
पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। राजनीतिक गलियारों में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है शुभेंदु अधिकारी। भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी को हराने के बाद शुभेंदु का कद पार्टी में और भी बढ़ गया है। इससे पहले 2021 में नंदीग्राम में भी उन्होंने ममता बनर्जी को कड़ी चुनौती देकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी। ऐसे में अब माना जा रहा है कि बीजेपी आलाकमान बंगाल की कमान शुभेंदु अधिकारी को सौंप सकता है।
हालांकि मुख्यमंत्री के नाम से ज्यादा चर्चा इस बात की भी हो रही है कि क्या बीजेपी पश्चिम बंगाल में भी “दो डिप्टी सीएम” वाला फॉर्मूला लागू करेगी। पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी ने जिन राज्यों में सरकार बनाई है, वहां सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और बिहार में यह रणनीति अपनाई जा चुकी है। ऐसे में बंगाल में भी इसी मॉडल को लागू करने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कहा था कि बंगाल का मुख्यमंत्री ऐसा व्यक्ति होगा जो बंगाल की मिट्टी से जुड़ा हो, बंगाली बोलता हो और राज्य की संस्कृति को समझता हो। इस बयान के बाद से ही शुभेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा था। अब जब बीजेपी को प्रचंड बहुमत मिला है तो पार्टी नेतृत्व भी ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है जो संगठन और सरकार दोनों को मजबूती से संभाल सके।
बताया जा रहा है कि विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। अमित शाह पर्यवेक्षक के रूप में कोलकाता पहुंच चुके हैं, जबकि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सह-पर्यवेक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। बैठक के बाद बीजेपी विधायक दल अपना नेता चुनेगा और उसके तुरंत बाद नए मुख्यमंत्री का ऐलान कर दिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल जैसे जटिल और विविध सामाजिक समीकरण वाले राज्य में बीजेपी केवल मुख्यमंत्री के भरोसे सत्ता नहीं चलाना चाहेगी। पार्टी की कोशिश होगी कि अलग-अलग क्षेत्रों, जातीय समूहों और महिला प्रतिनिधित्व को संतुलित किया जाए। यही वजह है कि दो डिप्टी सीएम वाला फॉर्मूला चर्चा में है।
अगर ऐसा होता है तो मुख्यमंत्री के साथ दो ऐसे नेताओं को मौका दिया जा सकता है जो संगठन और जनाधार दोनों के लिहाज से मजबूत हों। इस सूची में सबसे पहला नाम दिलीप घोष का माना जा रहा है। दिलीप घोष लंबे समय तक बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने ही राज्य में बीजेपी को मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित किया था। 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 77 सीटें दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही थी। इस बार भी उन्होंने खड़गपुर सदर सीट से शानदार जीत हासिल की है। संगठन पर मजबूत पकड़ और कार्यकर्ताओं में लोकप्रियता उन्हें डिप्टी सीएम पद का मजबूत दावेदार बनाती है।
दूसरा बड़ा नाम अग्निमित्रा पॉल का सामने आ रहा है। पेशे से फैशन डिजाइनर रहीं अग्निमित्रा पॉल ने राजनीति में अपनी बेबाक शैली और आक्रामक तेवरों से खास पहचान बनाई है। आसनसोल दक्षिण सीट से जीत दर्ज करने के बाद उनका कद और बढ़ा है। बीजेपी अगर महिला नेतृत्व को प्रमुखता देना चाहती है तो अग्निमित्रा पॉल को डिप्टी सीएम बनाकर बड़ा संदेश दे सकती है। पार्टी के अंदर भी उन्हें युवा और आक्रामक चेहरा माना जाता है।
इसके अलावा अभिनेत्री से नेता बनीं रूपा गांगुली का नाम भी चर्चा में है। महाभारत में द्रौपदी की भूमिका निभाकर घर-घर में मशहूर हुईं रूपा गांगुली लंबे समय से बीजेपी से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने लगातार ममता सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है और महिला वोटरों के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। इस चुनाव में उन्होंने सोनारपुर दक्षिण सीट से बड़ी जीत दर्ज की है। अगर बीजेपी महिला प्रतिनिधित्व को और मजबूत करना चाहती है तो रूपा गांगुली भी डिप्टी सीएम की रेस में आगे हो सकती हैं।
समीक भट्टाचार्य का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल है। वर्तमान में वह बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष हैं और संगठनात्मक स्तर पर काफी प्रभावशाली माने जाते हैं। हालांकि उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन चर्चा है कि अगर शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर सीट अपने पास रखते हैं और नंदीग्राम सीट छोड़ते हैं तो समीक भट्टाचार्य वहां से चुनाव लड़ सकते हैं। जीत के बाद उन्हें सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है।
बीजेपी का पूरा फोकस इस समय बंगाल में लंबे समय तक मजबूत सरकार चलाने पर है। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां संगठन को जमीनी स्तर पर लगातार मजबूत बनाए रखना भी जरूरी है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के जरिए पार्टी सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बीजेपी बंगाल में दो डिप्टी सीएम नियुक्त करती है तो उसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों और वर्गों को प्रतिनिधित्व दे पाएगी। एक डिप्टी सीएम महिला चेहरा हो सकता है, जबकि दूसरा संगठन से जुड़ा अनुभवी नेता। इससे सरकार और संगठन दोनों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।
अब सबकी नजर विधायक दल की बैठक पर टिकी हुई है। बंगाल की राजनीति में यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार बीजेपी राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। अगर शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह उनके राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा मुकाम होगा। वहीं दो डिप्टी सीएम का फार्मूला लागू होने पर बंगाल की राजनीति में बीजेपी एक नया प्रयोग करती नजर आएगी।
फिलहाल राज्य की जनता और राजनीतिक गलियारे दोनों ही इस बड़े ऐलान का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कुछ घंटों में यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता किसके हाथों में जाएगी और बीजेपी राज्य में किस रणनीति के साथ नई सरकार चलाने वाली है।



