देशफीचर्डराजनीति

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, मध्य प्रदेश की तीनों सीटों पर भाजपा की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ

भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद राज्य की तीनों राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान किया है, जबकि भाजपा ने इसे चुनावी नियमों और कानून की जीत बताया है।

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की जीत लगभग तय मानी जा रही है। भाजपा की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और प्रदेश सचिव रजनीश अग्रवाल भी राज्यसभा पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।

नामांकन रद्द होने की वजह क्या बनी?

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की जांच के दौरान भाजपा उम्मीदवार महेश केवट ने मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी छिपाई है।

रिटर्निंग ऑफिसर एवं मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने इस आपत्ति पर विस्तृत सुनवाई की। लगभग साढ़े चार घंटे तक चली बहस और कानूनी दलीलों के बाद उन्होंने भाजपा की आपत्ति स्वीकार कर ली और मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।

निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, नटराजन ने अपने नामांकन पत्र और हलफनामे में उस मामले का उल्लेख नहीं किया, जिसमें वर्ष 2025 में हैदराबाद के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत नोटिस जारी किया गया था। इसी आधार पर उनके नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया गया।

क्या है हैदराबाद का मामला?

जानकारी के अनुसार, यह मामला एक पूर्व पार्षद की निजी शिकायत से जुड़ा हुआ है। शिकायत के आधार पर हैदराबाद की अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को नोटिस जारी किया था। वर्तमान में नटराजन तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी भी हैं और इसी संदर्भ में यह मामला चर्चा में आया था।

भाजपा का दावा है कि अदालत द्वारा जारी नोटिस की जानकारी चुनाव आयोग को दिए जाने वाले हलफनामे में शामिल की जानी चाहिए थी। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए यह नामांकन नियमों का उल्लंघन माना गया।

हालांकि कांग्रेस और उसके कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि धारा 223 के तहत जारी नोटिस को आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता और ऐसी स्थिति में इस जानकारी को छिपाने का आरोप तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है।

साढ़े चार घंटे तक चला हाई वोल्टेज ड्रामा

मंगलवार को भोपाल स्थित विधानसभा परिसर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। दोपहर करीब दो बजे भाजपा उम्मीदवार महेश केवट अपनी कानूनी टीम के साथ विधानसभा पहुंचे और औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई।

कुछ ही समय बाद मीनाक्षी नटराजन भी वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ विधानसभा पहुंचीं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कई विधायक और पार्टी कार्यकर्ता भी वहां मौजूद रहे।

रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर कांग्रेस नेताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। दूसरी ओर भाजपा के नेता और कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में विधानसभा परिसर पहुंच गए। देखते ही देखते दोनों दलों के समर्थकों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली। पूरे घटनाक्रम ने विधानसभा परिसर को राजनीतिक अखाड़े में बदल दिया।

कांग्रेस ने बताया लोकतंत्र की हत्या

नामांकन रद्द होने के फैसले के बाद कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार दिया।

उन्होंने कहा कि भाजपा एक तरफ महिला सम्मान और महिला आरक्षण की बात करती है, जबकि दूसरी तरफ एक महिला उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास करती है। पटवारी ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया पूर्वाग्रह से ग्रसित थी और रिटर्निंग ऑफिसर ने निष्पक्ष तरीके से निर्णय नहीं लिया।

उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का प्रश्न है। कांग्रेस ने घोषणा की कि इस फैसले के विरोध में पूरे प्रदेश में प्रदर्शन किए जाएंगे और पार्टी कार्यकर्ता भूख हड़ताल भी करेंगे।

उमंग सिंघार ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा को शुरू से पता था कि कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं और पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव में पर्याप्त समर्थन मौजूद है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले कांग्रेस विधायकों के टूटने की अफवाहें फैलाई गईं और जब वह रणनीति सफल नहीं हुई तो नामांकन प्रक्रिया को विवादित बनाने की कोशिश की गई।

सिंघार ने कहा कि भाजपा को यह एहसास हो गया था कि कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग नहीं करेंगे, इसलिए कानूनी तकनीकीताओं का सहारा लेकर चुनावी समीकरण बदले गए।

मीनाक्षी नटराजन ने फैसले को बताया खतरनाक संकेत

नामांकन रद्द होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब भाजपा ने विधानसभा में पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा था, तभी कांग्रेस को आशंका हो गई थी कि कोई असामान्य राजनीतिक रणनीति अपनाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि पहले वोटों की चोरी की चर्चा होती थी, लेकिन अब सीटों की चोरी का दौर शुरू हो गया है। नटराजन ने आरोप लगाया कि उनके पक्ष की कानूनी दलीलों को गंभीरता से नहीं सुना गया और पहले से तय निर्णय को केवल औपचारिक रूप दिया गया।

