
पौड़ी/देहरादून: उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के बाद अब धामी सरकार ने ‘विकसित उत्तराखंड’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए एक अनूठी और लोकतांत्रिक पहल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश का आगामी बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि सवा करोड़ प्रदेशवासियों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब होगा। शुक्रवार को जनपद पौड़ी के रांसी स्थित बहुउद्देश्यीय भवन में आयोजित ‘बजट पूर्व संवाद’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज के हर वर्ग से सीधे मुखातिब होकर उनके सुझावों को नीतियों में जगह देने का वादा किया।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान ‘संवाद, सहयोग, सुझाव और सहभागिता’ को उत्तराखंड की असली ताकत बताते हुए कहा कि राज्य का आर्थिक ढांचा अब जनता की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया जाएगा।
बजट नहीं, विकसित उत्तराखंड का ‘रोडमैप’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार का प्राथमिक उद्देश्य एक ऐसा जनहितकारी बजट तैयार करना है, जो प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय विशेषताओं के अनुकूल हो। उन्होंने जोर देकर कहा, “बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर उत्तराखंड निर्माण का ब्लूप्रिंट है। हम चाहते हैं कि विकास की किरण समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे।”
इस संवाद कार्यक्रम में कृषकों, उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों, पर्यटन व्यवसायियों और मत्स्य पालकों सहित विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने विश्वास दिलाया कि प्राप्त हुए व्यावहारिक सुझावों का गंभीरता से परीक्षण कर उन्हें आगामी वित्तीय नीति का हिस्सा बनाया जाएगा।

पर्वतीय अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार पर फोकस
संवाद के दौरान सबसे अधिक जोर पर्वतीय क्षेत्रों से हो रहे पलायन को रोकने और स्थानीय संसाधनों के दोहन पर दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में होमस्टे, स्वरोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं। सरकार का लक्ष्य अब किसानों को ‘एग्री-प्रीन्योर’ (कृषि-उद्यमी) के रूप में विकसित करना है।
संवाद के प्रमुख बिंदु और जनता के सुझाव:
-
कृषि एवं उद्यान: जंगली जानवरों से फसल सुरक्षा के लिए प्रभावी घेराबंदी, क्लस्टर आधारित खेती और जिला स्तर पर प्रोसेसिंग केंद्रों (प्रसंस्करण केंद्रों) की स्थापना।
-
पर्यटन: होमस्टे संचालकों को रियायती दर पर ऋण, हेली सेवा का विस्तार और ‘संस्कृत ग्रामों’ को पर्यटक ग्राम के रूप में विकसित करना।
-
उद्योग एवं MSME: पर्वतीय क्षेत्रों में उद्योग लगाने पर विशेष पूंजीगत सब्सिडी और स्थानीय उत्पादों पर आधारित लघु इकाइयों को प्रोत्साहन।
महिला सशक्तिकरण: ‘लखपति दीदी’ से आत्मनिर्भरता की ओर
बजट पूर्व संवाद में ‘लखपति दीदी’ योजना और महिला स्वयं सहायता समूहों की सफलता पर भी चर्चा हुई। महिलाओं ने सुझाव दिया कि प्रत्येक जिले में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं और स्थानीय सेवाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि उत्तराखंड की आर्थिकी की रीढ़ हमारी मातृशक्ति है, और उनके आर्थिक सशक्तिकरण के बिना राज्य का विकास अधूरा है।
शहरी बुनियादी ढांचा और पर्यावरण संरक्षण
शहरी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और नगर निकायों के प्रमुखों ने ‘सोलर सिटी’ (Solar City) की अवधारणा को बढ़ावा देने और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को सुदृढ़ करने का सुझाव दिया। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक सशक्त बनाने और बंजर भूमि पर सोलर प्लांट लगाने जैसे दूरगामी विचार साझा किए गए।
प्रशासनिक तत्परता: पारदर्शिता के साथ खर्च होगा हर रुपया
कार्यक्रम में मौजूद वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने बजट की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस संवाद का उद्देश्य वित्तीय संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करना है, ताकि बजट का हर रुपया सही व्यक्ति तक पहुंचे।
जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने भी जनता के उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के सीधे संवाद से जनता का सरकार पर विश्वास बढ़ता है। कार्यक्रम का सफल संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली ने किया, जिसमें 200 से अधिक विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखे।
‘विकसित उत्तराखंड @2047’ का संकल्प
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के समापन पर वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को देश का अग्रणी और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने वित्तीय अनुशासन के मामले में देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। अब जनसहभागिता से तैयार होने वाला यह आगामी बजट राज्य की विकास यात्रा को एक नई गति और दिशा प्रदान करेगा।
उपस्थिति: इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय विधायक राजकुमार पोरी, जिला पंचायत अध्यक्षा रचना बुटोला, विभिन्न नगर निगमों के मेयर (श्रीनगर, ऋषिकेश, कोटद्वार, रुड़की), शासन के वरिष्ठ अधिकारीगण, कृषि वैज्ञानिक और भारी संख्या में स्थानीय उद्यमी व हितधारक उपस्थित रहे।


