
उत्तराखंड के पवित्र केदारनाथ धाम में कपाट खुलते ही जहां एक ओर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा, वहीं दूसरी ओर यात्रा के पहले ही दिन व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। खासतौर पर रुद्रप्रयाग जिले के सिरसी हेलीपैड से संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहीं, जिससे सैकड़ों श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार, हिमालयन हेली सर्विस लिमिटेड द्वारा संचालित हेलीकॉप्टर सेवाएं निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकीं। जहां सुबह 6 बजे से उड़ानें शुरू होनी थीं, वहीं सुबह 9 बजे तक भी केदारनाथ में हेलीकॉप्टरों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल पाई। इस कारण पूरे दिन की सेवा प्रभावित हो गई और यात्रियों की लंबी कतारें हेलीपैड पर लगी रहीं।
सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिरसी हेलीपैड पर पहुंच गए थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने से कई यात्रियों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। वहीं, सैकड़ों लोग घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। यात्रियों का कहना है कि सुबह 6 बजे से लेकर करीब 11 बजे तक एक भी हेलीकॉप्टर ने उड़ान नहीं भरी, जिससे उनकी पूरी यात्रा योजना बाधित हो गई।
हेलीकॉप्टर सेवा संचालित करने वाली कंपनी ने यात्रियों को जारी बयान में कहा कि “ऑपरेशनल पाबंदियों के चलते सुबह 6 से 9 बजे के बीच के सभी स्लॉट रद्द कर दिए गए हैं।” कंपनी ने इसके लिए खेद जताते हुए आश्वासन दिया कि टिकट की राशि एक सप्ताह के भीतर वापस कर दी जाएगी। हालांकि, इस घोषणा से श्रद्धालुओं का गुस्सा कम नहीं हुआ।
बताया जा रहा है कि हेलीकॉप्टर सेवाओं के बाधित होने के पीछे मुख्य वजह वीआईपी मूवमेंट रही। केदारनाथ में अधिक संख्या में वीआईपी आगमन के चलते आम उड़ानों को लैंडिंग की अनुमति नहीं मिल पाई। इस कारण आम श्रद्धालुओं को घंटों इंतजार करना पड़ा और कई लोगों की यात्रा अधूरी रह गई। यात्रियों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आस्था के इस बड़े पर्व में वीआईपी को प्राथमिकता देना उचित नहीं है।
हर साल यात्रा शुरू होने से पहले सरकार और प्रशासन की ओर से बेहतर व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहले ही दिन सामने आई अव्यवस्थाओं ने इन दावों की पोल खोल दी है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि शुरुआत में ही ऐसी स्थिति है, तो आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं।
हेलीपैड पर मौजूद यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि वीआईपी मूवमेंट और आम श्रद्धालुओं के बीच संतुलन बनाया जाए। उनका कहना है कि सभी श्रद्धालु समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। बेहतर प्रबंधन और स्पष्ट समय-सारणी की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, केदारनाथ यात्रा की शुरुआत जहां भक्ति और श्रद्धा के माहौल में हुई, वहीं अव्यवस्थाओं ने इस पवित्र यात्रा के पहले ही दिन यात्रियों के अनुभव को प्रभावित किया। अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां इस स्थिति से सबक लेकर आगे की यात्रा को कितना सुचारू बना पाती हैं।



