ऋषिकेश / देहरादून: उत्तराखंड सरकार की जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता और अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का संकल्प शनिवार को ऋषिकेश की धरती पर साक्षात नजर आया। तीर्थनगरी ऋषिकेश का आईडीपीएल (IDPL) ग्राउंड एक ऐसे ऐतिहासिक पल का गवाह बना, जहां ‘सेवा, सुशासन और समर्पण’ के मूलमंत्र को धरातल पर उतारते हुए Uttarakhand Seva Pakhwada 2026 का भव्य आयोजन किया गया। इस महाशिविर में न केवल 20 हजार से अधिक नागरिकों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई, बल्कि साढ़े तीन हजार से अधिक जरूरतमंदों को सीधे तौर पर सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी और महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ मौके पर ही उपलब्ध कराया गया।
इस भव्य और गरिमामय कार्यक्रम में प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। जैसे ही दोनों शीर्ष विभूतियां मंच पर पहुंचीं, विभिन्न क्षेत्रों और जनपदों से आए हजारों नागरिकों ने उन पर फूलों की वर्षा कर उनका अभूतपूर्व और आत्मीय स्वागत किया। यह अवसर इसलिए भी बेहद भावुक और खास बन गया क्योंकि उपस्थित जनसमुदाय ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सफलतम 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर उन्हें बधाई दी और उत्तराखंड के विकास को नई ऊंचाई देने के लिए उनके नेतृत्व की सराहना की।
एकीकृत प्रयास (Integrated Effort) से मौके पर ही हुआ समस्याओं का समाधान
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रशासनिक स्वरूप रहा। Uttarakhand Seva Pakhwada 2026 के तहत आयोजित इस विशाल बहुउद्देशीय शिविर में देहरादून, हरिद्वार और टिहरी गढ़वाल जनपदों के तमाम सरकारी विभागों ने एक छत के नीचे आकर ‘एकीकृत प्रयास’ (Integrated Effort) की अनूठी मिसाल पेश की। आमतौर पर जिन सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने में आम जनता के हफ़्तों बर्बाद हो जाते हैं, उन सभी विभागों ने यहाँ अपने स्टॉल लगाकर लोगों की समस्याओं को न सिर्फ सुना, बल्कि उनका ऑन-द-स्पॉट निस्तारण भी किया।
इस विकेंद्रीकृत व्यवस्था के कारण सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को भारी राहत मिली। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश थे कि कोई भी पात्र व्यक्ति बिना लाभ पाए वापस नहीं जाना चाहिए। एक ही परिसर में आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड से लेकर कृषि और समाज कल्याण से जुड़ी योजनाओं की फाइलों को तत्काल हरी झंडी दी गई।
स्वास्थ्य शिविर बना संजीवनी: गंभीर मरीजों की हुई मुफ्त जांच और दवा वितरण
कार्यक्रम परिसर में आयोजित विशाल स्वास्थ्य शिविर क्षेत्र के गरीब परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम साबित नहीं हुआ। इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात थी, जिन्होंने गंभीर और पुरानी बीमारियों से पीड़ित 1009 मरीजों की गहन चिकित्सा जांच की और उन्हें निशुल्क परामर्श दिया। चिकित्सा शिविर के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं:
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विशेषज्ञ ओपीडी: शिविर में पहुंचे 212 हड्डी रोगियों, 70 महिला एवं स्त्री विशेषज्ञों से जुड़े मामलों और 81 आंख, नाक व कान (ENT) संबंधी रोगियों का परीक्षण कर उपचार शुरू किया गया।
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जांच और टीकाकरण: मौके पर ही 95 डिजिटल एक्स-रे और 70 जरूरी रक्त जांचें (ब्लड टेस्ट) की गईं। इसके साथ ही 13 शिशुओं का अनिवार्य टीकाकरण किया गया।
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डिजिटल हेल्थ: डिजिटल इंडिया की दिशा में कदम बढ़ाते हुए 15 नए आयुष्मान कार्ड और 20 ‘आभा’ (ABHA) हेल्थ कार्ड जेनरेट किए गए।
