश में पर्यटन और चारधाम यात्रा का सीजन होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट, परिवहन और निर्माण से जुड़े कामगारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसके अलावा बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक भी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में काम करते हैं। ऐसे में समय पर मजदूरी, डिजिटल भुगतान, ओवरटाइम का उचित भुगतान और शिकायतों के समाधान की व्यवस्था उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

नई नियमावलियों से श्रमिकों को अपने अधिकारों की जानकारी मिलने और उनका इस्तेमाल करने में भी मदद मिलेगी।

सरकार का दावा—श्रमिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम

धामी सरकार का मानना है कि दोनों नियमावलियां श्रम कानूनों को सरल बनाने और कामगारों के आर्थिक एवं सामाजिक हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। एक तरफ जहां श्रमिकों के लिए समय पर मजदूरी, समान वेतन और ओवरटाइम का अधिकार मजबूत होगा, वहीं दूसरी तरफ उद्योगों और नियोक्ताओं के लिए भी नियम और प्रक्रियाएं अधिक स्पष्ट होंगी।

इससे श्रमिक और नियोक्ता के बीच विश्वास बढ़ने की उम्मीद है। साथ ही औद्योगिक विवादों के समयबद्ध समाधान से प्रदेश में औद्योगिक वातावरण को बेहतर बनाने में भी मदद मिल सकती है।

श्रमिकों के लिए बदलेगा कामकाज का तरीका

कुल मिलाकर उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026 और उत्तराखंड औद्योगिक संबंध नियमावली 2026 को श्रमिक हितों से जुड़े बड़े फैसले के तौर पर देखा जा रहा है। अब समय पर मजदूरी, डिजिटल भुगतान, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, समान काम के लिए समान वेतन और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसे प्रावधानों को नियमों का हिस्सा बनाया गया है।

वहीं छंटनी की स्थिति में री-स्किलिंग फंड के जरिए श्रमिकों को नए कौशल से जोड़ने का प्रावधान रोजगार की अनिश्चितता के बीच एक नई उम्मीद पैदा करता है।

धामी कैबिनेट के इस फैसले का असली असर इसके जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से दिखाई देगा। यदि नई व्यवस्थाओं को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाता है तो उत्तराखंड के लाखों श्रमिकों के लिए यह फैसला न केवल उनकी मजदूरी और रोजगार सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के प्रति अधिक जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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