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देहरादून की सड़कों पर उतरा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सैलाब: मानदेय वृद्धि को लेकर CM आवास कूच, पुलिस के साथ तीखी झड़प

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून शनिवार को नारों और आक्रोश से गूंज उठी। अपनी लंबित मांगों और अल्प मानदेय के खिलाफ प्रदेश भर से जुटी हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ‘हुंकार’ भरते हुए मुख्यमंत्री आवास कूच किया। परेड मैदान से शुरू हुआ यह प्रदर्शन हाथीबड़कला बैरिकेडिंग पर उस समय संघर्ष में तब्दील हो गया, जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस घेरा तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच भारी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद आक्रोशित महिलाएं सड़क पर ही धरने पर बैठ गईं।

परेड मैदान से CM आवास तक ‘इंकलाब’ की गूंज

शनिवार सुबह से ही प्रदेश के पर्वतीय और मैदानी जनपदों से आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री, सेविका और मिनी कर्मचारी देहरादून के परेड मैदान में जुटना शुरू हो गए थे। आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेविका मिनी कर्मचारी संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं का विशाल हुजूम बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार उनकी जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रही है, जिससे उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

जैसे ही यह विशाल रैली न्यू कैंट रोड स्थित हाथीबड़कला पहुंची, वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक लिया। कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़ने की जिद की, जिसे लेकर पुलिसकर्मियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। जब पुलिस ने आगे नहीं बढ़ने दिया, तो हजारों महिलाएं वहीं सड़क पर बैठ गईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।


‘महंगाई के दौर में अल्प मानदेय पर गुजारा नामुमकिन’

धरने को संबोधित करते हुए संगठन की प्रदेश अध्यक्ष रेखा नेगी ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं को सफल बनाने में रीढ़ की हड्डी की तरह काम करती हैं, लेकिन उनके खुद के परिवार आज भुखमरी की कगार पर हैं।

प्रमुख मांगें जो प्रदर्शन का केंद्र रहीं:

  • न्यूनतम मानदेय: कार्यकर्ताओं की सबसे बड़ी मांग मानदेय को बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह करने की है।

  • प्रतिदिन वृद्धि: राज्य सरकार से 140 रुपये प्रतिदिन की मानदेय वृद्धि की मांग की गई है।

  • केंद्र को प्रस्ताव: केंद्र सरकार को 150 रुपये प्रतिदिन की वृद्धि का प्रस्ताव भेजने का दबाव बनाया गया है।

  • बायोमेट्रिक का विरोध: कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि उन्हें बायोमेट्रिक हाजिरी मशीन से न जोड़ा जाए।

रेखा नेगी ने भावुक होते हुए कहा, इतने कम मानदेय में एक परिवार का भरण-पोषण करना आज के दौर में असंभव है। ऊपर से विभाग द्वारा आए दिन काम का अतिरिक्त बोझ डाल दिया जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें सिर्फ आश्वासन दे रही हैं, ठोस कदम कोई नहीं उठा रहा।


काम का बोझ और तकनीकी जटिलताओं से नाराजगी

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने तकनीकी बदलावों पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका तर्क है कि पर्वतीय क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते बायोमेट्रिक मशीनें व्यावहारिक नहीं हैं। इसके अलावा, कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मूल कार्यों के अलावा अन्य विभागीय सर्वे और ड्यूटी में भी झोंक दिया जाता है, लेकिन इसके बदले मिलने वाला पारिश्रमिक नगण्य है।

प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को अल्टीमेटम

हंगामे और प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। आंगनबाड़ी संगठन ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन सौंपा। कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मानदेय वृद्धि और अन्य मांगों पर शासनादेश जारी नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे और कार्य बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाएंगे।


क्या है सरकार का रुख?

हालांकि अभी तक सरकार की ओर से मानदेय वृद्धि को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मांगों पर विचार किया जा रहा है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लपक लिया है और सरकार पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया है।

देहरादून की सड़कों पर आज जो आक्रोश दिखा, वह यह बताने के लिए काफी है कि उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री आवास पर टिकी हैं कि क्या सरकार बजट सत्र से पहले इन ‘कोरोना वॉरियर्स’ और समाज के आधार स्तंभ को कोई बड़ी सौगात देती है या नहीं।


आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह शक्ति प्रदर्शन न केवल उनकी आर्थिक बदहाली को दर्शाता है, बल्कि व्यवस्था के प्रति उनके गहरे असंतोष को भी उजागर करता है। 18 हजार रुपये की मांग पर अड़ी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वे आश्वासनों से मानने वाली नहीं हैं।

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