उनका कहना था कि यह मामला केवल उनके व्यक्तिगत राजनीतिक भविष्य का नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का प्रश्न है।

कांग्रेस के वकीलों ने फैसले पर उठाए सवाल

कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने फैसले को कानून के विरुद्ध बताया। उन्होंने कहा कि BNSS की धारा 223 के तहत जारी नोटिस केवल संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देने के लिए होता है।

गुप्ता के अनुसार, इस चरण पर अदालत न तो अपराध का संज्ञान लेती है और न ही व्यक्ति को आरोपी घोषित करती है। इसलिए इसे लंबित आपराधिक मामला मानना कानूनी रूप से गलत है।

उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान कांग्रेस ने विस्तृत लिखित जवाब, कई न्यायिक निर्णयों और कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया था। लेकिन अंतिम आदेश में इन तर्कों का उचित उल्लेख नहीं किया गया।

अजय गुप्ता ने कहा कि आदेश एक “नॉन-स्पीकिंग ऑर्डर” की तरह प्रतीत होता है, जिसमें कानूनी तर्कों और तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।

नामांकन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया ने पूरी नामांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि नामांकन पत्र के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए थे और अधिकारियों द्वारा जारी चेकलिस्ट में किसी प्रकार की कमी नहीं बताई गई थी।

धनोपिया ने यह भी दावा किया कि सुनवाई के दौरान एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। उन्होंने पूछा कि वह किस अधिकार और हैसियत से वहां मौजूद थे, जबकि उनका चुनावी प्रक्रिया से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।

इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि आदेश में जिस व्यक्ति का नाम आपत्ति दर्ज कराने वाले के रूप में दर्ज किया गया, वह वास्तविक शिकायतकर्ता से अलग था। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया फैसले का स्वागत

दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार ने अपने खिलाफ लंबित मामले की जानकारी छिपाई है तो चुनावी नियमों के तहत कार्रवाई होना स्वाभाविक है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस जानती थी कि उसका उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाएगा, इसलिए जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया।

उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इंदौर में हुई राजनीतिक घटनाओं से की और कहा कि कांग्रेस लगातार ऐसे विवादों में घिरती रही है।

भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना था। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और वह पहले से ही दो सीटें जीतने की मजबूत स्थिति में थी।

तीसरी सीट को लेकर राजनीतिक मुकाबले की संभावना बन रही थी, लेकिन मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद यह संभावना लगभग समाप्त हो गई है।

अब भाजपा के तीनों उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना बेहद मजबूत हो गई है। इसे भाजपा के लिए एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

कांग्रेस विधायकों की बेंगलुरु यात्रा भी रद्द

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने अपने विधायकों को संभावित क्रॉस वोटिंग से बचाने के लिए कर्नाटक भेजने की योजना बनाई थी।

इसके लिए भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर एक चार्टर्ड विमान भी तैयार रखा गया था। योजना के तहत 40 से अधिक विधायक और उनके परिजन बेंगलुरु जाने वाले थे।

हालांकि विमान को उड़ान की अनुमति मिलने में काफी देरी हुई। एयरपोर्ट प्रबंधन ने तकनीकी और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया।

जब तक उड़ान की मंजूरी मिली, तब तक मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने की खबर पहुंच चुकी थी। इसके बाद कांग्रेस ने विधायकों की बेंगलुरु यात्रा रद्द कर दी।

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि उड़ान में देरी राजनीतिक दबाव के कारण कराई गई, ताकि कांग्रेस अपने विधायकों को राज्य से बाहर न ले जा सके। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज किया है।

आगे क्या होगा?

अब पूरे मामले की नजर कांग्रेस की अगली कानूनी रणनीति पर है। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि वह रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अदालत में चुनौती देगी।

यदि अदालत से कांग्रेस को राहत मिलती है तो राज्यसभा चुनाव की तस्वीर बदल सकती है। लेकिन फिलहाल राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर भाजपा को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है, जबकि भाजपा इसे पारदर्शी चुनावी प्रक्रिया और नियमों के पालन की जीत के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

राज्यसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ यह विवाद अब अदालतों और राजनीतिक मंचों दोनों पर लंबी लड़ाई का रूप ले सकता है। फिलहाल इतना तय है कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने से मध्य प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल आ गया है और भाजपा के लिए राज्यसभा की तीनों सीटों पर निर्विरोध जीत का रास्ता लगभग पूरी तरह साफ हो चुका है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button