देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का शंखनाद हो चुका है। जहां एक ओर श्रद्धालु बाबा केदार, बदरी विशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन के लिए उत्साहित हैं, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराधियों का गिरोह भी सक्रिय हो गया है। पंजीकरण प्रक्रिया शुरू होते ही ठगों ने श्रद्धालुओं की आस्था को अपनी कमाई का जरिया बनाने के लिए जाल बिछाना शुरू कर दिया है। हेलीकॉप्टर बुकिंग, होटल रिजर्वेशन और यात्रा पंजीकरण के नाम पर फर्जी वेबसाइट्स और फर्जी कस्टमर केयर नंबरों के जरिए लोगों की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है।
हेली सेवा के नाम पर ‘डिजिटल डाका’
चारधाम यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा मारामारी हेलीकॉप्टर टिकटों को लेकर रहती है। इसी का फायदा साइबर ठग उठा रहे हैं। ठगों ने ‘पवन हंस’ जैसी प्रतिष्ठित और सरकारी अधिकृत कंपनियों से मिलते-जुलते नामों वाली फर्जी वेबसाइट्स तैयार की हैं। इन वेबसाइट्स का इंटरफेस इतना असली लगता है कि आम आदमी के लिए फर्क करना नामुमकिन है।
चौंकाने वाली बात यह है कि ये अपराधी सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) और पेड विज्ञापनों का सहारा लेकर अपनी फर्जी वेबसाइट्स को गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखा रहे हैं। जब श्रद्धालु इन साइट्स पर जाते हैं, तो उन्हें हमेशा सीटें ‘उपलब्ध’ दिखाई जाती हैं, जबकि आधिकारिक साइट पर बुकिंग चंद मिनटों में फुल हो जाती है। हाल ही में उत्तराखंड साइबर पुलिस ने बिहार से संचालित एक ऐसे ही गिरोह का पर्दाफाश किया है जो सोशल मीडिया के जरिए ‘चारधाम पैकेज’ के नाम पर ठगी कर रहा था।
निशुल्क पंजीकरण के नाम पर वसूली
उत्तराखंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि चारधाम यात्रा 2026 पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है। इसके बावजूद, इंटरनेट पर कई ऐसे ‘एजेंट’ सक्रिय हैं जो पंजीकरण कन्फर्म कराने के नाम पर 500 से 2000 रुपये तक वसूल रहे हैं। पिछले वर्ष 2025 में भी ऐसे कई मामले आए थे जहां यात्रियों को फर्जी क्यूआर कोड वाले रजिस्ट्रेशन स्लिप थमा दिए गए थे। यात्रा मार्ग पर जांच के दौरान जब ये स्लिप फर्जी पाई गईं, तो श्रद्धालुओं को न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि उन्हें भारी मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा।
होटल और कस्टमर केयर का नया खेल
ठगी का दायरा सिर्फ हेलीकॉप्टर तक सीमित नहीं है। केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धामों में ठहरने की सीमित व्यवस्था का लाभ उठाकर ठग फर्जी होटल बुकिंग के विज्ञापन चला रहे हैं। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर आकर्षक ‘ऑफर’ और ‘डिस्काउंट’ देकर लोगों से एडवांस पेमेंट ले लिया जाता है और बाद में वे नंबर बंद मिलते हैं। इसके अलावा, ठगों ने गूगल मैप्स और अन्य डायरेक्ट्रीज पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर डाल दिए हैं। इन नंबरों पर कॉल करने वाले श्रद्धालुओं को जल्दबाजी में भुगतान करने के लिए दबाव डाला जाता है ताकि वे जांच-परख न कर सकें।
साइबर पुलिस और एसटीएफ ‘अलर्ट मोड’ पर
बढ़ते खतरों को देखते हुए उत्तराखंड साइबर पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मोर्चा संभाल लिया है। एएसपी साइबर क्राइम कुश मिश्रा के मुताबिक, पुलिस इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के साथ मिलकर संदिग्ध यूआरएल और बैंक खातों की निगरानी कर रही है। अब तक दर्जनों फर्जी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
“सावधानी ही बचाव है। श्रद्धालु केवल सरकार द्वारा जारी आधिकारिक पोर्टल पर ही भरोसा करें। किसी भी निजी व्यक्ति या अज्ञात खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो बिना देरी किए 1930 डायल करें।” — कुश मिश्रा, एएसपी, साइबर क्राइम, उत्तराखंड
चारधाम यात्रा 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और जानकारी
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने इस बार पुख्ता इंतजाम किए हैं। यात्रा से जुड़ी मुख्य जानकारियां निम्नलिखित हैं:
-
कपाट खुलने की तिथियां:
-
यमुनोत्री व गंगोत्री: 19 अप्रैल 2026
-
केदारनाथ धाम: 22 अप्रैल 2026
-
बदरीनाथ धाम: 23 अप्रैल 2026
-
-
पंजीकरण प्रक्रिया: 6 मार्च से ऑनलाइन पंजीकरण शुरू हो चुके हैं। 17 अप्रैल से ऋषिकेश, हरिद्वार समेत अन्य स्थानों पर ऑफलाइन काउंटरों के जरिए भी पंजीकरण किया जा सकेगा।
-
यातायात व्यवस्था: यात्रा मार्ग पर 1,800 से अधिक बसों का संचालन किया जाएगा।
कैसे बचें ठगी से? (एक्सपर्ट टिप्स)
-
आधिकारिक पोर्टल का प्रयोग: पंजीकरण के लिए हमेशा उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट
registrationandtouristcare.uk.gov.inका ही प्रयोग करें। -
हेलीकॉप्टर बुकिंग: केवल IRCTC के अधिकृत पोर्टल के माध्यम से ही हेली सेवा बुक करें।
-
हेल्पलाइन नंबर: किसी भी संदेह की स्थिति में पर्यटन विभाग के आधिकारिक व्हाट्सएप नंबर 8394833833 पर संपर्क करें।
-
सर्च इंजन सावधानी: गूगल पर आने वाले ‘Sponsored‘ विज्ञापनों पर क्लिक करने से बचें, ये अक्सर फर्जी होते हैं।
-
भुगतान से पहले सत्यापन: होटल बुकिंग से पहले होटल की आधिकारिक वेबसाइट या उनके पुराने रिकॉर्ड्स की जांच जरूर करें।
चारधाम यात्रा करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही इस पवित्र यात्रा को कड़वे अनुभव में बदल सकती है। सतर्क रहें, आधिकारिक माध्यमों का चुनाव करें और सुरक्षित तरीके से देवभूमि के दर्शन करें।



