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सनातन टिप्पणी पर फिर गरमाई तमिलनाडु की राजनीति, विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन के बयान से मचा बवाल

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर ‘सनातन’ शब्द को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता और विधानसभा में विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा के भीतर ऐसा बयान दिया, जिसने राज्य ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। उदयनिधि स्टालिन ने सदन में कहा कि “सनातनम, जो लोगों को बांटता है, उसे खत्म होना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद भाजपा समेत कई संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे करोड़ों लोगों की आस्था पर हमला बताया है।

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तमिलनाडु विधानसभा का सत्र चल रहा था और सदन में मुख्यमंत्री विजय  भी मौजूद थे। राजनीतिक हलकों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री विजय की मौजूदगी में दिए गए इस बयान का आने वाले समय में राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा।

उदयनिधि स्टालिन ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि समाज में समानता और सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए उन व्यवस्थाओं को समाप्त करना जरूरी है, जो लोगों को जाति, धर्म और ऊंच-नीच के आधार पर बांटती हैं। उन्होंने ‘सनातन’ को इसी संदर्भ में जोड़ते हुए अपनी बात रखी। हालांकि उनके बयान को लेकर तुरंत विवाद शुरू हो गया और विपक्षी दलों ने इसे हिंदू धर्म के खिलाफ टिप्पणी बताया।

भाजपा ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्तासी. आर. केसवन ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन बार-बार विभाजनकारी और भड़काऊ बयान देते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि DMK नेताओं की राजनीति धार्मिक भावनाओं को आहत करने पर आधारित है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सनातन धर्म भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा है और इस तरह की टिप्पणियां करोड़ों लोगों की आस्था का अपमान हैं।

दरअसल, यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया हो। वर्ष 2023 में भी उन्होंने एक कार्यक्रम में सनातन धर्म की तुलना ऐसी चीजों से की थी जिन्हें “खत्म” कर देना चाहिए। उस समय भी देशभर में भारी विवाद हुआ था। कई राज्यों में उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई थीं और मामला अदालत तक पहुंचा था। हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय  की मदुरै बेंच ने भी इस मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान टिप्पणी की थी कि उनके बयान को ‘हेट स्पीच’ के रूप में देखा जा सकता है।

हालांकि विधानसभा में अपने भाषण के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने राजनीतिक मर्यादा और सहयोग की बात भी की। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष को राज्य के विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सरकार के साथ रचनात्मक सहयोग की इच्छा जताई और कहा कि जनता के हितों को राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।

उदयनिधि स्टालिन ने इस दौरान शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ बजाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के राज्य गीत और क्षेत्रीय पहचान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके इस बयान पर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। भाजपा और कुछ अन्य दलों ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया है, जबकि DMK समर्थकों का कहना है कि यह केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान की बात है।

गौरतलब है कि हाल ही में हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में DMK को करारी हार का सामना करना पड़ा था। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम ने बड़ी जीत दर्ज कर सरकार बनाई। इसके बाद से राज्य की राजनीति में नया समीकरण देखने को मिल रहा है। DMK अब विपक्ष की भूमिका में है और उदयनिधि स्टालिन पार्टी के प्रमुख आक्रामक चेहरों में गिने जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सनातन को लेकर दिया गया यह बयान आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक ध्रुवीकृत कर सकता है। एक तरफ DMK सामाजिक न्याय और द्रविड़ विचारधारा के मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इसे हिंदू आस्था और परंपरा से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गई है। ऐसे में यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि आने वाले समय में राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में इसकी गूंज सुनाई दे सकती है।

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