ठाणे/कल्याण। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के अंतर्गत आने वाले कल्याण इलाके से एक बेहद हैरान और विचलित कर देने वाला मामला सामने आया है। जीवन रक्षक माने जाने वाले और समाज के सबसे संवेदनशील स्थानों में शुमार ‘अस्पताल’ के भीतर सरेआम गुंडागर्दी और जानलेवा हमले का एक सनसनीखेज वाकया प्रकाश में आया है। यह ताजा और खौफनाक मामला कल्याण पूर्व में स्थित ‘जानकी ग्लोबल हॉस्पिटल’ का है। यहां महज चंद रुपयों के इलाज के बिल का भुगतान करने के बजाय एक मरीज ने न केवल संवेदनशीलता की सभी हदें पार कर दीं, बल्कि बाकायदा फोन कर अपने दबंग साथियों को मौके पर बुला लिया। इसके बाद लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से लैस होकर आए इन बदमाशों ने डॉक्टर और अस्पताल के मासूम कर्मचारियों पर बेरहमी से हमला कर दिया। इस हिंसक वारदात के बाद से स्थानीय डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ में भारी डर और रोष का माहौल व्याप्त है।
बुखार का इलाज कराने आया था मरीज, मानवीय आधार पर कम किया गया था बिल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोनू नाम का एक स्थानीय मरीज तेज बुखार की शिकायत लेकर जानकी ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचा था। अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की, जिसके तहत उसे जरूरी इंजेक्शन दिए गए और ड्रिप (ग्लूकोज) भी लगाई गई। इलाज संपन्न होने के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा कुल मिलाकर लगभग दो हजार रुपये का बेहद सामान्य सा बिल तैयार किया गया। जब मरीज ने आर्थिक असमर्थता की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन ने मानवीय आधार और सहानुभूति दिखाते हुए बिल की राशि को और कम कर दिया तथा मरीज को मात्र 1500 रुपये का भुगतान करने को कहा।
GPay का झांसा और फिर बिछाया हमले का जाल
इलाज में छूट मिलने और त्वरित राहत मिलने के बावजूद मरीज सोनू की नीयत में खोट साफ दिखाई दे रहा था। वह बिल का भुगतान करने के बजाय लगातार काउंटर पर मौजूद स्टाफ को गुमराह करने लगा और तरह-तरह के बहाने बनाने लगा। पहले उसने कहा कि वह ‘गूगल पे’ (GPay) के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहा है, लेकिन जब ट्रांजैक्शन नहीं हुआ तो उसने नया पैंतरा बदला। उसने काउंटर कर्मचारियों से कहा कि उसका एक दोस्त नीचे कैश पैसे लेकर खड़ा है, इसलिए किसी कर्मचारी को उसके साथ नीचे भेज दिया जाए ताकि वह पैसे कलेक्ट कर सके।
अस्पताल के बेखबर कर्मचारी जब मरीज के भरोसे पर उसके साथ अस्पताल की इमारत से नीचे उतरे, तो नीचे का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। वहां पहले से ही मरीज के इशारे पर उसके कई खूंखार साथी हाथों में लोहे की रॉड, लाठियां और डंडे लेकर घात लगाए खड़े थे। आरोप है कि जैसे ही कर्मचारियों ने पैसे की मांग की, मरीज और उसके साथियों ने बिना कुछ सोचे-समझे डॉक्टर और अस्पताल कर्मियों पर अंधाधुंध वार करना शुरू कर दिया।
अस्पताल के डॉक्टर का दर्द: “हमने मरीज का पूरी ईमानदारी से सामान्य इलाज किया था। जब उसने बिल ज्यादा होने की बात कही, तो हमने इंसानियत के नाते पैसे भी कम कर दिए थे। इसके बावजूद उसने हमारे भरोसे का खून किया। भुगतान करने के बजाय इस तरह योजनाबद्ध तरीके से जानलेवा हमला करवाना बेहद शर्मनाक है। अगर डॉक्टर ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो वे मरीजों का इलाज कैसे करेंगे?” — डॉ. अशोक, जानकी ग्लोबल हॉस्पिटल, कल्याण
CCTV में कैद हुई लाइव हैवानियत, पुलिस महकमे में खलबली
लोहे की रॉड से किए गए इस अचानक हमले में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और कई स्टाफ सदस्यों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। हालांकि, आरोपी और उसके साथी यह भूल गए कि अस्पताल परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के लिहाज से सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगे हुए हैं। यह पूरी वारदात, जिसमें बदमाश रॉड चमकाते हुए डॉक्टरों को पीट रहे हैं, कैमरों में हुबहू कैद हो गई है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय कोळसेवाड़ी पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन की तहरीर पर संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी सोनू और उसके फरार साथियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें बनाकर संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
कल्याण पूर्व की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस खौफनाक वारदात ने एक बार फिर कल्याण पूर्व और ठाणे जिले के उपनगरों में लगातार बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर गहरे सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। स्थानीय रेजिडेंट्स और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) से जुड़े डॉक्टरों का कहना है कि जब शहर में अस्पताल जैसी जगहें भी सुरक्षित नहीं बची हैं, जहां चौबीसों घंटे जीवन बचाने का काम होता है, तो एक आम नागरिक खुद को सड़कों और मोहल्लों में कैसे सुरक्षित महसूस करेगा। स्थानीय नागरिकों ने गृह विभाग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि ऐसे गुंडा तत्वों के खिलाफ मकोका या किसी सख्त कानून के तहत त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में डॉक्टरों और कोरोना वॉरियर्स जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स पर हाथ उठाने से पहले अपराधी सौ बार सोचें।
