
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में वर्षवार नर्सिंग भर्ती की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब आत्मघाती मोड़ पर पहुँच गया है। परेड ग्राउंड स्थित पानी की टंकी पर चढ़ीं उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने मंगलवार शाम खुद पर पेट्रोल छिड़क कर हड़कंप मचा दिया। करीब 40 घंटे से ज्यादा समय से तीन नर्सिंग बेरोजगारों के साथ टंकी पर डटी रौतेला के इस कदम के बाद प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। वहीं, नीचे धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने सर्वे चौक की ओर जाने वाली सड़क पर जाम लगाकर सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।
टंकी पर ‘इंकलाब’ और नीचे चक्काजाम
सोमवार सुबह से शुरू हुआ यह ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ मंगलवार शाम तक बेहद तनावपूर्ण स्थिति में तब्दील हो गया। नर्सिंग बेरोजगार पिछले 159 दिनों से अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार की बेरुखी ने उन्हें उग्र कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। 12 मई, जिसे दुनिया ‘अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस’ के रूप में मना रही है, उसी दिन उत्तराखंड की भावी नर्सें अपनी सुध लेने के लिए सरकार की राह देख रही थीं।
ज्योति रौतेला द्वारा खुद पर पेट्रोल छिड़कने की खबर जैसे ही नीचे पहुंची, प्रदर्शनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा। नर्सिंग एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने दून क्लब के सामने सड़क पर बैठकर यातायात पूरी तरह ठप कर दिया। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं, लेकिन प्रदर्शनकारी किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
नर्सिंग कर्मचारियों के समर्थन में पिछले 40 घंटे से परेड ग्राउंड स्थित पानी की टँकी में चढ़ी ज्योति रौतेला ने अपने ऊपर पेट्रोल छिड़क दिया है। उन्होंने ये कदम भाजपा सरकार की अकर्मण्यता और अहंकार को देखते हुए उठाया है। पिछले 40 घन्टो से सरकार का कोई नुमाइंदा यहां मिलने नहीं आया है।… pic.twitter.com/MVR8EgqO0e
— Jyoti Rautela (@JyotiRautela11) May 12, 2026
159 दिनों का सब्र और सरकार की खामोशी
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष नवल पुंडीर ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि 159 दिनों से चल रहे आंदोलन के बावजूद शासन-प्रशासन के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। पुंडीर ने कहा, “हमारी प्रदेश अध्यक्ष और साथी 40 घंटों से बिना खाए-पिए टंकी पर हैं। आज शाम जो हुआ, उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस पर नर्सों का सम्मान करने के बजाय उन्हें मौत के मुंह में धकेला जा रहा है।”
आंदोलनकारी पूजा ने भावुक होते हुए कहा कि ज्योति रौतेला के आत्मघाती कदम ने सभी बेरोजगारों के भीतर के गुस्से को जगा दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी अनहोनी की स्थिति पैदा होती है, तो क्या मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगे?
वर्षवार नियुक्ति की मांग पर अड़ा ‘नर्सिंग एकता मंच’
नर्सिंग बेरोजगारों की मुख्य मांग है कि प्रदेश में नर्सिंग अधिकारियों के पदों पर ‘वर्षवार योग्यता’ (Seniority-based) के आधार पर तत्काल नियुक्तियां की जाएं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि लंबे समय से रिक्त पदों के बावजूद सरकार प्रक्रिया में जानबूझकर देरी कर रही है। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे अब आश्वासनों से थक चुके हैं और उन्हें ठोस सरकारी आदेश चाहिए।
सियासी गलियारों में हलचल और प्रशासनिक चुनौती
ज्योति रौतेला की इस कार्रवाई ने मामले को राजनीतिक रूप से भी गरमा दिया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए इसे ‘अलोकतांत्रिक और क्रूर’ व्यवहार करार दिया है। दूसरी ओर, प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल टंकी पर चढ़े लोगों को सुरक्षित नीचे उतारना है। स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य मंत्री के धरना स्थल पर न पहुँचने के कारण प्रदर्शनकारियों में भारी नाराजगी है।
रात गहराने के साथ ही सर्वे चौक और परेड ग्राउंड इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीमें भी मौके पर मुस्तैद हैं, लेकिन टंकी की ऊंचाई और प्रदर्शनकारियों के हाथ में ज्वलनशील पदार्थ होने के कारण कोई भी ऑपरेशन जोखिम भरा बना हुआ है।



