महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर धर्म और आस्था को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा भाजपा नेता एवं पूर्व सांसद नवनीत राणा आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। एक ओर उद्धव ठाकरे ने नागपुर में ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ और महाआरती आयोजित करने का निर्णय लिया है, वहीं दूसरी ओर नवनीत राणा ने अमरावती में समर्थकों के साथ ‘हनुमान चालीसा’ का सामूहिक पाठ करने का ऐलान कर इस राजनीतिक मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है। इस घटनाक्रम ने चार वर्ष पुराने चर्चित ‘हनुमान चालीसा विवाद’ की यादें भी ताजा कर दी हैं और राज्य की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
उद्धव ठाकरे का नागपुर दौरा ऐसे समय हो रहा है जब राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा चर्चा में है। ठाकरे इस विषय को लेकर सत्ता पक्ष और महायुति सरकार पर निशाना साधने की तैयारी में हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की है कि वे ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ कर भगवान राम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करें और साथ ही इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराएं। नागपुर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र होने के कारण इस कार्यक्रम को राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि उद्धव ठाकरे इस आयोजन के जरिए भाजपा को उसके ही पारंपरिक ‘राम’ मुद्दे पर घेरने की रणनीति अपना रहे हैं।
दूसरी ओर भाजपा नेता और अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के कार्यक्रम के जवाब में अमरावती की हनुमानगढ़ी में ‘हनुमान चालीसा’ के सामूहिक पाठ का आयोजन करने का ऐलान किया है। उन्होंने इस मौके पर उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने हनुमान चालीसा का विरोध किया था। राणा ने आरोप लगाया कि उस समय उनके और उनके पति रवि राणा के खिलाफ कार्रवाई की गई, उन्हें गिरफ्तार किया गया और 14 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। उनका कहना है कि सत्ता में रहते हुए जिन लोगों ने हनुमान चालीसा का विरोध किया, वही आज भगवान राम और हिंदुत्व की बात कर रहे हैं। उन्होंने इसे राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदला हुआ रुख बताया।
दरअसल, मौजूदा विवाद की जड़ें वर्ष 2022 की उस घटना से जुड़ी हैं, जिसने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। उस समय उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री थे और महाविकास अघाड़ी की सरकार सत्ता में थी। उसी दौरान तत्कालीन सांसद नवनीत राणा और उनके विधायक पति रवि राणा ने मुंबई स्थित उद्धव ठाकरे के निजी आवास ‘मातोश्री’ के बाहर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव बढ़ गया था और दोनों नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। उस समय उनके खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनी थी और लंबे समय तक राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र रही।
अब लगभग चार साल बाद एक बार फिर वही मुद्दा नए रूप में सामने आया है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उद्धव ठाकरे सत्ता से बाहर हैं, उनकी पार्टी में विभाजन हो चुका है और शिवसेना का एक बड़ा हिस्सा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में अलग हो चुका है। वहीं भाजपा राज्य की सत्ता में सहयोगी दल के रूप में मजबूत स्थिति में है। ऐसे में दोनों पक्ष धार्मिक आयोजनों के जरिए अपनी-अपनी राजनीतिक रणनीति को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र में हिंदुत्व और धार्मिक पहचान का मुद्दा हमेशा से चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहा है। भाजपा लंबे समय से भगवान राम और हिंदुत्व की राजनीति को अपने प्रमुख राजनीतिक एजेंडे के रूप में पेश करती रही है। ऐसे में उद्धव ठाकरे का ‘राम रक्षा स्तोत्र’ कार्यक्रम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे भी हिंदुत्व की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखना चाहते हैं। दूसरी ओर भाजपा और नवनीत राणा इस अवसर का उपयोग यह संदेश देने के लिए कर रहे हैं कि उद्धव ठाकरे का हिंदुत्व केवल राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। नागपुर और अमरावती दोनों शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थक लगातार सक्रिय हैं और एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले कर रहे हैं। ऐसे में प्रशासन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी निगरानी बनाए हुए है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में धार्मिक प्रतीकों और आस्था से जुड़े मुद्दे और अधिक प्रमुखता से सामने आ सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों से लेकर भविष्य के विधानसभा चुनावों तक राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी वैचारिक पहचान मजबूत करने की कोशिश करेंगे। फिलहाल उद्धव ठाकरे के नागपुर में ‘राम रक्षा स्तोत्र’ पाठ और नवनीत राणा के अमरावती में ‘हनुमान चालीसा’ आयोजन ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह सियासी टकराव केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप लेता है।
