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Reading: 12वीं में सप्लीमेंट्री आने पर छात्र ने दी जान, सदमे में दादी की भी मौत, 24 घंटे में उजड़ गया परिवार
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12वीं में सप्लीमेंट्री आने पर छात्र ने दी जान, सदमे में दादी की भी मौत, 24 घंटे में उजड़ गया परिवार

The Hill India News
Last updated: May 15, 2026 6:35 am
The Hill India News
Published: May 15, 2026
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शिवपुरी से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। सीबीएसई 12वीं परीक्षा के परिणाम ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सप्लीमेंट्री आने से परेशान एक 18 वर्षीय छात्र ने आत्महत्या कर ली, जबकि अपने पोते की मौत का सदमा उसकी दादी सहन नहीं कर सकीं और अगले ही दिन हार्ट अटैक से उनका भी निधन हो गया। महज 24 घंटे के भीतर एक ही घर से दो अर्थियां उठने से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना शिवपुरी के देहात थाना क्षेत्र स्थित छोटे लुहारपुरा इलाके की है। यहां रहने वाला आर्यमन सिंह सिसोदिया सीबीएसई बोर्ड से 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। हाल ही में घोषित हुए परीक्षा परिणाम में उसे सप्लीमेंट्री मिली थी। रिजल्ट देखने के बाद वह गहरे तनाव में चला गया। परिवार के लोगों ने उसे समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वह इस बात को दिल से लगा बैठा। बताया जा रहा है कि आर्यमन पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था और अच्छे अंकों की उम्मीद कर रहा था। ऐसे में सप्लीमेंट्री आने से वह खुद को असफल मानने लगा।

बुधवार को जब परिवार के सदस्य अपने काम में व्यस्त थे, तभी आर्यमन ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। काफी देर तक कमरे से बाहर नहीं आने पर परिजनों को शक हुआ। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए। आर्यमन का शव फंदे से लटका हुआ था। इसके बाद घर में चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

आर्यमन परिवार का इकलौता पोता बताया जा रहा है। उसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। सबसे ज्यादा सदमा उसकी दादी को लगा। पोते की मौत के बाद वह पूरी तरह टूट गई थीं। परिवार वालों के अनुसार, आर्यमन की मौत की खबर सुनने के बाद उन्होंने ठीक से बात करना भी बंद कर दिया था। वह लगातार रो रही थीं और बार-बार अपने पोते को याद कर बेहोश हो जा रही थीं।

गुरुवार को अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर परिवार वाले उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। डॉक्टरों ने उनकी मौत की वजह हार्ट अटैक बताई। इस तरह पोते की मौत के महज एक दिन बाद दादी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। एक ही परिवार में लगातार दो मौतों ने पूरे मोहल्ले और शहर को गहरे सदमे में डाल दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सिसोदिया परिवार बेहद सामान्य और मिलनसार था। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि परीक्षा के परिणाम की वजह से इतना बड़ा हादसा हो जाएगा। पड़ोसियों के अनुसार, आर्यमन शांत स्वभाव का लड़का था और अपने परिवार से बेहद जुड़ा हुआ था। उसकी मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सभी की आंखें नम थीं।

यह घटना एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और परीक्षा के तनाव को सामने लाती है। आज के समय में कई छात्र परीक्षा के परिणाम को ही जीवन का अंतिम सच मान लेते हैं। अच्छे अंक न आने या सप्लीमेंट्री लगने पर वे खुद को असफल समझ बैठते हैं। जबकि हकीकत यह है कि परीक्षा जिंदगी का सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा है। असफलता या कम अंक किसी इंसान की क्षमता तय नहीं करते।

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों पर पढ़ाई और रिजल्ट को लेकर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ खुलकर बात करें और उन्हें यह एहसास दिलाएं कि किसी भी परीक्षा से बड़ी उनकी जिंदगी है। अगर कोई बच्चा तनाव में दिखाई दे तो उसकी भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है। कई बार बच्चे अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं और अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पाते।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, परीक्षा परिणाम आने के बाद अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इस समय बच्चों को डांटने या तुलना करने की बजाय उनका हौसला बढ़ाना चाहिए। सप्लीमेंट्री या फेल होना अंत नहीं है। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर दोबारा सफलता हासिल की जा सकती है।

शिवपुरी की यह घटना हर छात्र, अभिभावक और समाज के लिए एक बड़ा संदेश छोड़ गई है। एक पल के गलत फैसले ने न केवल एक युवा जिंदगी खत्म कर दी, बल्कि पूरे परिवार को बिखेर कर रख दिया। जरूरत इस बात की है कि बच्चों को यह समझाया जाए कि जिंदगी किसी भी परीक्षा से कहीं ज्यादा कीमती है और हर मुश्किल का हल बातचीत, धैर्य और हिम्मत से निकाला जा सकता है।

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