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उत्तराखंडफीचर्ड

पीएम मोदी के उत्तराखंड दौरे से पहले 1200 करोड़ की ‘राहत’ पर राजनितिक आफत, घोषणा और हकीकत के बीच फंसी सियासत

The Hill India News
Last updated: April 6, 2026 1:54 pm
The Hill India News
Published: April 6, 2026
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फाइल फोटो: धराली में आपदा
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देहरादून: उत्तराखंड की शांत वादियों में एक बार फिर राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। अवसर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगामी 14 अप्रैल का प्रस्तावित उत्तराखंड दौरा। जहां एक ओर राजधानी देहरादून के गढ़ीकैंट स्थित महिंद्रा ग्राउंड में पीएम की विशाल जनसभा और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के भव्य शुभारंभ की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं दूसरी ओर पिछले साल की आपदा राहत के लिए घोषित 1200 करोड़ रुपये का ‘हिसाब’ विपक्ष ने मांगना शुरू कर दिया है।

Contents
घोषणा और प्रतीक्षा: 11 सितंबर 2025 का वो वादाPDNA रिपोर्ट: 15 हजार करोड़ का भारी नुकसानसियासी वार-पलटवार: ‘डबल इंजन’ पर उठे सवालअधिकारियों का दावा: ‘पाइपलाइन’ में है पैसा14 अप्रैल का दौरा: विकास की चमक या वादों का बोझ?समाधान की दरकार

घोषणा और प्रतीक्षा: 11 सितंबर 2025 का वो वादा

मामले की जड़ें पिछले साल अगस्त में आई विनाशकारी आपदा से जुड़ी हैं। 5 अगस्त 2025 को धराली-हर्षिल सहित उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और ऊधमसिंह नगर में मॉनसून ने भारी तबाही मचाई थी। इस संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर 2025 को उत्तराखंड आए थे। एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद उन्होंने राज्य की तात्कालिक मदद के लिए 1200 करोड़ रुपये के वित्तीय सहायता की घोषणा की थी।

आज करीब सात महीने बीत जाने के बाद भी यह धनराशि राज्य के खजाने तक नहीं पहुंच पाई है, जिसे कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में अपना लिया है।

PDNA रिपोर्ट: 15 हजार करोड़ का भारी नुकसान

आपदा के बाद हुए नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए उत्तराखंड आपदा प्रबंधन विभाग ने ‘पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट’ (PDNA) तकनीक का सहारा लिया। अक्टूबर में प्रदेश के सभी जिलों में सर्वे किया गया, जिसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली थी:

क्षति का प्रकार अनुमानित धनराशि (करोड़ में)
प्रत्यक्ष क्षति ₹ 3,792.38
अप्रत्यक्ष क्षति ₹ 312.19
पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण ₹ 10,998.95
कुल आकलन (PDNA) ₹ 15,103.52

राज्य सरकार ने केंद्र को 5702 करोड़ का मेमोरेंडम भेजा था, लेकिन विस्तृत रिपोर्ट में जरूरत 15 हजार करोड़ से अधिक बताई गई। इसके विपरीत, अब तक राज्य को केवल ‘राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि’ के तहत मात्र 113.90 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं।


सियासी वार-पलटवार: ‘डबल इंजन’ पर उठे सवाल

पीएम मोदी के आगमन से ठीक पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक प्रीतम सिंह ने सरकार की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “प्रदेश में व्यापक स्तर पर दैवीय आपदा आई थी। पीएम ने खुद 1200 करोड़ की घोषणा की थी, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं मिला। अगर ‘डबल इंजन’ की सरकार में भी आपदा का धन नहीं मिल पा रहा, तो यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता और असंवेदनशीलता है।”

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल आरोपों की राजनीति करती है। उन्होंने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है और कुछ धनराशि जारी हो चुकी है, बाकी भी जल्द मिल जाएगी।

अधिकारियों का दावा: ‘पाइपलाइन’ में है पैसा

विपक्ष के हमलों और जनता की उम्मीदों के बीच प्रशासनिक अमला डैमेज कंट्रोल में जुटा है। आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने आश्वस्त किया है कि राहत पैकेज की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हाल ही में मुख्य सचिव की भारत सरकार के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई है। उनके अनुसार, तकनीकी औपचारिकताओं के कारण देरी हुई है, लेकिन बहुत जल्द यह धनराशि उत्तराखंड को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

14 अप्रैल का दौरा: विकास की चमक या वादों का बोझ?

प्रधानमंत्री मोदी का 14 अप्रैल का दौरा उत्तराखंड के लिए विकास के नजरिए से ऐतिहासिक होने वाला है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच की दूरी महज ढाई घंटे रह जाएगी, जो पर्यटन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

हालांकि, पीएम मोदी उत्तराखंड दौरा और आपदा राहत पैकेज अब एक-दूसरे के पूरक बन गए हैं। गढ़ीकैंट के महिंद्रा ग्राउंड में होने वाली जनसभा में जनता की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि क्या प्रधानमंत्री अपने संबोधन में इस राहत पैकेज के अटके होने पर कोई स्पष्टीकरण देते हैं या नई सौगातों की बौछार से पुराने विवादों को पीछे छोड़ देते हैं।

समाधान की दरकार

उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य के लिए वित्तीय सहायता केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि हजारों प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का सवाल है। विकास के बड़े प्रोजेक्ट्स जैसे एक्सप्रेसवे निश्चित रूप से जरूरी हैं, लेकिन आपदा राहत का पैसा समय पर पहुंचना सरकार की विश्वसनीयता की असली कसौटी है। अब देखना यह होगा कि 14 अप्रैल को पीएम की रैली से पहले क्या केंद्र की ओर से कोई ‘गुड न्यूज़’ आती है या यह मुद्दा चुनावी शोर में और गहराता जाएगा।


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