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Reading: बंगाल में बड़े बदलाव की शुरुआत: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के 7 दिनों में 7 बड़े फैसले, पुलिस कल्याण बोर्ड भी भंग
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बंगाल में बड़े बदलाव की शुरुआत: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के 7 दिनों में 7 बड़े फैसले, पुलिस कल्याण बोर्ड भी भंग

The Hill India News
Last updated: May 16, 2026 12:21 pm
The Hill India News
Published: May 16, 2026
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर भी बड़े बदलाव तेजी से दिखाई देने लगे हैं। मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद शुभेंदु अधिकारी लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। 9 मई को शपथ लेने के बाद महज सात दिनों के भीतर उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिन्हें राज्य की राजनीति और प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी सरकार के दौरान बनाए गए ‘पुलिस कल्याण बोर्ड’ को तत्काल प्रभाव से भंग करने का बड़ा फैसला लिया।

Contents
पुलिस कल्याण बोर्ड को लेकर क्या बोले मुख्यमंत्री?पुलिस सुधार के लिए हाई लेवल कमेटीटोटो, ऑटो और फेरीवालों से अवैध वसूली पर सख्तीसात दिनों में लिए गए सात बड़े फैसले1. आरजी कर रेप और मर्डर केस में बड़ा एक्शन2. आलू-प्याज समेत जरूरी वस्तुओं की बिक्री पर लगी रोक हटाई3. स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य4. लाउडस्पीकर और गोवंश हत्या को लेकर नए निर्देश5. बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन देने का फैसला6. आयुष्मान भारत समेत केंद्र की योजनाएं लागू7. बंगाल में BNS लागू, अफसरों को केंद्रीय प्रशिक्षणराजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कहा कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका था और धीरे-धीरे एक राजनीतिक दल का हिस्सा बन गया था। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब पश्चिम बंगाल में “शासक का कानून” नहीं बल्कि “कानून का राज” चलेगा। मुख्यमंत्री के इस बयान को राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है।

पुलिस कल्याण बोर्ड को लेकर क्या बोले मुख्यमंत्री?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस कल्याण बोर्ड की स्थापना अच्छे उद्देश्य के साथ की गई थी ताकि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को सहायता मिल सके। लेकिन समय बीतने के साथ यह बोर्ड निष्पक्ष संस्था नहीं रह गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, बोर्ड का इस्तेमाल राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए किया जाने लगा और आम पुलिसकर्मियों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा अधिकारियों को विशेष सुविधाएं दी जा रही थीं जबकि निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की समस्याएं नजरअंदाज होती रहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना चाहती है। इसी कारण इस बोर्ड को भंग करने का निर्णय लिया गया।

पुलिस सुधार के लिए हाई लेवल कमेटी

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य में पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी तीन महीने के भीतर नई व्यवस्था और सुधारों की रूपरेखा तैयार करेगी। सरकार का दावा है कि इससे पुलिस प्रशासन अधिक जवाबदेह और जनता के प्रति संवेदनशील बनेगा।

मुख्यमंत्री ने आम लोगों को भरोसा दिलाया कि यदि कोई पुलिसकर्मी नागरिकों को परेशान करता है तो लोग सीधे थाने में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाएगा।

टोटो, ऑटो और फेरीवालों से अवैध वसूली पर सख्ती

शुभेंदु अधिकारी ने सड़क पर होने वाली अवैध वसूली के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि टोटो चालकों, ऑटो ड्राइवरों और फेरीवालों से जबरन पैसे वसूलने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। अब ऐसी घटनाओं पर “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाई जाएगी।

मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क पर टोल या अन्य नामों से अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।

सात दिनों में लिए गए सात बड़े फैसले

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के बाद बहुत कम समय में कई बड़े फैसले लेकर प्रशासनिक सक्रियता का संकेत दिया है। आइए जानते हैं उनके सात प्रमुख फैसलों के बारे में।

1. आरजी कर रेप और मर्डर केस में बड़ा एक्शन

राज्य में चर्चित आरजी कर रेप और मर्डर केस को लेकर मुख्यमंत्री ने सख्त कार्रवाई की है। इस मामले में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इनमें कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर विनीत गोयल, पूर्व डिप्टी कमिश्नर इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता शामिल हैं। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया।

2. आलू-प्याज समेत जरूरी वस्तुओं की बिक्री पर लगी रोक हटाई

ममता सरकार ने राज्य से बाहर आलू, प्याज, अनाज, तिलहन, दलहन, फल-सब्जियां और पशु उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। नई सरकार ने इस फैसले को पलटते हुए व्यापारियों और किसानों को राहत दी है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

3. स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य

शुभेंदु सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम 18 मई से लागू किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों में राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत होगी। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है।

4. लाउडस्पीकर और गोवंश हत्या को लेकर नए निर्देश

मुख्यमंत्री ने धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय सीमा में रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक गतिविधि के कारण सड़क पर जाम या लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

इसके अलावा गोवंश हत्या को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। अब गाय, बैल और भैंस जैसे पशुओं की हत्या के लिए पहले प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे अवैध गतिविधियों पर रोक लगेगी।

5. बीएसएफ को फेंसिंग के लिए जमीन देने का फैसला

सीमा सुरक्षा बल यानी BSF लंबे समय से सीमा पर फेंसिंग के लिए जमीन की मांग कर रहा था। नई सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में इस मांग को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि 45 दिनों के भीतर BSF को आवश्यक जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

6. आयुष्मान भारत समेत केंद्र की योजनाएं लागू

ममता सरकार पर अक्सर केंद्र सरकार की योजनाओं को राज्य में लागू नहीं करने के आरोप लगते रहे थे। अब शुभेंदु सरकार ने आयुष्मान भारत योजना समेत कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में लागू करने का निर्णय लिया है। सरकार का दावा है कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

7. बंगाल में BNS लागू, अफसरों को केंद्रीय प्रशिक्षण

नई सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) को पश्चिम बंगाल में लागू करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही आईपीएस और आईएएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति भी दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक आधुनिक और प्रभावी बनेगी।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इन फैसलों को लेकर पूरे राज्य में चर्चा तेज हो गई है। समर्थक इसे प्रशासनिक सुधार और कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा करार दे रहा है।

हालांकि इतना तय है कि नई सरकार ने सत्ता संभालते ही यह संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक और राजनीतिक तस्वीर में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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