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पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर सियासत तेज, विपक्ष का हमला और सरकार का बचाव

The Hill India News
Last updated: May 15, 2026 7:14 am
The Hill India News
Published: May 15, 2026
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मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारत में भी साफ दिखाई देने लगा है। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर जनता से “वसूली” करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार और उसके समर्थकों का कहना है कि वैश्विक संकट के मुकाबले भारत में बहुत कम कीमतें बढ़ाई गई हैं। इस मुद्दे पर आम लोगों की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई नजर आ रही हैं। कुछ लोग इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं, तो कुछ इसे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण जरूरी कदम मान रहे हैं।

15 मई की सुबह तेल कंपनियों ने नई कीमतें जारी कीं, जिसके बाद दिल्ली समेत देश के कई शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गए। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 3.14 रुपये प्रति लीटर महंगा होकर 97.77 रुपये पहुंच गया, जबकि डीजल 3.11 रुपये बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया। इसके अलावा सीएनजी की कीमतों में भी 2 रुपये प्रति किलोग्राम तक की वृद्धि की गई, जिससे दिल्ली में सीएनजी का नया रेट 79.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है।

कीमतों में इस बढ़ोतरी के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर “महंगाई की मार” बताते हुए कहा कि इससे आम आदमी की मुश्किलें और बढ़ेंगी। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने जनता को राहत देने के बजाय टैक्स के जरिए भारी कमाई की। उन्होंने कहा कि अब चुनाव खत्म होते ही सरकार ने फिर से जनता पर बोझ डालना शुरू कर दिया है।

कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर भी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि “महंगाई मैन ने जनता पर फिर हंटर चलाया है।” पार्टी ने दावा किया कि पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी की कीमतें बढ़ने से परिवहन खर्च बढ़ेगा और इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई देगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इससे महंगाई और तेज होगी तथा आर्थिक विकास दर पर भी असर पड़ सकता है।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव  ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साइकिल चलाते हुए अपना एक स्केच साझा किया और लिखा, “हमने तो पहले ही कहा था कि साइकिल से बेहतर कुछ नहीं।” उनके इस पोस्ट को राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और साथ ही अपनी पार्टी के चुनाव चिन्ह का प्रचार भी किया।

दूसरी ओर, सरकार के समर्थकों और भाजपा नेताओं ने इस फैसले का बचाव किया है। उनका कहना है कि पूरी दुनिया इस समय ऊर्जा संकट से जूझ रही है। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारत पर भी दबाव बढ़ा है। ऐसे में सीमित बढ़ोतरी करके सरकार ने जनता पर कम से कम बोझ डालने की कोशिश की है।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दीलीप घोष ने कहा कि वैश्विक युद्ध जैसे हालात और तेल संकट के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में ईंधन की कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं, जबकि भारत में वृद्धि सीमित रखी गई है। उनके अनुसार सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित फैसला लिया है।

इस बीच आम जनता की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कई लोगों ने माना कि कीमतें बढ़ने से उनकी जेब पर असर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। टैक्सी चालकों, डिलीवरी एजेंटों और छोटे व्यापारियों को सबसे ज्यादा चिंता सता रही है, क्योंकि ईंधन महंगा होने से उनकी लागत बढ़ जाएगी। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खाने-पीने की चीजों से लेकर परिवहन और रोजमर्रा के हर सामान की कीमत पर पड़ता है।

हालांकि कुछ उपभोक्ताओं ने सरकार के फैसले को सही भी ठहराया। एक उपभोक्ता ने कहा कि पूरी दुनिया में पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर संकट बना हुआ है और ऐसी स्थिति में भारत में केवल तीन रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जो अपेक्षाकृत कम है। उनका कहना था कि लोग पहले से ही इस बढ़ोतरी के लिए मानसिक रूप से तैयार थे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात और बिगड़ते हैं तो आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक संकट को देखते हुए सरकार का समर्थन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है और वहां तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कीमतों में कुछ बढ़ोतरी स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक विरोध के बजाय अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को भी समझना जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में बाजार पर दिखाई देगा। परिवहन लागत बढ़ने से फल, सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। साथ ही, उद्योगों की लागत बढ़ने से महंगाई दर पर दबाव पड़ने की संभावना है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो सरकार के सामने कीमतों को नियंत्रित रखना बड़ी चुनौती बन सकती है।

फिलहाल पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष इसे जनता पर आर्थिक बोझ बता रहा है, जबकि सरकार इसे वैश्विक परिस्थितियों में आवश्यक कदम करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर चर्चा का बड़ा विषय बना रह सकता है।

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