देहरादून: उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने और समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सीधे लाभ पहुँचाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिजिटल गवर्नेंस की एक नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री आवास सभागार में आयोजित समाज कल्याण विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सीएम धामी ने डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से एक क्लिक में राज्य के 9.80 लाख से अधिक लाभार्थियों को ₹145.42 करोड़ की पेंशन राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि उत्तराखंड में बन रही विकास योजनाएं केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली न हों, बल्कि अगले 25 वर्षों के भविष्य, चुनौतियों और जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जाएं। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा उत्तराखंड सुशासन मॉडल विकसित करना है, जो पूरे देश के लिए ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ (सर्वश्रेष्ठ उदाहरण) के रूप में उभरे।
शिक्षा को रफ्तार: अक्टूबर तक तैयार होंगे ‘बाबू जगजीवन राम छात्रावास’
अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को उच्च स्तरीय और आधुनिक आवासीय शिक्षा से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने चल रहे निर्माण कार्यों की कड़ाई से समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राज्य में निर्माणाधीन तीनों बड़े छात्रावासों का काम हर हाल में अक्टूबर 2026 तक पूरा कर लिया जाए।
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डोईवाला (देहरादून): बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास।
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पाइनस (नैनीताल): बाबू जगजीवन राम बालक छात्रावास।
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सोमेश्वर (अल्मोड़ा): बाबू जगजीवन राम बालिका छात्रावास।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन छात्रावासों के समय पर तैयार होने से अनुसूचित जाति के छात्रों को माध्यमिक और विश्वविद्यालय स्तर की पढ़ाई के लिए शानदार एवं सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।
क्या है योजना: ‘बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना’ के तहत केंद्र सरकार प्रति छात्र ₹3.25 लाख तक की सहायता देती है। मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए हैं कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, और जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त ‘टॉप-अप’ राशि देकर इन छात्रावासों को अत्याधुनिक बनाएगी।
वन क्लिक से ₹145.42 करोड़ का भुगतान: जानिए किसे क्या मिला
जून-2026 की देय किश्त के रूप में जारी की गई इस भारी-भरकम राशि में केंद्र सरकार का अंश ₹7.02 करोड़ और उत्तराखंड राज्य सरकार का योगदान ₹138.40 करोड़ रहा। पारदर्शिता की दिशा में यह कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने विभिन्न श्रेणियों के 9,80,950 लाभार्थियों को लाभान्वित किया:
| पेंशन योजना का नाम | लाभार्थियों की संख्या | आवंटित कुल धनराशि |
| वृद्धावस्था पेंशन | 6,11,245 | ₹91.69 करोड़ |
| विधवा पेंशन | 2,35,850 | ₹35.38 करोड़ |
| दिव्यांग पेंशन | 88,787 | ₹13.32 करोड़ |
| किसान पेंशन | 27,207 | ₹3.26 करोड़ |
| परित्यक्ता पेंशन | 8,258 | ₹99.10 लाख |
| भरण-पोषण अनुदान | 7,297 | ₹51.08 लाख |
| तीलू रौतेली पेंशन | 2,179 | ₹26.15 लाख |
| बौना पेंशन | 127 | ₹1.52 लाख |
“60 वर्ष के होते ही स्वतः मिले वृद्धावस्था पेंशन का लाभ”
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकारी तंत्र को और अधिक संवेदनशील और तकनीक-अनुकूल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया:
स्वतः चयन प्रक्रिया (Auto-Enrollment): राज्य का कोई भी पात्र नागरिक जैसे ही अपनी आयु के 60 वर्ष पूरे करे, उसका नाम स्वतः (Automatically) वृद्धावस्था पेंशन योजना के दायरे में आ जाना चाहिए। बुजुर्गों को दफ्तरों के चक्कर काटने या लंबी कागजी प्रक्रियाओं से न गुजरना पड़े, इसके लिए डेटाबेस को मजबूत और एकीकृत (Integrate) किया जाए।
वित्तीय अनुशासन और योजनाओं का एकीकरण सबसे जरूरी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सरकारी धन के सही उपयोग और दूरगामी परिणामों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों की समान योजनाओं का एकीकरण (Integration) किया जाए, ताकि संसाधनों की बर्बादी रुके। निर्माण कार्यों और सामाजिक कल्याण की योजनाओं में वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) और दीर्घकालिक स्थायित्व सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा, “हमारी सरकार का लक्ष्य केवल कागजों पर योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसी स्थायी व्यवस्था खड़ी करना है जो आने वाली पीढ़ियों के काम आए। सामाजिक सुरक्षा और सम्मान हर नागरिक का अधिकार है और हम इसे उनके दरवाजे तक पहुंचाकर रहेंगे।”
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री खजान दास, समाज कल्याण सचिव सहित विभाग के तमाम वरिष्ठ अधिकारी और प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।
