
नई दिल्ली/देहरादून: पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उत्तराखंड के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह मुलाकात न सिर्फ औपचारिक रही, बल्कि राज्य के भविष्य की कई बड़ी योजनाओं और परियोजनाओं को लेकर निर्णायक मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने इस दौरान प्रधानमंत्री को उत्तराखंड के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों की सौगात भी भेंट की। इनमें बदरी गाय का घी, विभिन्न जिलों से मंगाई गई पांच प्रकार की राजमा, शहद और टिहरी स्थित शक्तिपीठ मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति शामिल रही। इस भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के साथ सीएम धामी ने प्रधानमंत्री को उत्तराखंड आने का निमंत्रण भी दिया।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा दिए जा रहे सहयोग और मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से हरिद्वार कुंभ 2027 के सफल आयोजन के लिए 500 करोड़ रुपये की सहायता, नदी जोड़ो परियोजना के तहत नेशनल वाटर डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा कराई जा रही फिजिबिलिटी स्टडी और राजाजी नेशनल पार्क स्थित चौरासी कुटिया के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृति के लिए धन्यवाद दिया।
इसके साथ ही पिथौरागढ़ की नैनी-सैनी हवाई पट्टी के विकास, चारधाम यात्रा के लिए सुरक्षित हेलीकॉप्टर सेवाओं और ऋषिकेश में विद्युत लाइनों के भूमिगतकरण जैसी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने देहरादून रिंग रोड, देहरादून-मसूरी मार्ग और चम्पावत बाईपास जैसी आधारभूत संरचना परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए भी प्रधानमंत्री का आभार जताया।
पर्यटन को लेकर भी बैठक में विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए चोपता, दुग्गलबिट्ठा, पटवाडांगर और शारदा कॉरिडोर जैसे क्षेत्रों में तेजी से कार्य किया जा रहा है। रामनगर, देहरादून, ऋषिकेश और त्रियुगीनारायण पहले से ही लोकप्रिय वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में उभर चुके हैं। इसके लिए राज्य सरकार एक विशेष नीति भी तैयार कर रही है।
आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य में ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन’ की अवधारणा पर काम किया जा रहा है। बेल केदार, अंजनीसैंण-टिहरी और लोहाघाट-श्यामलाताल जैसे क्षेत्रों को इसके लिए चिन्हित किया गया है। वहीं शीतकालीन यात्रा शुरू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि आदि कैलाश यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। वर्ष 2022 में जहां 1,761 श्रद्धालु पहुंचे थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 36,453 हो गई। इसके अलावा साहसिक पर्यटन के तहत रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
स्थानीय रोजगार और आर्थिक विकास पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की जानकारी दी। साथ ही एक जिला-एक मेला, क्लस्टर विद्यालय योजना और उत्तराखंड दर्शन कार्यक्रम जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को लेकर मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रधानमंत्री के सामने रखे। उन्होंने दिल्ली-Meerut RRTS परियोजना को हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार देने, टिहरी झील में सी-प्लेन सेवा शुरू करने और दिल्ली-हल्द्वानी एक्सप्रेस-वे के निर्माण का अनुरोध किया।
रेल परियोजनाओं में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के विभिन्न चरणों को शीघ्र पूरा करने, टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन, बागेश्वर-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन के सर्वे और हरिद्वार-देहरादून रेल लाइन के डबलिंग की मांग भी रखी गई। साथ ही ऋषिकेश-उत्तरकाशी रेल लाइन के निर्माण का प्रस्ताव भी दिया गया, जिससे गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा और सुगम हो सकेगी।
रक्षा क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड में डिफेंस इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने का आग्रह किया। कोटद्वार, हरिद्वार और देहरादून में डिफेंस इंडस्ट्रियल हब विकसित करने के लिए भी केंद्र से सहयोग मांगा गया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को राज्य में प्रस्तावित कई परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास के लिए आमंत्रित किया। इनमें दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे, टिहरी पम्प्ड स्टोरेज प्लांट, पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार और बनबसा लैंड पोर्ट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
इस मुलाकात को उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय से आने वाले समय में उत्तराखंड में पर्यटन, उद्योग, रोजगार और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।



