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Reading: PM मोदी ने विदेशी यात्रा टैक्स को बताया फेक न्यूज़, कहा- “यह सरासर झूठ है, इसमें जरा भी सच्चाई नहीं”
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देशफीचर्ड

PM मोदी ने विदेशी यात्रा टैक्स को बताया फेक न्यूज़, कहा- “यह सरासर झूठ है, इसमें जरा भी सच्चाई नहीं”

The Hill India News
Last updated: May 16, 2026 2:45 am
The Hill India News
Published: May 16, 2026
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Image Credit: India Today
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नई दिल्ली: वैश्विक मंच पर पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में आ रहे उछाल के बीच भारतीय नागरिकों के विदेशी दौरों को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया हलकों में एक सनसनीखेज खबर तैर रही थी। दावा किया जा रहा था कि सरकार देश से बाहर जाने वाले नागरिकों की विदेश यात्रा पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ या टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है।

Contents
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पीएम मोदी का तीखा खंडनक्या था समाचार चैनल की रिपोर्ट का दावा?एक साल के लिए टैक्स लगाने और सीधे केंद्र के खाते में जाने की थी अफवाह‘ईज ऑफ लिविंग’ और नागरिकों की सुगमता सर्वोच्च प्राथमिकताजिम्मेदार पत्रकारिता और फेक न्यूज के दौर में सरकार की मुस्तैदी

इस संवेदनशील मुद्दे पर देश के नागरिकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बनता, उससे पहले ही खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाला। प्रधानमंत्री ने इन तमाम मीडिया रिपोर्ट्स और दावों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें पूरी तरह से मनगढ़ंत और भ्रामक करार दिया है। इस विदेश यात्रा टैक्स फेक न्यूज़ पीएम मोदी मामले का पूरी तरह पटाक्षेप करते हुए पीएम ने साफ कर दिया कि सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है और देशवासियों के वैश्विक आवागमन पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पीएम मोदी का तीखा खंडन

शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस भ्रामक खबर को प्रसारित करने वाले एक समाचार चैनल की रिपोर्ट को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर सीधे रीपोस्ट (रिट्वीट) किया। पीएम मोदी ने बेहद कड़े और स्पष्ट शब्दों में इस नैरेटिव को खारिज करते हुए देशवासियों को आश्वस्त किया।

प्रधानमंत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा:

“यह सरासर झूठ है। इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है। विदेशी यात्रा पर इस तरह के प्रतिबंध लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। हम अपने लोगों के लिए ‘व्यापार करने में आसानी’ (Ease of Doing Business) और ‘जीवन जीने में आसानी’ (Ease of Living) को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

प्रधानमंत्री के इस सीधे और त्वरित हस्तक्षेप के बाद इस पूरे मामले पर चल रही अटकलों पर पूर्णविराम लग गया। सरकार के मुखिया की ओर से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि देश की नीति नागरिकों की वैश्विक पहुंच को सुगम बनाने की है, न कि उसे किसी भी तरह से हतोत्साहित करने की।


क्या था समाचार चैनल की रिपोर्ट का दावा?

दरअसल, यह पूरा विवाद एक प्रतिष्ठित समाचार चैनल की उस रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें सरकार के भीतर एक कथित उच्च स्तरीय प्रस्ताव पर चर्चा होने का दावा किया गया था। इस रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे भारत की आयात लागत (इम्पोर्ट कॉस्ट) में भारी इजाफा हो रहा है।

रिपोर्ट में तर्क दिया गया था कि इस युद्ध जनित आर्थिक दबाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को संभालने के लिए सरकार एक ‘अस्थायी उपाय’ के रूप में विदेश यात्राओं पर अतिरिक्त टैक्स, सेस (उपकर) या सरचार्ज लगाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।


एक साल के लिए टैक्स लगाने और सीधे केंद्र के खाते में जाने की थी अफवाह

प्रसारित रिपोर्ट में इस तथाकथित प्रस्ताव की बारीकियों का दावा करते हुए यहां तक कह दिया गया था कि यह विशेष टैक्स या प्रतिबंध शुरुआती तौर पर केवल एक साल की अवधि के लिए लागू किया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस टैक्स के माध्यम से जो भी अतिरिक्त राजस्व या धनराशि एकत्रित होती, वह सीधे केंद्र सरकार के समेकित खाते में ट्रांसफर की जाती, ताकि कच्चे तेल के आयात से पैदा होने वाले राजकोषीय घाटे की भरपाई की जा सके।

दिलचस्प बात यह है कि जब यह रिपोर्ट तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थी, तब केंद्रीय वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की ओर से इस पर कोई तुरंत आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया था। मंत्रालय की इसी चुप्पी का फायदा उठाकर कई प्लेटफॉर्म्स पर इसे सच मानकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिससे पर्यटन, विमानन (एविएशन) और कॉर्पोरेट जगत में चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। लेकिन मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पीएम मोदी ने खुद सामने आकर इस प्रोपेगैंडा को ध्वस्त कर दिया।


‘ईज ऑफ लिविंग’ और नागरिकों की सुगमता सर्वोच्च प्राथमिकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने खंडन में जिन दो प्रमुख सिद्धांतों का जिक्र किया— ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’— वे वर्तमान सरकार की आर्थिक नीतियों के मुख्य स्तंभ रहे हैं। नीतिगत विश्लेषकों का मानना है कि भारत इस समय वैश्विक पर्यटन और व्यापार का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। भारतीय नागरिक न केवल पर्यटन के लिए बल्कि शिक्षा, रोजगार और बहुराष्ट्रीय व्यापार के सिलसिले में बड़े पैमाने पर विदेशों की यात्रा करते हैं।

ऐसे में किसी भी तरह का ‘विदेशी यात्रा टैक्स’ या अतिरिक्त आर्थिक प्रतिबंध भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकता था। पीएम मोदी ने यह साफ कर दिया कि वैश्विक मोर्चे पर चाहे आर्थिक दबाव कितना भी क्यों न हो, सरकार उसका बोझ अपने नागरिकों की दैनिक जीवन की सुगमता (Ease of Living) पर नहीं आने देगी।


जिम्मेदार पत्रकारिता और फेक न्यूज के दौर में सरकार की मुस्तैदी

इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि संवेदनशील आर्थिक और नीतिगत मामलों में बिना आधिकारिक पुष्टि के चलाई जाने वाली खबरें बाजार और जनता में कितना भ्रम पैदा कर सकती हैं। हालांकि, इस मामले में पीएम मोदी की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बड़े पैनिक (अफरा-तफरी) को होने से रोक लिया।

विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों और ट्रैवल एसोसिएशनों ने भी प्रधानमंत्री के इस रुख का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इस स्पष्टीकरण से पर्यटन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के कारोबार ने राहत की सांस ली है, क्योंकि टैक्स की अफवाहों के कारण कई अंतरराष्ट्रीय बुकिंग्स और व्यावसायिक दौरों पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। अब यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और यह रिपोर्ट महज एक मनगढ़ंत दावा थी।

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TAGGED:ease of doing business India.Finance Ministry foreign travel proposalforeign travel tax cess rumourPM Modi x post rebuttalWest Asia crisis crude oil
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