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दिल्लीफीचर्ड

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई’ में पत्नी के हक में निर्णय, पति को 5 करोड़ देने का आदेश

The Hill India News
Last updated: April 9, 2026 4:44 am
The Hill India News
Published: April 9, 2026
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नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत, Supreme Court of India ने एक बेहद चर्चित वैवाहिक विवाद में अहम फैसला सुनाते हुए इसे “महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई” करार दिया है। अदालत ने न केवल पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को समाप्त किया, बल्कि पत्नी के पक्ष में फैसला देते हुए पति को 5 करोड़ रुपये एकमुश्त भरण-पोषण देने का आदेश भी दिया।

Contents
दशकभर पुराना विवाद, “महाभारत” जैसी स्थितिअनुच्छेद 142 का प्रयोग कर दिया अंतिम फैसला5 करोड़ रुपये एकमुश्त देने का आदेश80 मुकदमे दर्ज कर उत्पीड़न का आरोप सहीबच्चों की कस्टडी मां को, पिता को मुलाकात का अधिकारफ्लैट खाली करने का निर्देशभविष्य में कोई मुकदमा नहीं करेगा पति2010 में हुई थी शादी, 2016 में अलगाव

यह मामला सुप्रीम कोर्ट में XXX बनाम YYY के नाम से दर्ज था, जिसमें पति पेशे से वकील है। कोर्ट ने पाया कि पति ने अपनी कानूनी जानकारी का दुरुपयोग करते हुए पत्नी, उसके परिवार और यहां तक कि उसके वकीलों के खिलाफ करीब 80 मुकदमे दर्ज कराए, जो स्पष्ट रूप से उत्पीड़न की श्रेणी में आता है।

दशकभर पुराना विवाद, “महाभारत” जैसी स्थिति

न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह विवाद अब एक “महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई” का रूप ले चुका है, जिसे समाप्त करना आवश्यक है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में न्याय का उद्देश्य केवल कानूनी प्रक्रिया को पूरा करना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों को नई शुरुआत का अवसर देना भी होना चाहिए।

अनुच्छेद 142 का प्रयोग कर दिया अंतिम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय संविधान के Article 142 of the Constitution of India के तहत अपने विशेषाधिकार का उपयोग करते हुए पति-पत्नी के विवाह को समाप्त (तलाक) करने का आदेश दिया। साथ ही, अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों पक्षों के बीच लंबित सभी मुकदमों और एफआईआर को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए, ताकि इस लंबे विवाद को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

5 करोड़ रुपये एकमुश्त देने का आदेश

अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह पत्नी को 5 करोड़ रुपये की एकमुश्त राशि दे। इस राशि में गुजारा भत्ता, बच्चों की देखभाल का खर्च और मुकदमेबाजी का खर्च शामिल है। पहले लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने को भी इसी राशि में समायोजित किया गया है।

पति ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर बताकर भुगतान से बचने की कोशिश की, लेकिन कोर्ट ने इसे “कृत्रिम आवरण” बताते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि पति ने जानबूझकर अपनी वित्तीय स्थिति को कमतर दिखाने की कोशिश की थी।

80 मुकदमे दर्ज कर उत्पीड़न का आरोप सही

कोर्ट ने यह भी माना कि पति ने अपने पेशे का दुरुपयोग करते हुए पत्नी और उसके जानकारों को परेशान करने के लिए करीब 80 मुकदमे दर्ज किए। इस आचरण को अदालत ने “शत्रुतापूर्ण, झगड़ालू और प्रतिशोधी” बताया। कोर्ट ने सभी लंबित मामलों और एफआईआर को तत्काल रद्द करने का आदेश दिया।

बच्चों की कस्टडी मां को, पिता को मुलाकात का अधिकार

पीठ ने दोनों नाबालिग बच्चों की स्थायी कस्टडी मां को सौंप दी है। हालांकि, पिता को हर महीने बच्चों से मिलने का अधिकार दिया गया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के हित को सर्वोपरि रखा गया है।

फ्लैट खाली करने का निर्देश

बताया गया कि पत्नी वर्तमान में मुंबई स्थित ससुर के एक फ्लैट में रह रही है, जिसकी कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि पूरी राशि मिलने के बाद पत्नी उस फ्लैट को खाली कर देगी।

भविष्य में कोई मुकदमा नहीं करेगा पति

अदालत ने पति को यह भी निर्देश दिया कि वह एक हलफनामा दाखिल करे, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाए कि वह भविष्य में पत्नी, उसके परिवार या उसके वकीलों के खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं करेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

2010 में हुई थी शादी, 2016 में अलगाव

जानकारी के अनुसार, दोनों की शादी 2010 में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। करीब 6 साल साथ रहने के बाद 2016 में आपसी मतभेदों के चलते दोनों अलग हो गए। इसके बाद दोनों के बीच कानूनी लड़ाई का लंबा दौर शुरू हुआ, जो लगभग एक दशक तक चला।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वैवाहिक मामलों में अदालतों को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए। जहां संभव हो, विवादों को जल्द खत्म करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए, क्योंकि लंबी मुकदमेबाजी दोनों पक्षों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में समग्र समाधान निकालना जरूरी है, ताकि पक्षकारों को राहत मिल सके और वे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें।

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