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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड: उत्तराखंड में गैस संकट के बीच नई SOP लागू , शादियों, होटल और उद्योगों के लिए तय हुआ एलपीजी कोटा

Rajesh Dabral
Last updated: April 3, 2026 10:35 am
Rajesh Dabral
Published: April 3, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड में व्यावसायिक एलपीजी (LPG) की कमी के चलते राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू कर दी है। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव—खासतौर पर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष—का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इसी के मद्देनजर उत्तराखंड शासन ने व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के वितरण को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि सीमित संसाधनों का संतुलित और प्राथमिकता के आधार पर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

Contents
अलग-अलग सेक्टर के लिए तय हुआ कोटाशादियों के लिए विशेष राहतजिलों के हिसाब से आवंटनतेल कंपनियों की भूमिका और निगरानीआम जनता पर असर और सरकार की तैयारी

राज्य सरकार के इस फैसले के तहत अब उत्तराखंड में कुल 66 प्रतिशत कोटे के आधार पर व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों का आवंटन किया जाएगा। दरअसल, केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा राज्यों के लिए तय किए गए कोटे में उत्तराखंड को 6 प्रतिशत अतिरिक्त आवंटन मिला है, जिससे राज्य का कुल कोटा बढ़कर 66 प्रतिशत हो गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब गैस की आपूर्ति में लगातार बाधाएं आ रही हैं और मांग में भी तेजी देखी जा रही है।

अलग-अलग सेक्टर के लिए तय हुआ कोटा

नई SOP के अनुसार, राज्य सरकार ने व्यावसायिक गैस की मांग और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों के लिए स्पष्ट प्रतिशत तय किए हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्राथमिकता रेस्टोरेंट और ढाबा सेक्टर को दी गई है, जिन्हें कुल 32 प्रतिशत यानी करीब 2000 सिलेंडर आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद होटल और रिजॉर्ट सेक्टर को 24 प्रतिशत यानी 1500 सिलेंडर दिए जाएंगे।

औद्योगिक इकाइयों—जिनमें फार्मा, स्टील, ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर शामिल हैं—के लिए 20 प्रतिशत यानी लगभग 1250 सिलेंडर निर्धारित किए गए हैं। वहीं विवाह समारोहों के लिए 10 प्रतिशत यानी 660 सिलेंडर का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा सरकारी गेस्ट हाउस के लिए 5 प्रतिशत यानी 300 सिलेंडर और डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण व छात्रावासों के लिए 3-3 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है।

शादियों के लिए विशेष राहत

शादी-ब्याह के सीजन को ध्यान में रखते हुए सरकार ने आम लोगों को कुछ राहत भी दी है। नई गाइडलाइन के तहत विवाह समारोह के लिए अधिकतम 2 व्यावसायिक गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए आवेदक को जिलाधिकारी या जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा नामित अधिकारी के पास आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद गैस एजेंसी द्वारा अस्थायी कनेक्शन जारी किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शादी समारोह प्रभावित न हों और गैस का दुरुपयोग भी रोका जा सके।

जिलों के हिसाब से आवंटन

गैस वितरण में जिलों की जरूरतों का भी विशेष ध्यान रखा गया है। सामान्य आवंटन में देहरादून को सबसे अधिक 31 प्रतिशत हिस्सा दिया गया है, जबकि नैनीताल और हरिद्वार को 13-13 प्रतिशत कोटा आवंटित किया गया है। औद्योगिक कोटे के तहत देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है, जहां प्रत्येक जिले को 380-380 सिलेंडर आवंटित किए गए हैं।

तेल कंपनियों की भूमिका और निगरानी

यह पूरी व्यवस्था राज्य में काम कर रही तीन प्रमुख तेल कंपनियों—IOCL, BPCL और HPCL—की बाजार हिस्सेदारी के आधार पर लागू की जाएगी। शासन के सचिव आनंद स्वरूप द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस SOP को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और यह अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

साथ ही, गैस की आपूर्ति और वितरण की निगरानी के लिए सभी जिलाधिकारियों और तेल कंपनियों के राज्य प्रमुखों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा कि निर्धारित कोटे का पालन हो और किसी भी स्तर पर कालाबाजारी या अनियमितता न हो।

आम जनता पर असर और सरकार की तैयारी

एलपीजी की कमी का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी देखने को मिल रहा है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को गैस की सीमित उपलब्धता के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह अस्थायी संकट है और आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है, ताकि भविष्य में इस तरह के संकट से बचा जा सके। इसके अलावा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर गैस आपूर्ति को बेहतर करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार की नई SOP सीमित संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिससे जरूरी सेवाओं और आयोजनों पर गैस संकट का असर कम किया जा सके।

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