नई दिल्ली: कतर के आधुनिक इतिहास के निर्माता और पूर्व शासक ‘फादर अमीर’ शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर भारत सरकार ने गहरा सम्मान और संवेदना प्रकट की है। वैश्विक कूटनीति और भारत-कतर संबंधों के लिहाज से इस दुखद Qatar Father Amir Death की खबर के बाद, भारत सरकार ने सोमवार, 13 जुलाई को देश भर में एक दिवसीय राष्ट्रीय शोक (National Mourning) की घोषणा की है।
गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी आधिकारिक दिशा-निर्देशों के अनुसार, आज पूरे भारत में उन सभी सरकारी और ऐतिहासिक इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ आधा झुका रहेगा, जहां इसे नियमित रूप से फहराया जाता है। इसके साथ ही, आज के दिन सरकार की ओर से आयोजित होने वाले किसी भी प्रकार के आधिकारिक या सांस्कृतिक मनोरंजन कार्यक्रम पर पूरी तरह रोक रहेगी। 74 वर्ष की आयु में अंतिम सांस लेने वाले शेख हमद के सम्मान में स्वयं कतर ने भी रविवार से चार दिवसीय सार्वजनिक शोक का ऐलान किया है।
पीएम मोदी ने साझा किए संस्मरण: ‘हमने एक सच्चा दोस्त खो दिया’
इस वैश्विक क्षति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने दिवंगत नेता को एक ऐसा दूरदर्शी राजनेता बताया जिन्होंने कतर को विकास और आधुनिक समृद्धि के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने आधिकारिक संदेश में शेख हमद के साथ अपनी पुरानी मुलाकातों को याद किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश: “एक दूरदर्शी नेता जिन्होंने कतर को विकास और समृद्धि के ऊंचे स्तर तक पहुंचाया, हम उन्हें एक सच्चे दोस्त के रूप में भी याद करते हैं। मुझे फरवरी 2024 में कतर की अपनी पिछली यात्रा के दौरान उनसे मिलने का सौभाग्य मिला था। उनके विचार और दृष्टिकोण बेहद प्रभावित करने वाले थे।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कतर के मौजूदा अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी, शाही परिवार और कतर की समस्त जनता के प्रति भारत की ओर से गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं।
किरेन रीजीजू जाएंगे कतर, भारत सरकार की ओर से सौंपेंगे शोक संदेश
भारत और कतर के बीच मजबूत होते रणनीतिक रिश्तों की संवेदनशीलता को देखते हुए भारत सरकार ने अपने एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को कतर भेजने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू जल्द ही एक विशेष दूत के रूप में कतर की राजधानी दोहा का दौरा करेंगे।
वहां वे भारत सरकार और देश की जनता की ओर से शाही परिवार के समक्ष आधिकारिक रूप से शोक प्रकट करेंगे। इस कूटनीतिक कदम को इस Qatar Father Amir Death संकट की घड़ी में कतर के साथ भारत की एकजुटता के एक बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
1995 से 2013: कतर को वैश्विक महाशक्ति बनाने वाले 18 साल
शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी का शासनकाल कतर के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने 1995 से 2013 तक कतर पर शासन किया। उनके इन 18 वर्षों के कार्यकाल के दौरान ही इस छोटे से ऊर्जा-समृद्ध (Energy-Rich) खाड़ी देश ने वह आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक छलांग लगाई, जिसने कतर को आज दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली देशों की कतार में खड़ा कर दिया।
शेख हमद ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के उत्पादन और निर्यात पर विशेष ध्यान दिया, जिससे कतर की अर्थव्यवस्था की पूरी सूरत ही बदल गई। साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता की कमान अपने योग्य बेटे और कतर के मौजूदा अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी थी, जिसके बाद से उन्हें कतर में ‘फादर अमीर’ की मानद उपाधि से नवाजा गया।
भारत-कतर संबंधों की मजबूत नींव: प्रवासी भारतीयों के बने मसीहा
इस Qatar Father Amir Death के बाद भारत-कतर संबंधों के उस सुनहरे दौर की चर्चा भी तेज हो गई है, जिसकी शुरुआत शेख हमद के शासनकाल में हुई थी। उनके कार्यकाल के दौरान ही दोनों देशों के द्विपक्षीय व्यापार, विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौते हुए।
कतर के विकास में भारतीय प्रवासियों के योगदान को शेख हमद हमेशा खुले दिल से स्वीकार करते थे।
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प्रवासियों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि: उनके शासनकाल में कतर में रहने वाले भारतीय कामगारों, इंजीनियरों और पेशेवरों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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सुरक्षा और सम्मान: उन्होंने कतर में भारतीय समुदाय को न केवल रोजगार के बेहतरीन अवसर दिए, बल्कि उनकी सामाजिक सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता का भी सम्मान किया।
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रणनीतिक साझेदारी: भारत के लिए कतर एलएनजी का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना, जिसकी मजबूत नींव शेख हमद ने ही रखी थी।
कतर में चार दिनों का सार्वजनिक शोक, थम गईं गतिविधियां
कतर की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, देश के ‘फादर अमीर’ के निधन से पूरी खाड़ी क्षेत्र में शोक की लहर है। कतर सरकार ने रविवार से ही देश में चार दिनों के आधिकारिक सार्वजनिक शोक की घोषणा कर दी थी, जिसके तहत सभी राष्ट्रीय ध्वज झुका दिए गए हैं और सरकारी कार्यालयों में आंशिक रूप से काम रोक दिया गया है। भारत द्वारा दिखाया गया यह सम्मान दोनों देशों के गहरे सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों की गहराई को बयां करता है।
