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भीमताल: जब ‘मरीज’ बनकर अस्पताल पहुंचे सीडीओ, सिस्टम की खुली पोल; 22 कर्मचारियों पर गिरी गाज

हल्द्वानी/भीमताल। उत्तराखंड में सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के दावों के बीच शुक्रवार को भीमताल में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) अरविंद कुमार पांडे ने जब औचक निरीक्षण की कमान संभाली, तो सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में व्याप्त अनुशासनहीनता की कलई खुल गई। सीडीओ ने न केवल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बल्कि विकास खंड कार्यालय का भी बारीकी से मुआयना किया, जहां कुल 21 कर्मचारी अपनी ड्यूटी से नदारद पाए गए।

भेष बदलकर पहुंचे सीडीओ: स्वास्थ्य केंद्र में मंचा हड़कंप

शुक्रवार की सुबह भीमताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आम दिनों की तरह चहल-पहल थी, लेकिन व्यवस्थाएं पटरी से उतरी हुई थीं। औचक निरीक्षण के दौरान सीडीओ अरविंद कुमार पांडे ने एक अनूठा प्रयोग किया; वे स्वयं एक सामान्य मरीज बनकर उपचार की व्यवस्था जांचने पहुंचे। उच्चाधिकारी को अपने बीच एक सामान्य नागरिक के रूप में देखकर वहां मौजूद कर्मचारियों के हाथ-पांव फूल गए।

जब सीडीओ ने उपस्थिति पंजिका (अटेंडेंस रजिस्टर) की जांच की, तो स्थिति चौंकाने वाली थी। अस्पताल के कुल 15 कर्मचारी बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों का गायब होना गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए सीडीओ ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को तत्काल प्रभाव से सभी अनुपस्थित कर्मियों का वेतन रोकने और उनसे स्पष्टीकरण तलब करने के कड़े निर्देश दिए।

दवाओं की जांच और आयुष्मान कार्ड की समीक्षा

निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को भी परखा। उन्होंने फार्मेसी में जाकर दवाओं की एक्सपायरी डेट की सघन जांच की और सख्त हिदायत दी कि किसी भी सूरत में मरीजों को बाहर की दवाइयां न लिखी जाएं।

अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया:

  • मशीनरी की स्थिति: अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे मशीनों के संचालन की जानकारी ली गई ताकि मरीजों को निजी केंद्रों के चक्कर न काटने पड़ें।

  • आयुष्मान भारत योजना: योजना के तहत उपचार पा रहे लाभार्थियों से फीडबैक लिया गया और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि पात्र व्यक्तियों को शत-प्रतिशत लाभ मिले।

  • स्वच्छता अभियान: अस्पताल परिसर में फैली गंदगी पर असंतोष जाहिर करते हुए उन्होंने सफाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए।

विकास खंड कार्यालय में भी ‘प्रशासनिक सर्जिकल स्ट्राइक’

अस्पताल के बाद सीडीओ का अगला पड़ाव विकास खंड कार्यालय भीमताल रहा। यहां भी स्थिति बहुत बेहतर नहीं थी। कार्यालय में 6 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। निरीक्षण के दौरान एक गंभीर अनियमितता यह सामने आई कि कुछ कर्मचारियों ने ‘भ्रमण पंजिका’ (Tour Diary) में सात दिन पहले का दौरा तो दर्ज किया था, लेकिन उसके बाद से वे कार्यालय ही नहीं लौटे और न ही उनकी वापसी दर्ज थी।

सीडीओ ने इस कार्यशैली को “अस्वीकार्य” बताते हुए खंड विकास अधिकारी (BDO) को सभी लापरवाह कर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही, स्वयं सहायता समूहों के रजिस्टर वितरण में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई और उन्हें तत्काल वितरित करने को कहा।

31 मार्च की डेडलाइन: बजट उपयोग पर कड़ा रुख

वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम चरण को देखते हुए सीडीओ अरविंद कुमार पांडे ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 31 मार्च से पहले आवंटित बजट का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि बजट लैप्स होता है या विकास कार्यों की गति धीमी रहती है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

सुधरेगी कार्यप्रणाली?

सीडीओ के इस औचक निरीक्षण ने यह साफ कर दिया है कि शासन अब ‘दफ्तर से नदारद’ रहने वाले कर्मचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है। भीमताल में हुई इस कार्रवाई से पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह होगा कि वेतन रोकने और स्पष्टीकरण मांगने की इस कार्रवाई के बाद क्या धरातल पर सरकारी सेवाओं में सुधार आता है या नहीं।

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