गाजियाबाद। देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (यूजी) को लेकर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और तनाव के बीच एक और दुखद घटना सामने आई है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 22 वर्षीय छात्र जतिन कुमार ने परीक्षा से कुछ घंटे पहले आत्महत्या कर ली। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा को लेकर लाखों छात्र तैयारी में जुटे हुए हैं। पिछले एक सप्ताह के भीतर देश के अलग-अलग राज्यों से कई NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिसने अभिभावकों, शिक्षकों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
पुलिस के अनुसार, गाजियाबाद के विजयनगर थाना क्षेत्र के एच-ब्लॉक निवासी जतिन कुमार लंबे समय से NEET परीक्षा की तैयारी कर रहा था। वह इस वर्ष भी परीक्षा में शामिल होने वाला था। परिवार के लोगों ने बताया कि परीक्षा से एक दिन पहले तक उसकी दिनचर्या सामान्य दिखाई दे रही थी। गुरुवार रात करीब 12 बजे तक वह अपने कमरे में टहलता और पढ़ाई करता दिखाई दिया था। लेकिन शुक्रवार सुबह जब परिजन उसे जगाने पहुंचे तो वह मृत अवस्था में मिला।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान कमरे में पंखे से बंधा फंदा टूटा हुआ मिला, जबकि शव फर्श पर पड़ा था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मामले की जांच शुरू कर दी।
आत्महत्या से पहले बनाया वीडियो
जांच के दौरान पुलिस को छात्र के मोबाइल फोन से एक वीडियो मिला, जिसे उसने कथित तौर पर आत्महत्या से ठीक पहले रिकॉर्ड किया था। लगभग एक मिनट चार सेकंड के इस वीडियो में जतिन ने अपने स्टडी रूम का दृश्य दिखाया और कहा कि वह “आज कुछ अलग करने” के बारे में सोच रहा है।
वीडियो में उसने पंखे पर लगे फंदे को भी कैमरे में दिखाया। हालांकि उसने स्पष्ट रूप से कहा कि उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है और उसे NEET परीक्षा को लेकर कोई तनाव नहीं है। उसने अपने पिता का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उसे परीक्षा को लेकर चिंता न करने की सलाह दी थी।
वीडियो में जतिन ने यह भी कहा कि वह परीक्षा में सफल होना चाहता है और यदि वह सफल हो गया तो लोग यह वीडियो देखेंगे। इसके बाद वीडियो समाप्त हो जाता है। पुलिस अब वीडियो की सत्यता, उसकी मानसिक स्थिति और घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों की गहन जांच कर रही है।
परिवार का इकलौता बेटा था जतिन
जतिन अपने परिवार का इकलौता बेटा था। उसके पिता एक सरकारी विभाग में कार्यरत हैं जबकि उसकी मां गृहिणी हैं। उसकी एक छोटी बहन इंटरमीडिएट की छात्रा है। बेटे की अचानक मौत से परिवार गहरे सदमे में है। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
परिजनों ने फिलहाल मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया है। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एक सप्ताह में कई छात्रों की मौत ने बढ़ाई चिंता
गाजियाबाद की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। पिछले एक सप्ताह के भीतर देश के विभिन्न हिस्सों से NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या या संदिग्ध मौतों की कई घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली में रेणु मीणा ने दी जान
राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली 18 वर्षीय रेणु मीणा दिल्ली में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। वह अपने भाई-बहनों के साथ रहती थी। 14 जून को उसने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
जानकारी के अनुसार, उस दिन सभी भाई-बहन लाइब्रेरी गए थे। शाम को घर लौटने के बाद रेणु अपने कमरे में चली गई। कुछ समय बाद जब उसे चाय के लिए बुलाया गया तो कोई जवाब नहीं मिला। दरवाजा खोलने पर उसका शव फंदे से लटका मिला।
सीकर में छात्र उमेश माली की आत्महत्या
राजस्थान के झुंझुनू जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के रहने वाले उमेश माली भी NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। वह सीकर में अपनी मां, भाई और बहन के साथ रहते थे। बताया गया कि यह उनका तीसरा प्रयास था और वह 21 जून की परीक्षा में शामिल होने वाले थे।
परीक्षा से पहले उन्होंने भी आत्महत्या कर ली। इस घटना ने राजस्थान के कोचिंग हब में पढ़ रहे हजारों छात्रों और उनके अभिभावकों को झकझोर दिया।
अहमदाबाद में 17 वर्षीय छात्र ने लगाई छलांग
18 जून को गुजरात के अहमदाबाद में एक 17 वर्षीय छात्र ने NEET री-एग्जाम से तीन दिन पहले एक रिहायशी इमारत की छठी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तड़के कंट्रोल रूम को सूचना मिली थी कि एक छात्र खून से लथपथ हालत में सोसाइटी परिसर में पड़ा है। अस्पताल पहुंचाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।
कोयंबटूर में छात्रा अनुकीर्तना की मौत
तमिलनाडु के कोयंबटूर की रहने वाली 19 वर्षीय अनुकीर्तना पहले दो बार NEET परीक्षा दे चुकी थी। पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाओं के बाद वह दोबारा परीक्षा की तैयारी कर रही थी।
पुलिस का मानना है कि लगातार परीक्षा संबंधी दबाव और अनिश्चितता के कारण वह मानसिक तनाव में थी। इसी तनाव के चलते उसने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
इंदौर में छात्रा की संदिग्ध मौत
मध्य प्रदेश के इंदौर में धार जिले की रहने वाली छात्रा अवंतिका मौर्य की भी मौत हो गई। वह अपनी बहन के साथ रहकर NEET की तैयारी कर रही थी।
जानकारी के अनुसार, मोबाइल पर बात करते समय वह तीसरी मंजिल से गिर गई। पुलिस जांच कर रही है कि यह हादसा था या आत्महत्या। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव बना चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की तीव्र प्रतिस्पर्धा छात्रों पर भारी मानसिक दबाव डाल रही है। लाखों छात्र सीमित सीटों के लिए वर्षों तक तैयारी करते हैं। असफलता का डर, परिवार की अपेक्षाएं, सामाजिक दबाव और भविष्य को लेकर चिंता कई बार मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती है।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि छात्रों में तनाव, अवसाद, चिंता और अकेलेपन की भावना को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। परिवारों और शिक्षकों को केवल परीक्षा परिणामों पर नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना चाहिए।
समाज के लिए चेतावनी हैं ये घटनाएं
गाजियाबाद के जतिन कुमार सहित हाल के दिनों में सामने आए कई मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हमारी शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था छात्रों पर अत्यधिक दबाव बना रही है। ये घटनाएं केवल व्यक्तिगत त्रासदी नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी हैं कि सफलता और असफलता से परे जाकर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है।
फिलहाल गाजियाबाद पुलिस जतिन कुमार की मौत के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं, देशभर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं इस बात की याद दिला रही हैं कि परीक्षा में सफलता महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन किसी भी छात्र का जीवन उससे कहीं अधिक मूल्यवान है।
