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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आज संभव, डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी तय होने के संकेत से देशभर में बहस तेज

The Hill India News
Last updated: May 19, 2026 5:20 am
The Hill India News
Published: May 19, 2026
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इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर किसी आवारा कुत्ते के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होती है या गंभीर चोट लगती है, तो सिर्फ नगर निकाय ही नहीं बल्कि उस कुत्ते को नियमित रूप से खाना खिलाने वाले लोगों की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ऐसा नहीं हो सकता कि कोई व्यक्ति रोजाना किसी कुत्ते को खाना खिलाए, लेकिन जब वही कुत्ता किसी मासूम बच्चे, बुजुर्ग या राहगीर पर हमला कर दे तो उसकी कोई जवाबदेही न हो।

Contents
असम के आंकड़ों ने कोर्ट को किया चिंतितहाईवे, स्कूल और अस्पतालों के आसपास से हटेंगे आवारा कुत्तेसार्वजनिक जगहों पर खाना खिलाने पर रोक के निर्देश2025 में सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देशस्वतः संज्ञान से शुरू हुआ था मामला

कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की विफलता साफ दिखाई दे रही है और न्यायालय जिम्मेदारी तय करने से पीछे नहीं हटेगा। इस टिप्पणी के बाद देशभर में डॉग फीडर्स और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों के बीच नई बहस शुरू हो गई। कई लोग कोर्ट की इस टिप्पणी का समर्थन कर रहे हैं, जबकि पशु प्रेमी संगठन इसे कठोर मान रहे हैं।

असम के आंकड़ों ने कोर्ट को किया चिंतित

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने असम सरकार द्वारा पेश किए गए डॉग बाइट के आंकड़ों पर भी गहरी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2024 में राज्य में कुत्तों के काटने की 1.66 लाख घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2025 में केवल जनवरी महीने में ही 20,900 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। कोर्ट ने इन आंकड़ों को “बेहद भयावह” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक राज्य की स्थिति है, जबकि पूरे देश में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।

कोर्ट ने उन राज्यों को भी फटकार लगाई जिन्होंने अस्पष्ट या अधूरी जानकारी दी थी। न्यायालय ने साफ चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकारें इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेंगी तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

हाईवे, स्कूल और अस्पतालों के आसपास से हटेंगे आवारा कुत्ते

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले अंतरिम आदेशों में राज्यों और NHAI को निर्देश दिए थे कि राष्ट्रीय राजमार्गों, अस्पतालों, स्कूलों, कॉलेजों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और खेल परिसरों जैसे संवेदनशील सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। कोर्ट का मानना है कि इन जगहों पर बड़ी संख्या में बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की आवाजाही होती है, इसलिए सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा था कि जिन कुत्तों में रेबीज नहीं है और जो आक्रामक नहीं हैं, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी इलाके में छोड़ा जा सकता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था। हालांकि, रेबीज संक्रमित या अत्यधिक आक्रामक कुत्तों को अलग शेल्टर या पाउंड में रखने के निर्देश दिए गए थे।

सार्वजनिक जगहों पर खाना खिलाने पर रोक के निर्देश

सुप्रीम Court ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि सड़कों, गलियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाना अव्यवस्था और खतरे को बढ़ावा देता है। कोर्ट ने नगर निगमों को निर्देश दिए कि हर वार्ड में अलग-अलग “फीडिंग जोन” बनाए जाएं, जहां निर्धारित व्यवस्था के तहत कुत्तों को खाना खिलाया जा सके।

इन फीडिंग जोन में बोर्ड, साफ-सफाई और निगरानी की व्यवस्था करने की बात भी कही गई थी ताकि आम लोगों और पशु प्रेमियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा न हो।

2025 में सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में कई अहम निर्देश दिए थे, जिनका देशभर में असर देखने को मिला। इनमें नगर निगमों के लिए आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और डिवार्मिंग को अनिवार्य करना शामिल था। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्वस्थ और सामान्य व्यवहार वाले कुत्तों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ा जाए।

इसके अलावा आक्रामक और रेबीज संक्रमित कुत्तों को अलग रखने, सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने पर रोक लगाने और राष्ट्रीय स्तर पर एक समान नीति तैयार करने के निर्देश भी दिए गए थे।

स्वतः संज्ञान से शुरू हुआ था मामला

यह पूरा मामला 28 जुलाई 2025 को तब शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों और उनसे होने वाली मौतों पर स्वतः संज्ञान लिया था। उस समय सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए थे जिनमें आवारा कुत्ते बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला करते दिखाई दे रहे थे। इन घटनाओं ने पूरे देश में चिंता बढ़ा दी थी।

इसके बाद 11 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में आठ सप्ताह के भीतर सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के बाद पशु प्रेमियों और डॉग लवर्स ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए थे। दिल्ली में इंडिया गेट के आसपास भी कई प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद 22 अगस्त 2025 को कोर्ट ने अपने आदेश में कुछ बदलाव किए थे।

अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला किस दिशा में जाता है। यह फैसला सिर्फ आवारा कुत्तों के प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह तय करेगा कि सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। पूरे देश में इस फैसले को लेकर भारी उत्सुकता बनी हुई है।

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