उत्तराखंडफीचर्ड

आस्था का नया कीर्तिमान: त्रियुगीनारायण मंदिर में शीतकालीन यात्रा ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, 47 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने टेका मत्था

रुद्रप्रयाग | देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित पौराणिक त्रियुगीनारायण मंदिर (Triyuginarayan Temple) ने इस वर्ष शीतकालीन यात्रा के दौरान श्रद्धा और भक्ति का एक नया इतिहास रच दिया है। जहां अमूमन हिमालयी क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी के कारण तीर्थाटन की गति धीमी पड़ जाती है, वहीं त्रियुगीनारायण में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।

24 अक्टूबर से शुरू होकर 21 फरवरी तक चले शीतकालीन दर्शन काल में कुल 47,868 श्रद्धालुओं ने भगवान त्रियुगीनारायण के दरबार में हाजिरी लगाई। यह आंकड़ा न केवल पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 7 हजार अधिक है, बल्कि यह शीतकाल में धार्मिक पर्यटन के निरंतर विस्तार का एक सशक्त संकेत भी है।

आंकड़ों की जुबानी: आस्था की निरंतर बढ़ती लहर

मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष जहां शीतकालीन यात्रा का आंकड़ा 40 हजार के करीब सिमट गया था, वहीं इस बार इसने 47 हजार की सीमा को पार कर लिया।

श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर विधिवत पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया। कड़ाके की ठंड के बावजूद देश के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने विश्व शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मंगलकामनाएं कीं। Triyuginarayan Temple Winter Yatra की इस सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि आस्था के आगे मौसम की चुनौतियां बौनी साबित होती हैं।


शिव-पार्वती के विवाह की साक्षी है यह दिव्य धरा

त्रियुगीनारायण मंदिर की महत्ता इसके पौराणिक इतिहास से जुड़ी है। मान्यताओं के अनुसार, इसी पवित्र स्थान पर सतयुग में भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। मंदिर परिसर में आज भी वह ‘अखंड अग्निकुंड’ प्रज्वलित है, जिसे उस दिव्य विवाह का साक्षात गवाह माना जाता है।

श्रद्धालु इस पवित्र अग्नि की भभूत (राख) को अपने साथ ले जाते हैं और इसे वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि का प्रतीक मानते हैं। यही कारण है कि इसे ‘त्रियुगी’ (तीन युगों से प्रज्वलित) नारायण मंदिर कहा जाता है।


देश का उभरता हुआ ‘प्रीमियम वेडिंग डेस्टिनेशन’

पिछले कुछ वर्षों में त्रियुगीनारायण मंदिर की पहचान केवल एक तीर्थस्थल तक सीमित नहीं रही है, बल्कि यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित वेडिंग डेस्टिनेशन (Wedding Destination) के रूप में उभरा है।

  • सेलिब्रिटी चॉइस: कई वीआईपी और मशहूर हस्तियों द्वारा यहां विवाह करने के बाद इसकी लोकप्रियता वैश्विक स्तर पर बढ़ी है।

  • लंबी वेटिंग लिस्ट: शुभ मुहूर्तों में यहां विवाह संपन्न कराने के लिए नवयुगलों की लंबी बुकिंग सूची देखी जा रही है।

  • महाशिवरात्रि का विशेष महत्व: इस वर्ष महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां रिकॉर्ड संख्या में विवाह संपन्न हुए, जिसने मंदिर की राष्ट्रीय पहचान को और अधिक सुदृढ़ किया है।


पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बल

श्रद्धालुओं और विवाह समारोहों की इस बढ़ती संख्या का सीधा सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। Uttarakhand Religious Tourism के इस बढ़ते ग्राफ ने क्षेत्रीय विकास के नए द्वार खोले हैं:

  1. व्यवसाय में उछाल: स्थानीय बाजार, होटल, होमस्टे और रेस्टोरेंट शीतकाल में भी गुलजार रहे।

  2. रोजगार के अवसर: पंडिताई व्यवस्था, परिवहन क्षेत्र और गाइड के रूप में स्थानीय युवाओं को निरंतर रोजगार मिल रहा है।

  3. बुनियादी ढांचा: बेहतर सड़क संपर्क और ऑनलाइन सूचना प्रणाली ने यात्रियों की राह आसान बनाई है, जिसका श्रेय मंदिर प्रबंधन और शासन के प्रयासों को जाता है।

मंदिर प्रबंधक अजय शर्मा के अनुसार, “शीतकालीन यात्रा में इस बार की अप्रत्याशित वृद्धि हमारे लिए उत्साहजनक है। बेहतर कनेक्टिविटी और ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ के रूप में मंदिर की बढ़ती साख ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।”


धार्मिक पर्यटन का भविष्य

त्रियुगीनारायण मंदिर में उमड़ी यह भीड़ इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के इतर भी धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। शीतकाल में भी 47,868 श्रद्धालुओं का पहुंचना यह दर्शाता है कि यदि बुनियादी सुविधाएं और सूचना तंत्र मजबूत हो, तो हिमालयी क्षेत्र वर्षभर श्रद्धालुओं को आकर्षित कर सकते हैं।

भगवान विष्णु के इस मंदिर की दिव्यता और शिव-शक्ति के विवाह की यह पावन भूमि आने वाले समय में अध्यात्म और पर्यटन के संगम का सबसे बड़ा केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button