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Reading: हनीमून मर्डर केस में फिर बढ़ीं सोनम रघुवंशी की मुश्किलें, जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंची मेघालय सरकार
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हनीमून मर्डर केस में फिर बढ़ीं सोनम रघुवंशी की मुश्किलें, जमानत रद्द कराने हाईकोर्ट पहुंची मेघालय सरकार

The Hill India News
Last updated: May 6, 2026 4:57 am
The Hill India News
Published: May 6, 2026
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मध्य प्रदेश के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत अब एक बार फिर कानूनी विवादों के घेरे में आ गई है। पति की हत्या के आरोप में करीब दस महीने जेल में रहने के बाद हाल ही में जमानत पर बाहर आई सोनम के खिलाफ मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सरकार ने अदालत में याचिका दायर कर निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की है। मेघालय सरकार का कहना है कि सोनम को जमानत पर छोड़ना जांच और ट्रायल दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वह गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं और मामले के सबूतों पर असर डालने की कोशिश कर सकती हैं।

Contents
क्या फिर जेल जाएंगी सोनम रघुवंशी?निचली अदालत ने किन आधारों पर दी थी जमानत?सरकार ने क्यों बताया जमानत को गलत?दस महीने बाद मिली थी राहतक्या हैं अदालत की शर्तें?कैसे हुआ था राजा रघुवंशी हत्याकांड?12 मई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

यह मामला पिछले साल देशभर में चर्चा का केंद्र बना था, जब इंदौर के कारोबारी राजा रघुवंशी की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई थी। राजा अपनी पत्नी सोनम रघुवंशी के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद उनका शव गहरी खाई में मिला। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। पुलिस जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ और पत्नी सोनम सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

अब जब सोनम को जमानत मिली है और वह जेल से बाहर आई हैं, तब मेघालय सरकार ने इस फैसले को चुनौती देकर नया कानूनी मोर्चा खोल दिया है। हाईकोर्ट ने मामले पर संज्ञान लेते हुए सोनम रघुवंशी को नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई 12 मई को तय की गई है।

क्या फिर जेल जाएंगी सोनम रघुवंशी?

मेघालय सरकार की याचिका के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सोनम रघुवंशी को फिर से जेल जाना पड़ सकता है। सरकार का तर्क है कि निचली अदालत ने जमानत देते समय कई महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। सरकार ने अदालत में कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई थी, यह दावा पूरी तरह तथ्यात्मक रूप से गलत है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि सोनम को उनके खिलाफ लगे आरोपों और गिरफ्तारी की वजह की जानकारी दी गई थी। ऐसे में निचली अदालत द्वारा इस आधार पर जमानत देना न्यायिक प्रक्रिया की गंभीर त्रुटि माना जाना चाहिए।

सरकार ने यह भी कहा कि इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और आरोप तय हो चुके हैं। इसलिए यह कहना कि आरोपी को मामले की जानकारी नहीं थी, तर्कसंगत नहीं माना जा सकता।

निचली अदालत ने किन आधारों पर दी थी जमानत?

27 अप्रैल को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डी.आर. खारबतेंग की अदालत ने सोनम रघुवंशी को जमानत दी थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि उसे किन धाराओं में गिरफ्तार किया जा रहा है।

कोर्ट ने माना कि यह संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है। भारतीय संविधान का यह अनुच्छेद हर गिरफ्तार व्यक्ति को यह अधिकार देता है कि उसे गिरफ्तारी के कारणों की स्पष्ट जानकारी दी जाए ताकि वह अपना कानूनी बचाव तैयार कर सके।

सोनम के वकीलों ने अदालत में दलील दी थी कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में कई कमियां थीं। “ग्राउंड ऑफ अरेस्ट” यानी गिरफ्तारी के आधार स्पष्ट नहीं बताए गए थे। इसके अलावा किन धाराओं में मामला दर्ज हुआ, उसकी भी उचित जानकारी आरोपी को नहीं दी गई थी।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि सोनम लंबे समय से जेल में बंद थीं जबकि ट्रायल बेहद धीमी गति से चल रहा था। मामले में करीब 90 गवाह हैं लेकिन अब तक सिर्फ 4 गवाहों की ही गवाही हो पाई थी। ऐसे में बिना ट्रायल के आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ माना जाना चाहिए।

सरकार ने क्यों बताया जमानत को गलत?

