हरिद्वार | विशेष संवाददाता: धर्मनगरी हरिद्वार के ज्वालापुर क्षेत्र से ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और आम जनता दोनों को हैरान कर दिया है। ‘जादू’ के खेल और रातों-रात अमीर बनने के लालच में एक परिवार अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी गंवा बैठा। ज्वालापुर की लाल मंदिर कॉलोनी निवासी एक विधवा महिला से नोट छापने की मशीन और केमिकल के नाम पर आरोपियों ने कुल 9 लाख 30 हजार रुपये की ठगी की है।
पुलिस ने इस संबंध में मेरठ निवासी एक मुख्य आरोपी और उसके दो साथियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। Haridwar Fraud Case की यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
भरोसे की आड़ में रची गई साजिश
ठगी का शिकार हुई महिला, संतरी पत्नी स्वर्गीय राधेश्याम, ज्वालापुर की लाल मंदिर कॉलोनी में रहती हैं। संतरी मेहनत-मजदूरी और ठेली लगाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती हैं। पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार, मुख्य आरोपी गुलाम (निवासी अब्दुल्लापुर, मेरठ) पिछले कई वर्षों से उनके घर आता-जाता था। वह मृत राधेश्याम का परिचित था, जिसके कारण परिवार उस पर अटूट विश्वास करता था।
इसी विश्वास का फायदा उठाते हुए गुलाम ने ठगी की बिसात बिछाई। बीती 26 जनवरी को गुलाम अपने दो साथियों, बाबू और गगन के साथ संतरी के घर पहुंचा। यहीं से शुरू हुआ “नोट छापने” के झांसे का वो खेल, जिसने एक गरीब परिवार को कर्ज के जाल में धकेल दिया।
जादू का खेल और नोट छापने का ‘तिलिस्म’
आरोपियों ने खुद को जादूगर और सिद्ध पुरुष बताते हुए परिवार को प्रभावित करना शुरू किया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास एक ऐसी जादुई मशीन और विशेष केमिकल (कच्चा माल) है, जिससे असली नोट छापे जा सकते हैं। परिवार को विश्वास दिलाने के लिए उन्होंने कुछ ‘जादू के करतब’ भी दिखाए।
आरोपियों ने संतरी और उसके बेटों को सपना दिखाया कि यदि वे मशीन और कच्चा माल खरीदने के लिए निवेश करते हैं, तो उन्हें बदले में करोड़ों रुपये मिलेंगे। बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में महिला उनके झांसे में आ गई।
किस्तों में वसूली गई भारी भरकम रकम
ठगी की यह वारदात किसी एक दिन की नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई:
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पहली किस्त (30 जनवरी): जटवाड़ा पुल पर रात के अंधेरे में आरोपियों ने महिला से 4 लाख 30 हजार रुपये नकद लिए।
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दूसरी किस्त (31 जनवरी): अगले ही दिन आरोपी महिला के घर पहुंचे और 3 लाख रुपये फिर से ऐंठ लिए।
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ऑनलाइन ट्रांसफर: इसके अलावा, लगभग 1.30 लाख रुपये से अधिक की राशि एक यूपीआई (UPI) आईडी पर अलग-अलग समय में ट्रांसफर करवाई गई।
Jwalapur Police की जांच में सामने आया है कि इस बड़ी रकम को जुटाने के लिए विधवा महिला ने अपने पुश्तैनी जेवर तक बेच दिए और रिश्तेदारों से मोटी ब्याज दर पर उधार लिया। उन्हें उम्मीद थी कि ‘जादुई नोट’ आने के बाद सारा कर्ज उतर जाएगा।
खुलासा और पुलिस की कार्रवाई
जब काफी दिन बीत जाने के बाद भी न तो नोट छापने की मशीन आई और न ही आरोपियों ने पैसे लौटाए, तो महिला ने गुलाम से संपर्क करना चाहा। आरोपियों ने बहाने बनाना शुरू किया और अंततः पीड़िता का फोन उठाना बंद कर दिया। तब जाकर महिला के बेटों को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने ज्वालापुर कोतवाली में न्याय की गुहार लगाई।
ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने मीडिया को बताया:
“मामला बेहद गंभीर है। आरोपियों ने एक गरीब परिवार की मजबूरी और अंधविश्वास का फायदा उठाया है। गुलाम, बाबू और गगन के खिलाफ धोखाधड़ी (IPC/BNS की संबंधित धाराएं) के तहत मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस की एक टीम मेरठ और संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।”
अंधविश्वास बनाम आधुनिक ठगी: एक सबक
Haridwar Crime News की यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है। डिजिटल इंडिया के दौर में भी ‘जादू से नोट छापने’ जैसे पुराने हथकंडों का इस्तेमाल कर अपराधी लोगों को ठग रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे रातों-रात पैसा दोगुना करने या बिना मेहनत के धन कमाने के किसी भी प्रलोभन में न आएं।
यह मामला केवल आर्थिक नुकसान का नहीं है, बल्कि एक विधवा महिला के संघर्षों पर किए गए प्रहार का भी है। अब सबकी निगाहें हरिद्वार पुलिस पर टिकी हैं कि वह कब तक इन ‘जादुई ठगों’ को सलाखों के पीछे पहुंचाती है और पीड़िता की डूबी हुई रकम वापस दिला पाती है।
ठगी के बढ़ते मामलों के बीच Note Printing Machine Scam ने एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पर सवाल खड़े किए हैं। हरिद्वार पुलिस इस मामले में ‘अब्दुल्लापुर (मेरठ)’ कनेक्शन खंगाल रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों का भी पता लगाया जा सके।



