उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: आईआईटी रुड़की की ग्रामीण विकास में बड़ी पहल, नई तकनीकों से बढ़ेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसर

रुड़की: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने ग्रामीण भारत के विकास और आजीविका को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालने वाली पहल की है। संस्थान ने अपने ग्रामीण प्रौद्योगिकी कार्य समूह (RuTAG) के माध्यम से विकसित की गई कई नवाचारी तकनीकों का सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और स्थानीय उद्यमिता को मजबूत करने की संभावनाएं काफी हद तक सशक्त हुई हैं।

यह पूरी पहल भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) कार्यालय के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों और आधुनिक तकनीकी समाधानों के बीच मौजूद खाई को पाटना है। इस प्रयास के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि वैज्ञानिक अनुसंधान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ गांवों और छोटे उद्योगों तक पहुंचे। इससे न केवल तकनीक का व्यावहारिक उपयोग बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।

आईआईटी रुड़की द्वारा हस्तांतरित प्रमुख तकनीकों में मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन और हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन शामिल हैं। ये दोनों ही तकनीकें RuTAG 2.0 टीम द्वारा विशेष रूप से ग्रामीण और लघु उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक कृषि और फाइबर-आधारित उद्योगों को आधुनिक, तेज और अधिक लाभकारी बनाना है।

मल्टी-मिलेट डिहस्किंग मशीन का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह विभिन्न प्रकार के मोटे अनाजों (मिलेट्स) के प्रसंस्करण को सरल, तेज और कम श्रम-आधारित बनाती है। पहले जहां मिलेट्स को साफ करने और प्रोसेस करने में अधिक समय, श्रम और लागत लगती थी, वहीं अब यह मशीन इस प्रक्रिया को काफी आसान बना देती है। इससे किसानों और छोटे प्रसंस्करण इकाइयों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा और मिलेट आधारित उत्पादों की बाजार में उपलब्धता भी बढ़ेगी।

दूसरी ओर, हेम्प डिकॉर्टिकेटर मशीन एक अत्यंत उपयोगी तकनीक है, जो हेम्प पौधे के रेशों और वुडी कोर को अलग करने का कार्य करती है। इससे हेम्प आधारित उत्पादों के उपयोग को विभिन्न उद्योगों जैसे टेक्सटाइल, पेपर, बायो-कम्पोजिट और निर्माण सामग्री में बढ़ावा मिलेगा। यह तकनीक न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में नए औद्योगिक अवसर भी पैदा कर सकती है।

इन तकनीकों के सफल प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए आईआईटी रुड़की ने कई उद्योग भागीदारों के साथ समझौते किए हैं। इनमें इंडो क्लाइमेट लैब प्राइवेट लिमिटेड (नई दिल्ली), जय मां दुर्गा इंजीनियरिंग कंपनी और धीमन एंटरप्राइजेज (रुड़की) शामिल हैं। इन सहयोगों के माध्यम से इन तकनीकों का व्यावसायिक उत्पादन और व्यापक उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

इस अवसर पर आईआईटी रुड़की के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे। अधिष्ठाता (SRIC) प्रो. विवेक कुमार मलि, सह-अधिष्ठाता प्रो. साई रामुडु मेका, RuTAG के प्रधान अन्वेषक प्रो. सुनील कुमार सिंगल और प्रो. सोनल के. ठेंगाने ने इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने इस अवसर पर कहा कि आईआईटी रुड़की का मुख्य उद्देश्य केवल अनुसंधान करना नहीं, बल्कि उस शोध को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदलना है, ताकि समाज को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

RuTAG परियोजना से जुड़े प्रो. सुनील कुमार सिंगल ने बताया कि इन तकनीकों को विशेष रूप से ग्रामीण जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। उनका कहना था कि इन नवाचारों से किसानों की आय में वृद्धि होगी, स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर बन सकेगी।

इस पहल को विभिन्न सरकारी और निजी संगठनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया, तो यह ग्रामीण भारत के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। साथ ही यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करती है, क्योंकि यह स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और ग्रामीण उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है।

कुल मिलाकर, आईआईटी रुड़की की यह पहल न केवल तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सही उपयोग समाज के अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने में किया जा सकता है। यह प्रयास आने वाले समय में ग्रामीण भारत को अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button