
दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल आयोजन FIFA वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने में अब केवल कुछ ही सप्ताह का समय बचा है, लेकिन भारत में करोड़ों फुटबॉल प्रशंसकों के सामने सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—वे यह टूर्नामेंट आखिर देखेंगे कहां? इस बीच प्रसार भारती द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में दिए गए बयान ने भारतीय फुटबॉल प्रेमियों की चिंता और बढ़ा दी है। सार्वजनिक प्रसारक प्रसार भारती ने साफ कहा है कि भारत में FIFA वर्ल्ड कप के प्रसारण अधिकार खरीदना उसकी जिम्मेदारी नहीं है। इस बयान के बाद अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि भारत में टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फुटबॉल वर्ल्ड कप का प्रसारण कौन करेगा।
प्रसार भारती के इस रुख ने भारतीय फुटबॉल फैंस को बड़ा झटका दिया है। खास बात यह है कि FIFA वर्ल्ड कप 2026 का आयोजन 11 जून से शुरू होने जा रहा है और दुनिया भर की तरह भारत में भी इस टूर्नामेंट को लेकर जबरदस्त उत्साह रहता है। हालांकि भारत की फुटबॉल टीम अब तक कभी FIFA वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई है, फिर भी इस खेल को देखने वाले दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ती रही है।
भारत में फुटबॉल को क्रिकेट जितनी लोकप्रियता भले ही न मिली हो, लेकिन वर्ल्ड कप के दौरान फुटबॉल फीवर पूरे देश में देखने को मिलता है। गोवा, केरल, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों में फुटबॉल की लोकप्रियता लंबे समय से रही है, लेकिन अब महानगरों और युवाओं के बीच भी इस खेल के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है। खासकर Gen Z दर्शकों में यूरोपीय फुटबॉल लीग और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स को लेकर जबरदस्त क्रेज देखने को मिलता है।
इस बार का FIFA वर्ल्ड कप कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है। पहली बार यह टूर्नामेंट तीन देशों—अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको—में आयोजित किया जाएगा। साथ ही पहली बार इसमें 32 के बजाय 48 टीमें हिस्सा लेंगी। टूर्नामेंट 11 जून से 19 जुलाई तक चलेगा और इसमें कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। इतने बड़े आयोजन को लेकर दुनिया भर में उत्साह है, लेकिन भारत में प्रसारण अधिकारों को लेकर बनी अनिश्चितता ने फैंस की बेचैनी बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक FIFA को उम्मीद थी कि भारत में इस बार मीडिया राइट्स से बड़ी कमाई होगी। पिछली बार 2022 कतर वर्ल्ड कप के दौरान भारत में टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लगभग 74.5 करोड़ दर्शकों ने मैच देखे थे। दर्शकों की संख्या के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल रहा था। इसके बावजूद इस बार FIFA को अब तक भारत में कोई बड़ा ब्रॉडकास्टिंग पार्टनर नहीं मिल पाया है।
पिछले वर्ल्ड कप के दौरान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीमिंग अधिकारों के लिए JioCinema ने बड़ी रकम खर्च की थी। बताया जाता है कि FIFA इस बार भारत से लगभग 100 मिलियन डॉलर यानी करीब 965 करोड़ रुपये की कमाई की उम्मीद कर रहा था। लेकिन भारतीय बाजार में अब तक कोई कंपनी इतनी बड़ी बोली लगाने के लिए आगे नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार प्रसारण अधिकारों की बिक्री में देरी की एक बड़ी वजह मैचों की टाइमिंग भी है। चूंकि टूर्नामेंट अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में आयोजित हो रहा है, इसलिए भारत में अधिकांश मुकाबले देर रात या मध्यरात्रि के बाद शुरू होंगे। कई मैच भारतीय समयानुसार रात 12 बजे के बाद खेले जाएंगे। 104 मुकाबलों में से केवल कुछ ही मैच ऐसे होंगे जो भारतीय दर्शकों के लिए सुविधाजनक समय पर शुरू होंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात होने वाले मैचों के कारण टीवी दर्शकों की संख्या प्रभावित हो सकती है, जिससे विज्ञापन और प्रसारण कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स बड़ी रकम खर्च करने से बच रहे हैं।
हालांकि फुटबॉल फैंस का मानना है कि डिजिटल युग में समय अब बड़ी बाधा नहीं रहा है। युवा दर्शक मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देर रात भी मैच देखना पसंद करते हैं। सोशल मीडिया पर कई फुटबॉल प्रशंसकों ने चिंता जताई है कि यदि समय रहते प्रसारण अधिकार तय नहीं हुए तो करोड़ों भारतीय दर्शक इस वैश्विक आयोजन से वंचित रह सकते हैं।
भारत की FIFA रैंकिंग फिलहाल पुरुष टीम में 136 और महिला टीम में 69 है। भारत अभी तक FIFA वर्ल्ड कप में जगह नहीं बना पाया है, लेकिन इसके बावजूद यहां फुटबॉल दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इंग्लिश प्रीमियर लीग, UEFA चैंपियंस लीग और अन्य अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स के मैच बड़ी संख्या में भारतीय दर्शक देखते हैं।
फुटबॉल विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल बाजार में FIFA वर्ल्ड कप का प्रसारण न होना खेल के विकास के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है। इससे युवा खिलाड़ियों और दर्शकों की रुचि पर असर पड़ सकता है। कई विशेषज्ञों ने सरकार और निजी कंपनियों से अपील की है कि जल्द कोई समाधान निकाला जाए ताकि भारतीय दर्शक इस बड़े खेल आयोजन का आनंद उठा सकें।
इस पूरे मामले ने भारत में खेल प्रसारण की आर्थिक चुनौतियों को भी उजागर किया है। एक तरफ क्रिकेट का बाजार लगातार बढ़ रहा है, वहीं फुटबॉल जैसे खेलों के लिए प्रसारण अधिकार खरीदना कंपनियों के लिए महंगा और जोखिम भरा माना जा रहा है। इसके बावजूद भारत में फुटबॉल का बढ़ता दर्शक वर्ग यह संकेत देता है कि भविष्य में इस खेल की लोकप्रियता और बढ़ सकती है।
फिलहाल करोड़ों भारतीय फुटबॉल प्रेमियों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि आने वाले दिनों में कौन-सी कंपनी FIFA वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण अधिकार हासिल करती है। समय तेजी से निकल रहा है और टूर्नामेंट शुरू होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। ऐसे में यदि जल्द कोई फैसला नहीं हुआ, तो भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों की चिंता और निराशा दोनों बढ़ सकती हैं।



