
टिहरी गढ़वाल: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसूनी दस्तक से पहले ही आसमानी आफत ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। टिहरी गढ़वाल जिले के सुप्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र धनोल्टी में शुक्रवार दोपहर बाद मौसम का मिजाज अचानक इस कदर बदला कि कुछ ही मिनटों की मूसलाधार बारिश ने पूरे इलाके को अपनी जद में ले लिया। भारी बारिश के चलते पहाड़ों से आए मलबे और पानी के सैलाब ने न केवल स्थानीय जनजीवन को अस्त-व्यस्त किया, बल्कि वीआईपी सुरक्षा और राज्य के यातायात तंत्र की भी परीक्षा ले ली।
इस मूसलाधार आफत के कारण धनोल्टी भारी बारिश हाईवे जाम की स्थिति पैदा हो गई, जिससे क्षेत्र का मुख्य नगुण-भवान-देहरादून स्टेट हाईवे पूरी तरह से मलबे के ढेर में तब्दील हो गया। इस चक्काजाम और मलबे के सैलाब के बीच उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी और धनोल्टी के क्षेत्रीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार का काफिला भी फंस गया। शासन और प्रशासन के शीर्ष जनप्रतिनिधियों को एक घंटे से भी अधिक समय तक बीच सड़क पर पानी और मलबे के साफ होने का इंतजार करना पड़ा।
दोपहर बाद अचानक बदला मौसम, उफनी अलगाड़ नदी
स्थानीय प्रशासन और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, धनोल्टी तहसील के अंतर्गत आने वाले नौघर गांव और उसके आसपास के पहाड़ी ढलानों पर दोपहर बाद अचानक घने काले बादल छा गए। देखते ही देखते करीब 3 से 4 बजे के बीच क्षेत्र में बादलों के फटने जैसी भीषण और तेज बारिश शुरू हो गई। इस अचानक हुई मूसलाधार बारिश का सीधा असर पहाड़ों से बहने वाले जलस्रोतों पर पड़ा, जिसके चलते क्षेत्र की प्रमुख अलगाड़ नदी का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया।
नदी और बरसाती नालों के उफान पर आने से पहाड़ी का ऊपरी हिस्सा तेजी से दरक गया और भारी मात्रा में बोल्डर (बड़े पत्थर) तथा कीचड़युक्त मलबा नीचे स्थित मैदानी और बाजार क्षेत्रों की तरफ बहने लगा।
बिलौंदी पुल बाजार में घुसा मलबा, दुकानों और घरों में भारी नुकसान
पहाड़ से नीचे उतरे इस मलबे के सैलाब ने सबसे ज्यादा तबाही बिलौंदी पुल बाजार में मचाई। जब तक स्थानीय व्यापारी और ग्रामीण कुछ समझ पाते, तब तक मलबे का एक बड़ा हिस्सा दुकानों और रिहायशी मकानों के भीतर तक दाखिल हो गया।
घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे राजस्व उपनिरीक्षक अंबुज चौधरी ने स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि दोपहर बाद करीब 3-4 बजे के बीच क्षेत्र में जो अप्रत्याशित रूप से तेज बारिश हुई, उसने जलभराव की स्थिति पैदा कर दी। कीचड़ और मलबे से सराबोर पानी दुकानों के शटर तोड़ते हुए अंदर घुस गया, जिससे व्यापारियों का राशन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य कीमती सामग्रियां पूरी तरह खराब हो गईं। क्षेत्र के उपजिलाधिकारी (SDM) नीलू चावला ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बिलोदी के पास करीब 10 से अधिक दुकानों और घरों में पानी और भारी मलबा घुसा है, जिससे भारी नुकसान की आशंका है।
हाईवे पर थमी रफ्तार: मलबे के बीच फंसे रहे सूबे के मंत्री और विधायक
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे बड़ा असर नगुण-भवान-देहरादून स्टेट हाईवे पर देखने को मिला। बिलौंदी पुल के पास सड़क पर कई फीट ऊपर तक मलबे का पहाड़ जमा हो गया, जिससे मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसी दौरान, उत्तरकाशी जिले का अपना आधिकारिक दौरा संपन्न कर प्रांतीय राजधानी देहरादून की ओर लौट रहे प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भरत सिंह चौधरी का काफिला भी वहां पहुंच गया। उनके साथ धनोल्टी के स्थानीय विधायक प्रीतम सिंह पंवार की गाड़ियां भी थीं।
