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उत्तराखंड: थराली में आपदा पीड़ितों के बीच पहुंचे हरीश रावत, सरकार की आपदा प्रबंधन नीति पर उठाए सवाल

The Hill India News
Last updated: April 25, 2026 4:57 am
The Hill India News
Published: April 25, 2026
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चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के आपदा प्रभावित थराली क्षेत्र में शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहुंचे और वहां के हालात का जायजा लिया। उन्होंने न सिर्फ प्रभावित गांवों का दौरा किया बल्कि स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रभावितों को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है और मुआवजे के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है।

थराली मुख्य बाजार से जनसंपर्क करते हुए हरीश रावत चेपड़ो गांव पहुंचे, जो हाल ही में आई आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यहां उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी परेशानियों को करीब से समझा। स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि वे लंबे समय से राहत और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

इस दौरान हरीश रावत ने कहा कि थराली क्षेत्र लगातार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में है। उन्होंने विशेष रूप से पिंडर नदी के किनारे हो रहे तेज कटाव और बढ़ते भू-धंसाव को गंभीर खतरा बताया। उनके अनुसार, अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन खतरों को नजरअंदाज कर रही है और स्थायी समाधान के बजाय केवल अस्थायी उपायों पर निर्भर है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल राहत बांटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके तहत दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से नुकसान कम हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ सुरक्षा और भू-संरक्षण के लिए अभी तक कोई ठोस कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

अपनी सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए हरीश रावत ने कहा कि वर्ष 2014 में आई आपदा के दौरान उनकी सरकार ने प्रभावित परिवारों को 5 लाख रुपये की सहायता दी थी। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये अतिरिक्त और केंद्र सरकार से भी मदद दिलाई गई थी। उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाया कि वह सीमित मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है और प्रभावित लोगों को नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा के बजट सत्र से पहले उन्होंने सरकार को आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य तेज करने के लिए समय दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि बजट सत्र के बाद वे खुद इन क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उसी क्रम में उन्होंने थराली का दौरा किया। इससे पहले वे 16 अप्रैल को उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में भी पहुंचे थे, जहां उन्होंने वहां के हालात पर चिंता जताई थी।

हरीश रावत के इस दौरे को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में लगातार आपदा प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उनके आरोपों के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मुद्दों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस दौरे के बाद उनकी समस्याओं पर सरकार का ध्यान जाएगा और उन्हें जल्द ही उचित सहायता व सुरक्षित पुनर्वास की दिशा में ठोस कदम देखने को मिलेंगे। फिलहाल, थराली और आसपास के क्षेत्रों में लोग प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच अपने भविष्य को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

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