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उत्तराखंड: हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह भव्य रूप से सम्पन्न, 105 छात्रों को स्वर्ण पदक और 177 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को श्रीनगर (गढ़वाल) में बड़े उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया, जहां छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति डॉ योगेन्द्र नारायण ने की, जबकि उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 105 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें से 50 छात्र सत्र 2022-24 के और 55 छात्र-छात्राएं सत्र 2023-25 के रहे। यह उपलब्धि विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक रही। इसके अतिरिक्त 177 पंजीकृत शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जबकि दोनों सत्रों को मिलाकर कुल 319 शोधार्थियों ने डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। वहीं, स्नातकोत्तर स्तर पर 6806 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जो विश्वविद्यालय की व्यापक शैक्षणिक गतिविधियों को दर्शाता है।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति कर रहा है, जिसका प्रमाण इसकी बेहतर नैक ग्रेडिंग है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए और अधिक ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य करना होगा। राज्य सरकार इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने दीक्षांत समारोह में पारंपरिक सांस्कृतिक वेशभूषा को अपनाने की पहल की भी सराहना की और कहा कि इससे छात्रों में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अप्रैल माह में देश के उच्च शिक्षा मंत्री के साथ एनआईटी और गढ़वाल विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

कुलपति प्रो श्रीप्रकाश सिंह ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, शोध कार्यों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षा का समापन नहीं, बल्कि जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं होती, बल्कि यह उनके ज्ञान, परिश्रम और आत्मविश्वास की पहचान होती है। उन्होंने सभी दीक्षार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में ऐसे कार्य करें जिससे उनके माता-पिता, गुरु, विश्वविद्यालय और देश को उन पर गर्व हो।

इस अवसर पर धर्मेन्द्र प्रधान का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने विद्यार्थियों से देश की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल व्यक्तिगत उन्नति के लिए ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए भी करें।

अध्यक्षीय संबोधन में कुलाधिपति डॉ योगेन्द्र नारायण ने कहा कि छात्रों को अतीत की बुद्धिमत्ता से सीख लेते हुए वर्तमान के ज्ञान के आधार पर नवाचार और विकास की दिशा में कार्य करना चाहिए। साथ ही, उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करना होगा।

कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के ग्रामीण एवं अभियंत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका “माउंटेन रिसर्च” के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। समारोह के अंत में कुलसचिव अनीश उज जमान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और आयोजन की सफलता के लिए सभी समितियों और समन्वयकों को बधाई दी।

इस भव्य आयोजन में श्रीनगर की महापौर, एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के पूर्व और वर्तमान प्रोफेसर, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह ने न केवल विद्यार्थियों के जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव को चिह्नित किया, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को भी सुदृढ़ करने का संदेश दिया।

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