मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने की आहट सुनाई दे रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए संकट गहराता नजर आ रहा है। पहले पार्टी के छह सांसदों के बगावती तेवरों ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ाई थीं, वहीं अब खबर है कि पार्टी के 20 विधायकों में से 14 विधायक भी एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं और उनके साथ जाने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने उद्धव गुट में हड़कंप मचा दिया है।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों में संभावित टूट की आशंका को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने तत्काल प्रभाव से अपने सभी विधायकों की एक अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक मुंबई स्थित शिवालय में दोपहर 2:30 बजे आयोजित की जा रही है, जिसमें पार्टी की वर्तमान स्थिति और आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। बताया जा रहा है कि इससे पहले दोपहर 12 बजे भी पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं के साथ बंद कमरे में विचार-विमर्श किया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का तथाकथित “ऑपरेशन टाइगर” लगातार सफल होता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2022 में शिवसेना में हुई बड़ी टूट के बाद अब एक बार फिर शिंदे गुट उद्धव ठाकरे के संगठनात्मक ढांचे को कमजोर करने की रणनीति पर काम करता नजर आ रहा है। यदि 20 में से 14 विधायक वास्तव में शिंदे गुट के साथ चले जाते हैं, तो विधानसभा में उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास केवल 6 विधायक ही शेष रह जाएंगे। यह स्थिति पार्टी के राजनीतिक प्रभाव और भविष्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है।
दूसरी ओर, बागी सांसदों के मुद्दे ने भी उद्धव खेमे की चिंता बढ़ा दी है। सूत्रों का दावा है कि छह बागी सांसद दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कोई बड़ा राजनीतिक ऐलान कर सकते हैं। माना जा रहा है कि यह ऐलान महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। सांसदों और विधायकों दोनों स्तर पर संभावित सेंधमारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के सामने अस्तित्व की चुनौती खड़ी कर दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टूट वास्तव में होती है, तो महाराष्ट्र में शिवसेना की राजनीति का नया अध्याय शुरू हो सकता है। वहीं, उद्धव ठाकरे के लिए यह अपनी पार्टी और संगठन को एकजुट रखने की सबसे बड़ी परीक्षा होगी। आने वाले कुछ दिनों में होने वाले फैसले न केवल शिवसेना बल्कि महाराष्ट्र की पूरी राजनीति की दिशा और दशा तय कर सकते हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई इमरजेंसी बैठक और बागी नेताओं की आगामी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे अपने विधायकों और सांसदों को एकजुट रखने में कितने सफल होते हैं या फिर महाराष्ट्र की राजनीति एक और बड़े राजनीतिक उलटफेर की साक्षी बनती है।