सड़क मार्ग पर यातायात पूरी तरह अवरुद्ध होने के कारण मंत्री और विधायक की गाड़ियां मलबे के ठीक सामने फंस गईं। सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बावजूद, प्रकृति के इस प्रकोप के आगे किसी की एक न चली। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए काफिले को वहीं रोकना पड़ा। कैबिनेट मंत्री और विधायक को मलबे के बीच करीब एक घंटे से भी अधिक समय तक अपनी गाड़ियों में ही बैठकर इंतजार करना पड़ा, जो पहाड़ी रास्तों पर सफर की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
जेसीबी मशीनों ने संभाला मोर्चा, युद्धस्तर पर खुला रास्ता
जैसे ही तहसील प्रशासन और पुलिस को इस बात की भनक लगी कि हाईवे पर आम जनता के साथ-साथ सूबे के कैबिनेट मंत्री और विधायक भी फंसे हुए हैं, प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। उपजिलाधिकारी के निर्देश पर लोनिवि (NH/PWD) और आपदा प्रबंधन की टीमों को तत्काल सक्रिय किया गया।
बिना समय गंवाए भारी-भरकम जेसीबी (JCB) मशीनों को प्रभावित स्थल के लिए रवाना किया गया। भारी बारिश और लगातार गिरते पत्थरों के बीच लोक निर्माण विभाग के ऑपरेटरों ने जान जोखिम में डालकर हाईवे से बोल्डर और कीचड़ हटाने का काम शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत और युद्धस्तर पर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सड़क के एक हिस्से से मलबा साफ किया जा सका, जिसके बाद सबसे पहले माननीय मंत्रियों और आपातकालीन वाहनों के काफिले को सुरक्षित रूप से देहरादून के लिए रवाना किया गया।
पहाड़ों में सफर करने वालों के लिए प्रशासन की गाइडलाइन
इस घटना के बाद टिहरी और धनोल्टी तहसील प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। उपजिलाधिकारी नीलू चावला ने राजस्व और आपदा प्रबंधन की टीमों को चौबीसों घंटे संवेदनशील पॉइंट्स पर तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, मौसम विभाग के लगातार आ रहे पूर्वानुमानों को देखते हुए पहाड़ों में सफर करने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए भी विशेष हिदायत जारी की गई है:
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शाम के समय सफर से बचें: पहाड़ी रास्तों पर दोपहर बाद या शाम के समय अचानक मौसम बदलने की संभावनाएं अधिक होती हैं, इसलिए लंबी दूरी की यात्रा सुबह के वक्त ही तय करें।
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लैंडस्लाइड जोन में न रुकें: हाईवे पर यात्रा के दौरान जहां भी ‘पहाड़ी से पत्थर गिरने का भय’ वाले साइनबोर्ड लगे हों, वहां गाड़ियां खड़ी न करें।
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स्थानीय अपडेट्स का ध्यान रखें: यात्रा शुरू करने से पहले जिला आपदा प्रबंधन तंत्र या स्थानीय पुलिस के सोशल मीडिया हैंडल से रास्तों की स्थिति की जानकारी जरूर लें।
धनोल्टी में आई इस अचानक आफत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उत्तराखंड के पहाड़ी संजाल में मौसम का मिजाज कितनी तेजी से बदलता है। फिलहाल, नगुण-भवान-देहरादून मार्ग पर यातायात को सुचारू कर दिया गया है, लेकिन प्रभावित दुकानदारों और ग्रामीणों के चेहरे पर अब भी आसमान की तरफ देखते हुए चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।



