हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार में स्वच्छता और धार्मिक मर्यादाओं को लेकर नगर निगम ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला लिया है। नगर निगम की हालिया बोर्ड बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि हरिद्वार नगर क्षेत्र की सीमा के भीतर अब कच्चे मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस फैसले के तहत, विशेष रूप से ज्वालापुर क्षेत्र में दशकों से संचालित हो रही मीट की दुकानों को अब शहर की सीमा से बाहर सराय क्षेत्र में नवनिर्मित परिसर में स्थानांतरित किया जाएगा।
निगम के इस कदम ने शहर में एक नई प्रशासनिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। जहाँ प्रशासन इसे कुंभ और कांवड़ मेले जैसी व्यवस्थाओं के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं मीट कारोबारी इसे अपनी आजीविका पर प्रहार मान रहे हैं।
उप-नियमों में संशोधन: अब पूरे नगर क्षेत्र में लागू होगा प्रतिबंध
नगर निगम आयुक्त नंदन कुमार ने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी एक विशेष समुदाय या क्षेत्र को लक्षित करके नहीं, बल्कि पूरी धर्मनगरी की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में प्रचलित उप-नियमों (Bye-laws) में कुछ क्षेत्रों को छूट प्राप्त थी, विशेषकर ज्वालापुर जैसे इलाकों में कच्चे मांस की दुकानें संचालित हो रही थीं।
आयुक्त ने कहा, “हमने पुराने उप-नियमों में विधिवत संशोधन किया है। अब हरिद्वार नगर निगम के अंतर्गत आने वाले किसी भी वार्ड या गली में मांस की बिक्री की अनुमति नहीं होगी। हरिद्वार मीट दुकान शिफ्टिंग की इस योजना के तहत सराय क्षेत्र में 56 आधुनिक दुकानों का निर्माण किया गया है, जहाँ सभी लाइसेंस धारक विक्रेताओं को जगह आवंटित की जाएगी।”
धार्मिक आयोजनों और स्वच्छता का तर्क
प्रशासन का तर्क है कि हरिद्वार एक वैश्विक धार्मिक केंद्र है, जहाँ साल भर करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। विशेष रूप से सावन के महीने में कांवड़ यात्रा और समय-समय पर होने वाले कुंभ व अर्धकुंभ मेलों के दौरान मांस की दुकानों की मौजूदगी अक्सर कानून-व्यवस्था और स्वच्छता के लिए चुनौती पैदा करती है। नगर निगम का मानना है कि शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों और आबादी वाले क्षेत्रों से इन दुकानों के हटने से शहर की छवि और अधिक स्वच्छ और सात्विक बनेगी।
‘श्मशान घाट के पास व्यापार कैसे होगा?’ – व्यापारियों का तीखा विरोध
नगर निगम के इस फरमान के बाद ज्वालापुर के मीट व्यापारियों में भारी असंतोष व्याप्त है। व्यापारियों का मुख्य विरोध उस स्थान को लेकर है जहाँ उन्हें शिफ्ट किया जा रहा है।
व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि सराय क्षेत्र में जहाँ दुकानें बनाई गई हैं, वह स्थान व्यापार के दृष्टिकोण से बिल्कुल अनुपयुक्त है। उनकी मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
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नियमों का उल्लंघन: व्यापारियों का तर्क है कि नगर निगम के अपने नियम कहते हैं कि मीट की दुकान किसी भी धार्मिक स्थल या श्मशान से दूर होनी चाहिए। लेकिन सराय में प्रस्तावित स्थल की दीवार सीधे श्मशान घाट से सटी हुई है।
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दूरी और किराया: नया स्थान मुख्य शहर से काफी दूर है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों को वहां तक जाने के लिए भारी किराया देना होगा, जिससे बिक्री घट जाएगी।
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अस्वच्छता: व्यापारियों का दावा है कि सराय क्षेत्र में साफ-सफाई की स्थिति बेहद दयनीय है, जिससे वहां मांस जैसा संवेदनशील कारोबार करना असंभव होगा।
एक स्थानीय मीट विक्रेता ने आक्रोश जताते हुए कहा, “श्मशान घाट के बगल में इस तरह का व्यापार कभी सफल नहीं हो सकता। यह प्रशासन की हमें बेरोजगार करने की साजिश है। हमने इस संबंध में जिलाधिकारी (DM) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।“
आजीविका बनाम मर्यादा: प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
हरिद्वार नगर निगम के लिए यह फैसला लागू करना आसान नहीं होगा। एक तरफ जहाँ हिंदूवादी संगठन और स्थानीय नागरिक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर करीब 50 से अधिक परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को ‘एकतरफा’ फैसला लेने के बजाय अलग-अलग प्रकार के मांस (मछली, मुर्गा, मटन) के लिए बेहतर और वैज्ञानिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सराय क्षेत्र में शिफ्ट होने के लिए समय सीमा निर्धारित की जाएगी, और इसके बाद भी यदि कोई नगर क्षेत्र में दुकान संचालित करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस निरस्त कर दुकान सील कर दी जाएगी।
हरिद्वार में हरिद्वार मीट दुकान शिफ्टिंग का यह मुद्दा अब तूल पकड़ता जा रहा है। यदि प्रशासन और व्यापारियों के बीच संवाद के जरिए कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है, तो यह मामला कोर्ट की दहलीज तक भी पहुंच सकता है। फिलहाल, नगर निगम अपने फैसले पर अडिग है और सराय में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
धर्मनगरी की मर्यादा बनाए रखने की कोशिश और छोटे कारोबारियों के हक के बीच का यह संघर्ष हरिद्वार की राजनीति में आने वाले दिनों में एक बड़ा मुद्दा बनेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

