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उत्तराखंड: कैंसर पीड़ित परिवार के लिए देवदूत बना जिला प्रशासन, 71 हजार का कर्ज माफ कर 50 हजार की अतिरिक्त सहायता दी

देहरादून। उत्तराखंड में मानवता और संवेदनशील प्रशासनिक कार्यशैली का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। आर्थिक तंगी, कैंसर जैसी गंभीर बीमारी और परिवार की जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे एक असहाय परिवार को जिला प्रशासन ने बड़ी राहत प्रदान की है। देहरादून जिला प्रशासन ने न केवल परिवार पर चढ़ा 71 हजार रुपये का ऋण माफ कराया, बल्कि 50 हजार रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराकर संकट से जूझ रहे परिवार को नई उम्मीद दी है। प्रशासन की इस पहल की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।

जानकारी के अनुसार रायपुर विकासखंड के दूरस्थ ग्राम मालदेवता निवासी संध्या रमोला ने जिलाधिकारी सविन बंसल से मिलकर अपनी पीड़ा साझा की थी। संध्या ने बताया कि उनके पति गले के कैंसर से पीड़ित हैं और उनका इलाज हिमालय अस्पताल में चल रहा है। लगातार कीमोथेरेपी और बीमारी की गंभीर स्थिति के कारण उनके पति काम करने में असमर्थ हो गए हैं। परिवार की आय का मुख्य स्रोत बंद हो जाने से घर की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई थी।

संध्या रमोला ने जिलाधिकारी को बताया कि उनके दो छोटे बच्चे हैं, जिनमें एक की उम्र लगभग तीन वर्ष और दूसरे की छह वर्ष है। बच्चों की परवरिश, घर का खर्च, दवाइयों का खर्च और अस्पताल के लगातार बढ़ते बिलों ने परिवार को आर्थिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। हालात इतने खराब हो चुके थे कि परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया था।

उन्होंने बताया कि परिवार के भरण-पोषण और स्वरोजगार के उद्देश्य से वर्ष 2024 में 45 हजार रुपये तथा वर्ष 2025 में 37 हजार रुपये का ऋण स्वयं सहायता समूह के माध्यम से बैंक से लिया गया था। लेकिन पति की गंभीर बीमारी के चलते वह समय पर किश्तें जमा नहीं कर सकीं। धीरे-धीरे ब्याज बढ़ता गया और बैंक की ओर से लगभग 71 हजार रुपये जमा करने का नोटिस जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, एजेंटों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने से परिवार मानसिक तनाव और भय में जीने लगा था।

जब हर ओर से निराशा हाथ लग रही थी, तब संध्या रमोला ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने तत्काल मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सीएसआर फंड के माध्यम से 71 हजार रुपये की पूरी धनराशि सीधे ऋण खाते में जमा करवाई, जिससे परिवार का पूरा कर्ज समाप्त हो गया। साथ ही संबंधित बैंक को नो ड्यूज प्रमाण पत्र जारी करने के भी निर्देश दिए गए।

यहीं नहीं, प्रशासन ने परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान की। रायफल क्लब मद से संध्या रमोला के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डीबीटी के माध्यम से 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद भेजी गई। प्रशासन की इस सहायता से परिवार को न केवल आर्थिक राहत मिली, बल्कि भविष्य के लिए नई उम्मीद भी जगी।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप जनसमस्याओं का समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार जो किसी कारणवश सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं या आकस्मिक संकट का सामना कर रहे होते हैं, उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। प्रशासन लगातार यह सुनिश्चित कर रहा है कि जरूरतमंदों तक सहायता समय पर पहुंचे और कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित न रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है। यही कारण है कि आज जिला प्रशासन विभिन्न जिला स्तरीय प्रोजेक्ट, सीएसआर फंड, रायफल क्लब मद और अन्य संसाधनों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों, दिव्यांगजनों, निराश्रित महिलाओं और आपदा प्रभावित नागरिकों को लगातार सहायता उपलब्ध करा रहा है।

मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। यदि किसी कारण से कोई पात्र व्यक्ति योजनाओं से वंचित रह जाता है, तो जिला प्रशासन अपने स्तर पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराए। देहरादून जिला प्रशासन द्वारा किया गया यह कार्य मुख्यमंत्री की इसी सोच और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के समय में जब कई परिवार बीमारी और आर्थिक संकट से टूट जाते हैं, ऐसे में प्रशासन का इस प्रकार आगे आकर मदद करना बेहद सराहनीय कदम है। इससे लोगों का सरकार और प्रशासन पर विश्वास मजबूत होता है। सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों ने भी जिला प्रशासन की इस मानवीय पहल की प्रशंसा की है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां न केवल मरीज बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रभावित करती हैं। ऐसे समय में यदि प्रशासन और समाज सहयोग के लिए आगे आएं तो पीड़ित परिवारों को काफी राहत मिल सकती है। देहरादून जिला प्रशासन की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है।

जिला प्रशासन की यह कार्यशैली बताती है कि संवेदनशील प्रशासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव भी लाता है। संध्या रमोला और उनके परिवार के लिए यह सहायता किसी वरदान से कम नहीं है। आर्थिक संकट, बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे इस परिवार को अब राहत की सांस मिली है और उन्हें उम्मीद है कि उनके कठिन दिन जल्द खत्म होंगे।

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