अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी और दानराशि में अनियमितताओं के मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है और सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में कई लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। जांच के केंद्र में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव हैं, जिन्हें इस पूरे प्रकरण का प्रमुख संदिग्ध माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि टिन्नू यादव से विस्तृत पूछताछ के बाद SIT कई महत्वपूर्ण निष्कर्षों तक पहुंची है और कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को SIT ने टिन्नू यादव से घंटों पूछताछ की थी। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई दानराशि, गहनों और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड में कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई। मामले में अब तक मंदिर ट्रस्ट से जुड़े 10 से अधिक प्रमुख पदाधिकारियों, कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है।
जांच के दौरान दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। SIT यह जांच रही है कि कहीं दान की गिनती, रिकॉर्डिंग और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया के दौरान किसी स्तर पर हेराफेरी तो नहीं की गई। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा सकती है।
मामले को और गंभीर बनाने वाला आरोप यह है कि टिन्नू यादव ने कथित तौर पर मंदिर की दानराशि का दुरुपयोग कर एक आलीशान मकान का निर्माण कराया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इस निर्माण कार्य में लगभग 50 करोड़ रुपये तक की राशि खर्च की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन SIT इन्हीं बिंदुओं की गहराई से जांच कर रही है।
राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ टिन्नू यादव के कथित करीबी संबंधों को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस मामले में अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन जांच एजेंसियां सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ रही हैं।
SIT की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मंदिर में प्राप्त सोने, चांदी, आभूषणों और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के वास्तविक आंकड़ों का सत्यापन है। जांच टीम दस्तावेजों, रजिस्टरों और बैंक रिकॉर्ड का मिलान कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि मंदिर में प्राप्त दान और आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज राशि व वस्तुओं के बीच कोई अंतर है या नहीं। यदि किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है तो यह कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के दावों को मजबूत कर सकता है।
सूत्रों का कहना है कि जिन पदाधिकारियों की लापरवाही या संदिग्ध भूमिका सामने आएगी, उन्हें ट्रस्ट से बाहर किए जाने की भी सिफारिश की जा सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जल्द ही SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप सकती है। जांच का यह छठा दिन है और टीम को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
राम मंदिर देश की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है और ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता का मामला बेहद संवेदनशील बन जाता है। यही कारण है कि सरकार और जांच एजेंसियां इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रही हैं। अब सभी की नजर SIT की रिपोर्ट और संभावित गिरफ्तारियों पर टिकी हुई है, जो इस पूरे मामले की दिशा और भविष्य तय कर सकती हैं।
