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बंगाल में वोटिंग से पहले एक्शन मोड में चुनाव आयोग: कई जिलों में छापेमारी, बम और हिंसा पर सख्ती की बड़ी वजह

The Hill India News
Last updated: April 27, 2026 8:16 am
The Hill India News
Published: April 27, 2026
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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग से पहले माहौल को पूरी तरह शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए Election Commission of India (ECI) ने सख्त रुख अपनाया है। प्रचार अभियान के आखिरी दिन राज्य के कई जिलों—खासकर बैरकपुर, जगद्दल और दक्षिण 24 परगना—में केंद्रीय एजेंसियों और स्थानीय पुलिस द्वारा बड़े पैमाने पर छापेमारी की जा रही है। इस कार्रवाई में National Investigation Agency (NIA) भी शामिल है, जो बम और विस्फोटक से जुड़े मामलों की जांच कर रही है।

आमतौर पर चुनाव प्रचार के दौरान इस तरह की आक्रामक छापेमारी कम ही देखने को मिलती है, लेकिन इस बार आयोग ने हालात को देखते हुए पहले से ही सख्ती बरतने का फैसला किया है। इसके पीछे मुख्य कारण राज्य में चुनावी हिंसा का पुराना इतिहास और हाल के दिनों में सामने आए बम बरामदगी के मामले हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा कोई नई बात नहीं है। अतीत में कई बार मतदान के दिन पथराव, गोलीबारी और यहां तक कि बमबारी जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। हालांकि इस बार पहले चरण की वोटिंग अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही, लेकिन कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा की घटनाएं जरूर हुईं। इससे आयोग सतर्क हो गया और दूसरे चरण से पहले किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।

हाल ही में राज्य के अलग-अलग इलाकों से कच्चे बम बरामद होने की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता और बढ़ा दी। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने केंद्रीय बलों को निर्देश दिया कि वे बम बनाने वालों के खिलाफ सघन अभियान चलाएं और संभावित खतरों को पहले ही खत्म कर दें। आयोग का स्पष्ट आदेश है कि मतदान के दिन किसी भी हाल में विस्फोट या हिंसा की घटना नहीं होनी चाहिए।

रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में आयोग ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। Kolkata में आयोजित इस बैठक में पुलिस कमिश्नर, डीसीपी, एसपी और थाना स्तर तक के अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि यदि उनके क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति विस्फोटक सामग्री के साथ पकड़ा जाता है या मतदाताओं को डराने-धमकाने की कोशिश करता है, तो संबंधित अधिकारी को इसकी सीधी जिम्मेदारी उठानी होगी।

आयोग ने अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर हर संदिग्ध सामग्री जब्त करने और हर संभावित खतरे को निष्क्रिय करने का आदेश दिया है। इसके बाद ही राज्यभर में तलाशी और छापेमारी अभियान तेज कर दिया गया।

इस कार्रवाई के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां भानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में एक तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ता के घर के पास से करीब 100 कच्चे बम बरामद किए गए। यह बरामदगी उत्तर काशीपुर थाना क्षेत्र के चेलेगोआलिया इलाके में हुई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया है।

इस घटना ने यह साफ कर दिया कि चुनाव के दौरान हिंसा फैलाने की साजिशें अब भी सक्रिय हैं। यही वजह है कि चुनाव आयोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि मतदान से पहले या मतदान के दिन किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी या बमबाजी होती है, तो संबंधित थाना प्रभारी और अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आयोग की यह सख्ती चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और भयमुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। मतदाताओं को सुरक्षित माहौल देना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस बार वह इस जिम्मेदारी को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रहा है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग से पहले चल रही छापेमारी का मुख्य उद्देश्य चुनावी हिंसा को रोकना, अवैध हथियार और विस्फोटकों को जब्त करना और मतदाताओं को डराने की किसी भी कोशिश को नाकाम करना है। अब देखना यह होगा कि आयोग की यह सख्ती मतदान के दिन कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या इससे पूरी तरह शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित हो पाता है या नहीं।

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