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आयुष विभाग की धूम: पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देते हुए आयुष विभाग के स्टॉल पर 310 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण हुआ और उन्हें आयुर्वेदिक व होम्योपैथिक औषधियां मुफ्त बांटी गईं।
पेंशन की तत्काल स्वीकृति और दिव्यांगजनों को मिला संबल
मानवीय दृष्टिकोण को सर्वोपरि रखते हुए समाज कल्याण विभाग ने इस शिविर में ऐतिहासिक काम किया। विधवा, वृद्धावस्था और दिव्यांग श्रेणी के 75 पात्र आवेदकों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बिना किसी कागजी देरी के मौके पर ही स्वीकृत कर दिया गया। इसके अलावा, 10 दिव्यांग भाई-बहनों को उनके विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (UDID Card) जारी किए गए और 23 लोगों का विकलांग प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पूरा किया गया।
इस संवेदनशील पहल के तहत मंच से और स्टालों के माध्यम से 280 दिव्यांगजनों को उनकी सुविधा और आत्मनिर्भरता के लिए व्हीलचेयर, वैसाखी और श्रवण यंत्र जैसे कृत्रिम सहायक उपकरण वितरित किए गए, जिससे उनके चेहरों पर एक अनूठी मुस्कान तैर गई। वहीं दूसरी ओर, आर्थिक विकास को गति देने वाले विभागों जैसे कृषि, उद्यान, उद्योग, डेयरी, मत्स्य, रेशम, पशुपालन और लीड बैंक ने समन्वित रूप से काम करते हुए 1200 से अधिक किसानों और पशुपालकों को अपनी योजनाओं से सीधे जोड़ा।
महिला सशक्तीकरण और उद्यमिता को मिला सम्मान; ₹25 लाख के पुरस्कार
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इस मंच का उपयोग प्रदेश के विकास में रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले लघु उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के हौसले को बढ़ाने के लिए किया। महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अनुकरणीय कार्य करने के लिए सहकारिता विभाग के अंतर्गत पंजीकृत पांच महिला स्वयं सहायता समूहों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच पर बुलाकर सम्मानित किया। सरकार की ओर से इन पांचों समूहों को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ने के लिए ₹5-5 लाख (कुल ₹25 लाख) की भारी प्रोत्साहन पुरस्कार राशि के चेक प्रदान किए गए।
इसके साथ ही, समाज और अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले मत्स्य विभाग के एक, उद्यान विभाग के एक, उद्योग विभाग के तीन और डेयरी विभाग के एक प्रगतिशील लाभार्थी को राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री द्वारा स्मृति चिह्न प्रदान कर उनकी उद्यमशीलता की सराहना की गई।
उत्तराखंड के युवाओं की ऊंची उड़ान: 1 लाख के पैकेज पर जापान में मिला रोजगार
इस महाशिविर का सबसे भावुक और गर्व से भर देने वाला क्षण वह था, जब उत्तराखंड के ग्रामीण परिवेश से निकले युवाओं की अंतरराष्ट्रीय सफलता को मंच से सराहा गया। कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के माध्यम से तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रदेश के तीन युवाओं का चयन सीधे जापान में रोजगार के लिए हुआ है।
अल्मोड़ा, देहरादून और टिहरी जनपद के रहने वाले इन तीनों होनहार युवाओं को जापान की प्रतिष्ठित कंपनियों द्वारा लगभग ₹1 लाख प्रति माह के शानदार शुरुआती पैकेज पर नौकरी मिली है। मुख्यमंत्री ने इन युवाओं को सम्मानित करते हुए कहा कि देवभूमि के युवाओं की यह वैश्विक उपलब्धि राज्य के लाखों अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
निश्चित रूप से, Uttarakhand Seva Pakhwada 2026 का यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम मात्र नहीं था, बल्कि यह इस बात का जीवंत प्रमाण था कि जब नीति साफ हो और इरादे नेक हों, तो शासन और प्रशासन सीधे जनता के द्वार पर पहुंचकर उनके जीवन को सुगम बना सकता है। ऋषिकेश की यह सफलता आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य जनपदों के लिए भी सुशासन का एक रोल मॉडल साबित होगी।
