नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर तहलका मचाने वाली ‘एप्सटीन फाइल्स’ की गूँज अब भारतीय संसद के गलियारों में सुनाई दे रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम इस विवादित फाइल से जोड़ने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। इन आरोपों पर चुप रहने के बजाय केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तथ्यों के साथ राहुल गांधी पर करारा पलटवार किया है। पुरी ने न केवल एप्सटीन से मुलाकातों का सच बताया, बल्कि एक ऐसे ईमेल का खुलासा किया जिसमें एप्सटीन ने भारतीयों के प्रति अपनी नफरत जाहिर की थी।
राहुल गांधी के आरोप और हरदीप पुरी का ‘फैक्ट चेक’
संसद में बहस के दौरान राहुल गांधी ने दावा किया कि एप्सटीन से जुड़े 3 मिलियन ईमेल के खुलासे में भारत के एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल है। राहुल गांधी के इस हमले पर जवाब देते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राहुल गांधी को ‘आधारहीन आरोप’ लगाने की पुरानी आदत है।
पुरी ने स्पष्ट किया कि जब इन ईमेल्स की बात की जा रही है, तब वह भारत सरकार की सेवा में नहीं थे। उन्होंने बताया, “विदेश सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद मैं ‘इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट’ (IPI) में सेक्रेटरी जनरल के रूप में कार्यरत था। मेरे बॉस एप्सटीन को जानते थे और उसी संदर्भ में 8 साल के कार्यकाल के दौरान मेरी एप्सटीन से महज तीन बार औपचारिक मुलाकात हुई थी।”
ईमेल का सच: “डिजिटल इंडिया” की चर्चा और एप्सटीन की नफरत
हरदीप सिंह पुरी ने उस विवादित ईमेल की पूरी कहानी बयां की जिसे आधार बनाकर उन पर निशाना साधा जा रहा है। उन्होंने बताया कि 13 नवंबर 2014 को उन्होंने लिंकडिन (LinkedIn) के संस्थापक रीड हॉफमैन को एक ईमेल भेजा था।
ईमेल के मुख्य बिंदु:
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डिजिटल इंडिया का प्रचार: पुरी ने एक निजी व्यक्ति के तौर पर हॉफमैन को लिखा था कि भारत में डिजिटाइजेशन तेजी से बढ़ रहा है और उन्हें भारत आकर इसकी प्रगति देखनी चाहिए।
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नस्लवादी टिप्पणी का खुलासा: इस ईमेल में एप्सटीन को केवल CC किया गया था। इसके जवाब में एप्सटीन ने रीड हॉफमैन को मेल करते हुए हरदीप पुरी के लिए ‘Two Face Person’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और भारतीयों के प्रति बेहद आपत्तिजनक व नस्लवादी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि “अगर सांप और भारतीय साथ दिखें, तो पहले भारतीय को मारो।”
पुरी ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, “जो व्यक्ति मेरे और मेरे देश के खिलाफ इतनी नफरत रखता था, राहुल गांधी मेरा नाम उससे जोड़ रहे हैं। आरोप लगाने से पहले कम से कम ईमेल पढ़ तो लेते।”
‘आईलैंड’ विवाद पर सफाई: “कभी पर्सनली नहीं मिला”
केंद्रीय मंत्री ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि उनका जेफ्री एप्सटीन के किसी भी निजी ‘आईलैंड’ या उसकी संदिग्ध गतिविधियों से कोई लेना-देना नहीं रहा है। उन्होंने साफ किया कि उनकी मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर और सार्वजनिक मंचों पर थीं। उन्होंने कहा, “मेरा एप्सटीन से कभी कोई व्यक्तिगत संबंध नहीं रहा और न ही मैं कभी उससे अकेले में मिला हूँ। राहुल गांधी को डिक्शनरी की मीनिंग पता हो न हो, कम से कम ‘कॉमन सेंस’ का इस्तेमाल तो करना चाहिए।”
राहुल गांधी बनाम पीएम मोदी: अर्थव्यवस्था पर घेरा
प्रेस कॉन्फ्रेंस और सदन में जवाब के दौरान हरदीप पुरी ने राहुल गांधी की राजनीतिक समझ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की तुलना करते हुए कहा कि एक नेता (पीएम मोदी) देश को 10वें पायदान से 4थी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर ले आए हैं, जबकि दूसरे नेता (राहुल गांधी) कभी-कभार देश में आते हैं, संसद में पर्चा पढ़ते हैं और भाग जाते हैं।
पुरी ने राहुल गांधी के पुराने व्यवहार को याद दिलाते हुए कहा कि यह वही नेता हैं जो अपनी ही सरकार (मनमोहन सिंह सरकार) के अध्यादेश को सरेआम फाड़ देते थे। उन्होंने राहुल गांधी को नसीहत दी कि भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ कहने से पहले उन्हें आंकड़ों का अध्ययन करना चाहिए।
सियासी गलियारों में चर्चा: ‘ब्राजीलियन मॉडल’ और ‘डिक्शनरी’ तंज
हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के पुराने बयानों पर चुटकी लेते हुए कहा कि जो नेता एक बार यह दावा कर रहे थे कि एक ब्राजीलियन मॉडल ने 21 जगहों पर वोट बना लिया, उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है। पुरी ने कहा कि राहुल गांधी बिना किसी होमवर्क के गंभीर मुद्दों पर राजनीति करते हैं, जिससे उनकी खुद की साख गिरती है।
तथ्यों की लड़ाई में उलझी सियासत
एप्सटीन फाइल्स का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील है, और इसमें किसी भारतीय मंत्री का नाम आना गंभीर विषय है। हालांकि, हरदीप सिंह पुरी द्वारा पेश किए गए स्पष्टीकरण और ईमेल के सबूतों ने राहुल गांधी के आरोपों की धार को कुंद करने का प्रयास किया है। अब गेंद कांग्रेस के पाले में है कि क्या उनके पास हरदीप पुरी के दावों के खिलाफ कोई और पुख्ता सबूत हैं या यह विवाद केवल जुबानी जंग तक ही सीमित रहेगा।



