
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अस्थिरता, युद्ध और ऊर्जा संकट को लेकर दुनिया को गंभीर चेतावनी दी है। नीदरलैंड के हेग शहर में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यदि मौजूदा हालात जल्द नहीं सुधरे, तो बीते कई दशकों में दुनिया ने जो आर्थिक और सामाजिक उपलब्धियां हासिल की हैं, वे मिट सकती हैं और करोड़ों लोग फिर से गरीबी के जाल में फंस सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया पहले ही कोविड-19 महामारी के प्रभावों से पूरी तरह उबर नहीं पाई है। दूसरी ओर रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा संकट ने कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को हिला कर रख दिया है। दुनिया भर में महंगाई, बेरोजगारी और सप्लाई चेन की समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने वैश्विक सहयोग और भरोसेमंद सप्लाई सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “पहले कोरोना आया, फिर युद्ध शुरू हो गए और अब ऊर्जा संकट दुनिया के सामने खड़ा है। यह दशक दुनिया के लिए संकटों का दशक बनता जा रहा है। अगर हालात जल्दी नहीं बदले, तो पिछले दशकों की उपलब्धियां मिट सकती हैं और दुनिया की बड़ी आबादी फिर से गरीबी में चली जाएगी।”
उन्होंने कहा कि आज दुनिया को ऐसी सप्लाई चेन की जरूरत है जो भरोसेमंद, पारदर्शी और स्थिर हो। प्रधानमंत्री ने भारत और नीदरलैंड के बीच बढ़ते सहयोग का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश मिलकर एक मजबूत और विश्वसनीय वैश्विक सप्लाई सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सप्लाई चेन का मजबूत होना बेहद जरूरी है, क्योंकि महामारी और युद्ध के दौरान दुनिया ने देखा कि जब सप्लाई सिस्टम प्रभावित होता है तो उसका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। खाद्यान्न, दवाइयों, ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कमी ने कई देशों में गंभीर संकट पैदा कर दिया।
नीदरलैंड में बसे भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रवासी भारतीयों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि विदेश में रहकर भी भारतीय समुदाय ने अपनी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को जीवित रखा है। पीएम मोदी ने कहा, “इतना प्यार और उत्साह देखकर कुछ समय के लिए मैं यह भूल ही गया था कि मैं नीदरलैंड में हूं। ऐसा लग रहा है जैसे भारत में कोई बड़ा त्योहार चल रहा हो।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों में रहने वाले भारतीय न केवल अपनी मेहनत से पहचान बना रहे हैं, बल्कि वे भारत की संस्कृति और मूल्यों को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत का “सांस्कृतिक दूत” बताते हुए कहा कि उनकी सफलता की कहानियां लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत के पिछले एक दशक के राजनीतिक और आर्थिक बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने 16 मई 2014 को आए लोकसभा चुनाव परिणामों को याद करते हुए कहा कि उस दिन भारत में एक स्थिर और मजबूत सरकार की वापसी हुई थी। उन्होंने कहा, “आज 16 मई का दिन मेरे लिए खास है। बारह साल पहले इसी दिन देश की जनता ने स्थिर सरकार के पक्ष में ऐतिहासिक जनादेश दिया था। करोड़ों भारतीयों का विश्वास मुझे लगातार काम करने की प्रेरणा देता है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में तेजी से प्रगति की है। उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। देश इनोवेशन, डिजिटल टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत केवल अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं कर रहा, बल्कि दुनिया की आर्थिक स्थिरता में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने महामारी के दौरान दुनिया के कई देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराकर मानवता की सेवा की मिसाल पेश की।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और नीदरलैंड के खेल संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच खेलों के क्षेत्र में भी अच्छा सहयोग देखने को मिल रहा है। पीएम मोदी ने टी20 क्रिकेट विश्व कप में नीदरलैंड की टीम के प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि भारतीय मूल के खिलाड़ियों ने डच क्रिकेट को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम के पूर्व कोच स्जोर्ड मारिजने का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि नीदरलैंड के कोचों और विशेषज्ञों ने भारतीय हॉकी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि खेलों के जरिए दोनों देशों के संबंध और मजबूत हुए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल प्रवासी भारतीयों के लिए संदेश नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी भी थी। उन्होंने साफ संकेत दिया कि यदि वैश्विक स्तर पर शांति, सहयोग और आर्थिक स्थिरता की दिशा में तेजी से कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में दुनिया को बड़े आर्थिक और सामाजिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।



