
पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के न्यायिक संस्थानों को निशाना बनाने की साजिशों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। देवभूमि के विभिन्न जिलों में लगातार मिल रही धमकियों के बीच अब पौड़ी गढ़वाल जिले के जिला एवं सत्र न्यायालय और जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय को भी एक संदिग्ध ई-मेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। बुधवार को मिली इस धमकी के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
ई-मेल मिलते ही ‘वार फुटिंग’ पर एक्शन
बुधवार सुबह जैसे ही पौड़ी स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय और कलेक्ट्रेट कार्यालय के आधिकारिक सिस्टम पर धमकी भरा ई-मेल प्राप्त हुआ, सूचना बिजली की तरह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुँची। पौड़ी पुलिस ने बिना एक पल की देरी किए तत्काल उच्च सतर्कता (High Alert) बरतते हुए पूरे परिसर को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के प्रत्यक्ष निर्देशन में दोनों महत्वपूर्ण शासकीय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाया गया। सुरक्षा के मद्देनजर आम जनता की आवाजाही को तुरंत सीमित कर दिया गया और परिसर के भीतर मौजूद कर्मचारियों व वादकारियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
BDS और डॉग स्क्वायड का सघन चेकिंग अभियान
धमकी की गंभीरता को देखते हुए पौड़ी पुलिस ने तत्काल बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की टीमों को मौके पर बुलाया। विशेषज्ञों की इन टीमों ने न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर के चप्पे-चप्पे की खाक छानी।
तलाशी अभियान के दौरान निम्नलिखित स्थानों पर विशेष ध्यान दिया गया:
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न्यायालय कक्ष एवं कार्यालय: न्यायाधीशों के कक्ष और प्रशासनिक कार्यालयों की सूक्ष्मता से जांच की गई।
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अभिलेखागार (Records Room): संवेदनशील दस्तावेजों वाले कमरों की मेटल डिटेक्टर से जांच हुई।
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पार्किंग एवं वाहन: परिसर में खड़े प्रत्येक दोपहिया और चौपहिया वाहनों की डॉग स्क्वायड के जरिए चेकिंग की गई।
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संवेदनशील स्थान: सीढ़ियों, वॉशरूम और कबाड़ रखे क्षेत्रों का गहन निरीक्षण किया गया।
राहत की बात यह रही कि प्रारंभिक जांच में किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई है। हालांकि, पुलिस इसे हल्के में नहीं ले रही है और एहतियात के तौर पर पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
उत्तराखंड के न्यायालयों पर ‘डिजिटल आतंक’ का साया
गौरतलब है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है। पिछले तीन दिनों से उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों के न्यायालयों को इसी तरह के धमकी भरे ई-मेल भेजे जा रहे हैं। पौड़ी के साथ-साथ बुधवार को देहरादून जिला न्यायालय को भी ऐसी ही धमकी मिली।
अब तक धमकी पाने वाले जिलों की सूची लंबी होती जा रही है:
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टिहरी और रुद्रप्रयाग
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उत्तरकाशी और हरिद्वार
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देहरादून और पिथौरागढ़
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अल्मोड़ा और नैनीताल
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पौड़ी गढ़वाल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य राज्य की न्यायिक व्यवस्था और प्रशासनिक मशीनरी में भय पैदा करना और कामकाज को बाधित करना है।
साइबर सेल की रडार पर ‘धमकीबाज’
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह ई-मेल कहां से आया और इसका आईपी एड्रेस (IP Address) क्या है, इसकी जांच के लिए साइबर सेल की मदद ली जा रही है। प्रारंभिक कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इन सभी जिलों में भेजे गए ई-मेल का स्रोत एक ही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का संदेश:
“हम ई-मेल भेजने वाले की पहचान करने के बहुत करीब हैं। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और न्यायालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। हम जनता से अपील करते हैं कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें।”
आम जनजीवन पर असर
भले ही पुलिस ने स्थिति को संभाल लिया है, लेकिन बार-बार मिल रही इन धमकियों से न्यायालय आने वाले लोगों और वकीलों के बीच चिंता का माहौल है। पौड़ी बार एसोसिएशन ने भी इस सुरक्षा चूक पर चिंता जाहिर की है और स्थायी सुरक्षा प्रोटोकॉल को और सख्त करने की मांग की है।
पौड़ी गढ़वाल और उत्तराखंड के अन्य जिलों में सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं। बॉर्डर चेकपोस्ट से लेकर सरकारी भवनों तक निगरानी बढ़ा दी गई है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले को ‘डिजिटल टेररिज्म’ के नजरिए से भी देख रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही इन धमकियों के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।