मेघालय सरकार ने हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि निचली अदालत ने केस की गंभीरता को नजरअंदाज किया। सरकार के अनुसार, हत्या जैसा गंभीर अपराध होने के बावजूद तकनीकी आधार पर जमानत देना उचित नहीं था।

सरकार ने अदालत को बताया कि इस मामले में 5 सितंबर 2025 को मुख्य चार्जशीट दाखिल की गई थी, जबकि 10 फरवरी 2026 को सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी पेश की गई। इसके अलावा 28 अक्टूबर 2025 को आरोप भी तय हो चुके थे। ऐसे में आरोपी यह नहीं कह सकती कि उसे मामले की जानकारी नहीं थी।

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यदि आरोपी को जमानत पर रहने दिया गया तो वह गवाहों को प्रभावित कर सकती है। चूंकि मामला बेहद संवेदनशील और चर्चित है, इसलिए ट्रायल की निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।

सरकारी वकीलों का कहना है कि हत्या की साजिश में शामिल आरोपियों के बीच पहले से संपर्क और समन्वय की बात जांच में सामने आ चुकी है। ऐसे में आरोपी को खुली छूट देना जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।

दस महीने बाद मिली थी राहत

सोनम रघुवंशी को पिछले साल 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि राजा रघुवंशी की हत्या की साजिश में सोनम की मुख्य भूमिका थी।

गिरफ्तारी के बाद से सोनम शिलॉन्ग की जेल में बंद थीं। लगभग दस महीने तक जेल में रहने के बाद उन्हें अप्रैल 2026 में जमानत मिली थी। जमानत मिलने के बाद सोनम के परिवार ने राहत की सांस ली थी और इसे न्याय की जीत बताया था।

हालांकि दूसरी ओर राजा रघुवंशी के परिवार ने इस फैसले पर नाराजगी जताई थी। परिवार का कहना था कि यह एक सुनियोजित हत्या का मामला है और मुख्य आरोपी को जमानत देना गलत संदेश देगा।

क्या हैं अदालत की शर्तें?

जमानत देते समय अदालत ने सोनम रघुवंशी पर कई शर्तें भी लगाई थीं। अदालत ने कहा था कि आरोपी को 50 हजार रुपये का निजी बॉन्ड और दो जमानतदार देने होंगे।

इसके अलावा उन्हें हर सुनवाई में अदालत के सामने पेश होना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि आरोपी किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगी और न ही सबूतों से छेड़छाड़ करेगी।

साथ ही बिना अदालत की अनुमति के वह कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकेंगी।

कैसे हुआ था राजा रघुवंशी हत्याकांड?

राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी की शादी के कुछ समय बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय पहुंचे थे। 21 मई 2025 को वे शिलॉन्ग पहुंचे और 26 मई को सोहरा घूमने गए थे।

इसी दौरान दोनों अचानक लापता हो गए। पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब एक सप्ताह बाद 2 जून को राजा रघुवंशी का शव वेई सादोंग फॉल्स के पास एक गहरी खाई में मिला।

शुरुआत में मामला हादसा माना जा रहा था, लेकिन बाद में जांच में हत्या की आशंका सामने आई। पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए और सोनम रघुवंशी समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया।

पुलिस के अनुसार, इस हत्या की साजिश पहले से रची गई थी। मामले में राज कुशवाहा, विशाल चौहान, आकाश राजपूत और आनंद कुर्मी के नाम भी सामने आए। हालांकि सभी आरोपियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है।

12 मई की सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब इस पूरे मामले में अगली अहम तारीख 12 मई होगी, जब हाईकोर्ट में जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई होगी। अदालत यह तय करेगी कि निचली अदालत द्वारा दिया गया फैसला सही था या नहीं।

यदि हाईकोर्ट मेघालय सरकार की दलीलों से सहमत होता है, तो सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द हो सकती है और उन्हें फिर से जेल जाना पड़ सकता है। वहीं यदि अदालत निचली अदालत के फैसले को सही मानती है, तो सोनम को राहत मिल सकती है।

इस हाईप्रोफाइल केस पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। एक तरफ राजा रघुवंशी के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है, तो दूसरी ओर सोनम का परिवार इसे कानूनी अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया का मामला बता रहा है। आने वाले दिनों में अदालत का फैसला इस बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस की दिशा तय कर सकता है।

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