
बारामती की राजनीतिक रूप से बेहद अहम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने अचानक नया मोड़ ले लिया है। इस सीट पर अब मुकाबला लगभग खत्म होता नजर आ रहा है, क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सहित कुल 23 उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। इस घटनाक्रम के बाद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार की निर्विरोध जीत लगभग तय मानी जा रही है।
मुंबई से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस ने रणनीतिक फैसला लेते हुए अपने उम्मीदवार आकाश विश्वनाथ मोरे का नाम वापस लेने का ऐलान किया है। इससे पहले पार्टी ने उन्हें आधिकारिक रूप से उम्मीदवार घोषित किया था। इस फैसले को प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और स्थानीय समीकरणों के मद्देनजर लिया गया माना जा रहा है।
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मंजूरी के बाद आकाश मोरे को टिकट दिया गया था, जिसकी जानकारी पार्टी के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने 5 अप्रैल 2026 को सार्वजनिक की थी। लेकिन अब पार्टी ने चुनावी मैदान से हटने का फैसला लेकर इस मुकाबले को एकतरफा बना दिया है।
बारामती सीट को लंबे समय से पवार परिवार का मजबूत गढ़ माना जाता है। पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार यहां से लगातार आठ बार विधायक चुने जा चुके थे। 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने एक लाख 81 हजार से अधिक वोटों के अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराया था। इस सीट पर उनका दबदबा और जनाधार हमेशा मजबूत रहा है।
अजित पवार के निधन के बाद इस सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी। उनके निधन के बाद पूरे क्षेत्र में सहानुभूति की लहर देखने को मिल रही है। इसी भावनात्मक माहौल को देखते हुए पवार परिवार ने उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को उम्मीदवार बनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला रणनीतिक रूप से भी बेहद मजबूत साबित हुआ है।
शुरुआती दौर में इस उपचुनाव को लेकर काफी हलचल थी। कांग्रेस के मैदान में उतरने के बाद मुकाबला हाई-प्रोफाइल बन गया था। लेकिन जैसे-जैसे नामांकन वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कई उम्मीदवारों ने चुनाव से दूरी बना ली। अब तक कुल 23 उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने से स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि सुनेत्रा पवार को निर्विरोध जिताने के लिए अपीलें की जा रही थीं। स्थानीय स्तर पर भी कई संगठनों और नेताओं ने इस मांग को समर्थन दिया था। अब कांग्रेस के पीछे हटने के बाद यह अपील लगभग साकार होती दिख रही है।
इस उपचुनाव के तहत 23 अप्रैल को मतदान और 4 मई 2026 को मतगणना प्रस्तावित थी। हालांकि मौजूदा स्थिति में यदि कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं बचता है, तो सुनेत्रा पवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया जा सकता है। इससे न केवल पवार परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत होगी, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
कुल मिलाकर, बारामती उपचुनाव अब एक औपचारिक प्रक्रिया भर रह गया है। कांग्रेस समेत अन्य उम्मीदवारों के हटने से यह साफ हो गया है कि इस सीट पर पवार परिवार का दबदबा बरकरार है और सुनेत्रा पवार की जीत लगभग तय है।



