
नई दिल्ली, ब्यूरो: केंद्र सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति भवन ने देश के प्रशासनिक और संवैधानिक ढांचे में एक बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों (LG) की नई नियुक्तियों की घोषणा की है। इस फेरबदल में सबसे चौंकाने वाला नाम देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां तरनजीत सिंह संधू को नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, दिल्ली के निवर्तमान एलजी विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस बड़े फेरबदल ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में राजनीतिक घमासान भी शुरू कर दिया है।
दिल्ली और लद्दाख: उपराज्यपालों की भूमिका में बदलाव
राजधानी दिल्ली में पिछले काफी समय से जारी प्रशासनिक खींचतान के बीच पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया एलजी बनाया गया है। संधू की नियुक्ति को दिल्ली और केंद्र के बीच समन्वय सुधारने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर, विनय कुमार सक्सेना, जिन्होंने दिल्ली के एलजी के रूप में कई महत्वपूर्ण और विवादित फैसले लिए, अब लद्दाख के नए उपराज्यपाल होंगे। लद्दाख जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में उनके अनुभव का लाभ उठाने की योजना केंद्र सरकार की दिखाई देती है।
बिहार और महाराष्ट्र: नए चेहरों को मिली कमान
हिंदी भाषी प्रदेशों में बिहार की राजनीति में भी बड़ा बदलाव हुआ है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। हसनैन का सुरक्षा मामलों और रणनीतिक विश्लेषण में लंबा अनुभव रहा है, जो बिहार जैसे बड़े राज्य के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
वहीं, बिहार बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व स्पीकर नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है। पूर्वोत्तर राज्यों में अनुभवी नेताओं को भेजने की केंद्र की नीति के तहत यह नियुक्ति अहम मानी जा रही है।
महाराष्ट्र में भी बदलाव: तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को अब देश के आर्थिक केंद्र महाराष्ट्र का नया गवर्नर बनाया गया है। वह रमेश बैस की जगह लेंगे। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पश्चिम बंगाल: सीवी आनंद बोस का इस्तीफा और आर.एन. रवि की एंट्री
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल की रही। राष्ट्रपति ने पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉ. सी.वी. आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उनकी जगह तमिलनाडु के अनुभवी राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है।
आनंद बोस ने अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा, “साढ़े तीन साल का कार्यकाल पर्याप्त था।” हालांकि, उनके इस कदम ने ममता बनर्जी सरकार और राजभवन के बीच चल रहे पुराने विवादों को फिर से हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह इस अचानक इस्तीफे से “स्तब्ध और बेहद चिंतित” हैं।
राज्यपालों और उपराज्यपालों की नई सूची: एक नजर में
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | नया राज्यपाल / उपराज्यपाल |
| दिल्ली (LG) | तरनजीत सिंह संधू |
| बिहार | लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन |
| पश्चिम बंगाल | आर.एन. रवि |
| महाराष्ट्र | जिष्णु देव वर्मा |
| तेलंगाना | शिव प्रताप शुक्ला |
| हिमाचल प्रदेश | कविंदर गुप्ता |
| नागालैंड | नंद किशोर यादव |
| लद्दाख (LG) | विनय कुमार सक्सेना |
| तमिलनाडु | राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर (अतिरिक्त प्रभार) |
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
राज्यपालों के इस फेरबदल पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने के समय पर सवाल उठाए हैं, वहीं बीजेपी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने इसे सामान्य प्रक्रिया करार दिया है। भट्टाचार्य ने कहा, “राजभवन में बदलाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है। सुना है उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया है, तृणमूल कांग्रेस को इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।”
हिमाचल प्रदेश में कविंदर गुप्ता की नियुक्ति को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, जो पहले जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति को पहाड़ी राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने के कदम के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है केंद्र का मास्टरस्ट्रोक?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के इन बदलावों के पीछे केंद्र सरकार की एक सुविचारित रणनीति है। आगामी चुनावों और राज्यों की आंतरिक सुरक्षा को देखते हुए अनुभवी पूर्व सैनिकों (जैसे सैयद अता हसनैन) और मंझे हुए राजनेताओं (जैसे नंद किशोर यादव) को राज्यपाल के पद पर बैठाया गया है। दिल्ली में तरनजीत सिंह संधू की नियुक्ति वैश्विक छवि और प्रशासनिक सुचारूता को ध्यान में रखकर की गई है।
राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी यह अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। आने वाले दिनों में इन नए राज्यपालों के शपथ ग्रहण समारोह संबंधित राज्यों की राजधानियों में आयोजित किए जाएंगे।



