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उत्तर प्रदेशफीचर्ड

यूपी का बड़ा भूमि घोटाला: संभल में गंगा किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन माफियाओं के हवाले, पूर्व SDM और वकील समेत 6 गिरफ्तार

The Hill India News
Last updated: July 4, 2026 1:50 am
The Hill India News
Published: July 4, 2026
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संभल/लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला प्रशासनिक और वित्तीय भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने राज्य के पूरे राजस्व तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। गंगा नदी के कछार में स्थित बेहद मूल्यवान 1144 बीघा सरकारी जमीन को भू-माफियाओं और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध तरीके से निजी हाथों में सौंपने का एक महाघोटाला उजागर हुआ है। इस संगठित Sambhal Land Scam के मामले में पुलिस और जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और कठोर कार्रवाई करते हुए तत्कालीन उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) ओमवीर सिंह, पूर्व सरकारी वकील जय भारद्वाज और पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत सहित छह मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद से न केवल संभल बल्कि पूरे प्रदेश के राजस्व गलियारों में हड़कंप मच गया है।

Contents
गंगा कछार की ‘झाऊ श्रेणी’ भूमि पर गिद्ध दृष्टि2018 में जो पट्टे निरस्त हुए, उन्हें 2019 में दोबारा बांट दियाविशेष जांच कमेटी की रिपोर्ट और पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाईजांच के दायरे में कई और रसूखदार, संपत्तियां होंगी कुर्क

गंगा कछार की ‘झाऊ श्रेणी’ भूमि पर गिद्ध दृष्टि

पुलिस प्रशासन द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला संभल जिले की गुन्नौर तहसील के अंतर्गत आने वाले असदपुर, सुखैला और उसके आस-पास के सीमावर्ती गांवों का है। गंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में स्थित यह जमीन ‘झाऊ श्रेणी’ की बहुमूल्य सरकारी भूमि के रूप में दर्ज थी। कानूनन इस प्रकार की कछारी और नदी मार्ग की जमीनों का स्वामित्व पूर्णतः राज्य सरकार या ग्राम सभा के पास सुरक्षित रहता है। इसके अतिरिक्त, यह पूरी विवादित भूमि चकबंदी प्रक्रिया के अधीन चल रही थी, जिसके कारण इसके स्वरूप या मालिकाना हक में किसी भी प्रकार का फेरबदल करना पूरी तरह प्रतिबंधित था।

तथापि, भू-माफियाओं, स्थानीय रसूखदारों और भ्रष्ट अधिकारियों के एक संगठित सिंडिकेट ने इस प्रतिबंध को दरकिनार करते हुए एक सोची-समझी साजिश रची। इस सिंडिकेट ने जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार किए, कूट रचित साक्ष्य बनाए और राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर इस 1144 बीघा सरकारी जमीन को निजी व्यक्तियों के नाम पर आवंटित करा दिया। इस महाघोटाले की भनक जब वर्तमान प्रशासनिक अधिकारियों को लगी, तो हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान लेखपाल स्वाति शर्मा की तहरीर पर 2 जुलाई को गुन्नौर थाने में एक विस्तृत मुकदमा दर्ज किया गया। इस UP Government Land Fraud में कुल 19 नामजद और कई अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

2018 में जो पट्टे निरस्त हुए, उन्हें 2019 में दोबारा बांट दिया

इस पूरे मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें एक के बाद एक कई चौंकाने वाले मोड़ सामने आए। जांच दल को मिले साक्ष्यों के अनुसार, यह पहली बार नहीं था जब इस कीमती जमीन को लूटने का प्रयास किया गया हो। इससे पूर्व साल 2018 में भी इसी भूमि को गलत तरीके से आवंटित करने का प्रयास किया गया था, जिसे तत्कालीन सतर्क प्रशासन ने पकड़ लिया था और फर्जी कागजातों को पूरी तरह रद्द करते हुए कई दोषियों के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज कराया था।

परंतु, भ्रष्ट अधिकारियों के हौसले इतने बुलंद थे कि साल 2019 में तत्कालीन उप-जिलाधिकारी (एसडीएम) ओमवीर सिंह ने अपने पद और प्रशासनिक शक्तियों का घोर दुरुपयोग किया। उन्होंने 2018 के रद्दीकरण आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया और उसी विवादित 1144 बीघा जमीन पर कुल 162 लोगों के नाम दोबारा अवैध पट्टे मंजूर कर दिए। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि साल 2019 में पट्टों का पुनर-आवंटन करते समय पंचायती राज और राजस्व नियमावली के तय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं। इस पूरी प्रक्रिया में न तो ग्राम सभा की कोई खुली बैठक आयोजित की गई, न ही स्थानीय ग्रामीणों की कोई सहमति ली गई और न ही नियमानुसार लॉटरी प्रणाली का पालन किया गया। इसके विपरीत, बंद कमरों में बैठकर चहेतों और भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए जमीन के हिस्सों और लाभार्थियों की संख्या में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया।

विशेष जांच कमेटी की रिपोर्ट और पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई

इस UP Revenue Department Fraud Case का पर्दाफाश तब हुआ जब शासन के निर्देश पर गठित एक विशेष उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने गहन पड़ताल के बाद 4 जून 2026 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी (डीएम) को सौंपी। रिपोर्ट में तत्कालीन एसडीएम, चकबंदी अधिकारियों और वकीलों की सीधी संलिप्तता के अकाट्य प्रमाण पाए गए। रिपोर्ट मिलते ही उत्तर प्रदेश शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया और संभल पुलिस को तत्काल प्रभाव से आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए।

शुक्रवार को पुलिस की विशेष टीमों ने विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी कर इस घोटाले के पांच मुख्य मास्टरमाइंड्स को दबोच लिया। SDM Omveer Singh Arrested की खबर फैलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व सरकारी वकील जय भारद्वाज, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह और पूर्व चकबंदी अधिकारी महेंद्र सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन सभी आरोपियों को भारी सुरक्षा के बीच मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

जांच के दायरे में कई और रसूखदार, संपत्तियां होंगी कुर्क

संभल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बेहद गंभीर और संगठित Gunnaur Sambhal Land Corruption का मामला है। इस घोटाले में शामिल शेष 14 नामजद आरोपियों और अन्य संदिग्धों को पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में शामिल रहे कुछ अन्य अधिकारियों और सफेदपोशों की भूमिका की भी बारीकी से स्क्रूटनी की जा रही है।

प्रशासनिक सूत्रों का यह भी कहना है कि इस अवैध आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर पूरी 1144 बीघा जमीन को पुनः उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद कर रहा है, और माना जा रहा है कि दोषियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उनकी अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्तियों को भी कुर्क किया जा सकता है। इस बड़ी कार्रवाई ने यह साफ संदेश दे दिया है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले और उनका साथ देने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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TAGGED:Gunnaur Sambhal Land CorruptionSambhal Land ScamSDM Omveer Singh ArrestedUP Government Land FraudUP Revenue Department Fraud Case
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